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क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल में बड़ा बदलाव, सितंबर के आंकड़ों ने चौंकाया

Rajeshwari Nishad
29 Oct 2026 3:38 PM IST
क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल में बड़ा बदलाव, सितंबर के आंकड़ों ने चौंकाया
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बिज़नेस। भारत में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है, लेकिन सितंबर 2026 में इनसे किए जाने वाले खर्च को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज (Jefferies) की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में क्रेडिट कार्ड से होने वाला कुल खर्च सालाना आधार पर 6.2 प्रतिशत घट गया। यह गिरावट इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि अगस्त 2026 में क्रेडिट कार्ड खर्च में 5.5 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई थी। हालांकि, सितंबर में क्रेडिट कार्ड की संख्या बढ़ी है, जिससे स्पष्ट होता है कि देश में कार्ड का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों का आधार बढ़ रहा है, लेकिन खर्च की रफ्तार कमजोर हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में कुल क्रेडिट कार्ड खर्च लगभग 2.03 लाख करोड़ रुपये रहा।
सितंबर में 6.2 प्रतिशत घटा क्रेडिट कार्ड खर्च
जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2026 में देशभर में क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किए गए कुल खर्च में साल-दर-साल आधार पर 6.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।इससे पहले अगस्त में सालाना आधार पर 5.5 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई थी। यानी सिर्फ एक महीने में क्रेडिट कार्ड खर्च की सालाना वृद्धि दर सकारात्मक से नकारात्मक हो गई।हालांकि, मासिक आधार पर स्थिति कुछ अलग रही। अगस्त की तुलना में सितंबर में कुल खर्च लगभग 0.7 प्रतिशत बढ़ा है।इसका मतलब है कि सितंबर में पिछले महीने की तुलना में खर्च थोड़ा अधिक हुआ, लेकिन सितंबर 2025 के मुकाबले खर्च कम रहा।रिपोर्ट में इस गिरावट का प्रमुख कारण पिछले वर्ष के ऊंचे तुलनात्मक आधार और त्योहारी खरीदारी के समय में बदलाव को बताया गया है।
क्रेडिट कार्ड की संख्या में 9.5 प्रतिशत की वृद्धि
क्रेडिट कार्ड खर्च में गिरावट के बावजूद देश में कार्ड धारकों का आधार लगातार बढ़ रहा है।जेफरीज के अनुसार, सितंबर 2026 में सक्रिय कार्डों की संख्या सालाना आधार पर 9.5 प्रतिशत बढ़कर लगभग 12.38 करोड़ पहुंच गई।अगस्त में यह वृद्धि दर लगभग 9 प्रतिशत थी।यानी बैंकों और वित्तीय संस्थानों की ओर से जारी किए गए कार्डों की संख्या में विस्तार जारी है।हालांकि, कार्डों की संख्या बढ़ने के बावजूद कुल खर्च में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं हुई।यह आंकड़ा संकेत देता है कि कार्डों की संख्या में वृद्धि और खर्च में बढ़ोतरी हमेशा एक जैसी नहीं होती। एक ग्राहक के पास एक से अधिक क्रेडिट कार्ड भी हो सकते हैं।
पिछले साल की त्योहारी खरीदारी का असर
सितंबर में खर्च घटने का एक बड़ा कारण पिछले वर्ष का ऊंचा आधार माना जा रहा है।जेफरीज की रिपोर्ट में बताया गया है कि सितंबर 2025 में जीएसटी से जुड़े बदलावों के बाद खरीदारी और त्योहारों के जल्दी शुरू होने से क्रेडिट कार्ड खर्च को समर्थन मिला था।पिछले वर्ष के इसी महीने में बड़ी संख्या में ग्राहकों ने ऑनलाइन शॉपिंग और त्योहारों से संबंधित खरीदारी की थी।इसके मुकाबले वर्ष 2026 में कई प्रमुख त्योहारी बिक्री अक्टूबर में केंद्रित रही।इसी वजह से सितंबर के आंकड़ों में सालाना आधार पर गिरावट देखने को मिली।इससे यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि भारतीय ग्राहक स्थायी रूप से क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कम कर रहे हैं।
ऑनलाइन खरीदारी में सबसे ज्यादा कमजोरी
सितंबर के क्रेडिट कार्ड आंकड़ों में ऑनलाइन खरीदारी का प्रदर्शन कमजोर रहा।केयरएज रेटिंग्स के विश्लेषण के अनुसार, ऑनलाइन क्रेडिट कार्ड खर्च सालाना आधार पर करीब 12.5 प्रतिशत घटा।वहीं, दुकानों पर पॉइंट ऑफ सेल यानी POS मशीनों के माध्यम से होने वाला खर्च लगभग 7.2 प्रतिशत बढ़ा।ऑनलाइन भुगतान का हिस्सा कुल क्रेडिट कार्ड खर्च में लगभग 61.7 प्रतिशत रहा।इससे स्पष्ट होता है कि ऑनलाइन खरीदारी में कमजोरी का कुल क्रेडिट कार्ड खर्च पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा।हालांकि, ऑनलाइन खर्च घटने के बावजूद दुकानों पर कार्ड भुगतान में वृद्धि दर्ज हुई है।
HDFC बैंक की बाजार हिस्सेदारी बढ़ी
क्रेडिट कार्ड कारोबार में देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल HDFC बैंक ने सितंबर में अपनी स्थिति मजबूत की।जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार, क्रेडिट कार्ड खर्च में HDFC बैंक की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 32 प्रतिशत हो गई।केयरएज के विश्लेषण में भी HDFC बैंक की हिस्सेदारी 31.94 प्रतिशत बताई गई है।इस दौरान बैंक के क्रेडिट कार्ड खर्च में सालाना आधार पर लगभग 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।इसके विपरीत कुछ अन्य प्रमुख बैंकों और कार्ड जारी करने वाली कंपनियों के खर्च में गिरावट देखने को मिली।ICICI बैंक के क्रेडिट कार्ड खर्च में लगभग 26 प्रतिशत और SBI कार्ड्स के खर्च में करीब 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।डिजिटल पेमेंट तेजी से बढ़ा, लेकिन क्रेडिट कार्ड की हिस्सेदारी घटी
भारत में डिजिटल भुगतान का विस्तार लगातार जारी है।
जेफरीज की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 में एनईएफटी को छोड़कर खुदरा डिजिटल भुगतान का मूल्य सालाना आधार पर 16.4 प्रतिशत बढ़कर लगभग 44 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।इसके बावजूद डिजिटल भुगतान में क्रेडिट कार्ड की हिस्सेदारी घटकर करीब 4.64 प्रतिशत रह गई।पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में यह हिस्सेदारी लगभग 110 बेसिस पॉइंट कम रही।इन आंकड़ों से पता चलता है कि डिजिटल भुगतान का कुल बाजार बढ़ने के बावजूद क्रेडिट कार्ड से किए जाने वाले भुगतान की हिस्सेदारी में गिरावट आई है।हालांकि, इस बदलाव के पीछे ग्राहकों की पसंद, भुगतान के अलग-अलग माध्यमों और मौसमी परिस्थितियों की भूमिका का विस्तृत अध्ययन आवश्यक है।
छोटे भुगतान की ओर बढ़ रहा रुझान
भारतीय डिजिटल भुगतान बाजार में छोटे मूल्य के लेनदेन का महत्व लगातार बढ़ रहा है।सितंबर के आंकड़ों के अनुसार, क्रेडिट कार्ड से होने वाले लेनदेन की संख्या बढ़ी, लेकिन प्रति लेनदेन औसत खर्च में कमी आई।केयरएज के मुताबिक, क्रेडिट कार्ड लेनदेन की संख्या सालाना आधार पर 23.2 प्रतिशत बढ़ी, जबकि औसत लेनदेन मूल्य लगभग 23.6 प्रतिशत घटकर 3,343 रुपये रह गया।इसी तरह प्रति कार्ड औसत मासिक खर्च भी सालाना आधार पर 14.8 प्रतिशत घटकर लगभग 16,305 रुपये रहा।इससे संकेत मिलता है कि कार्ड का इस्तेमाल जारी है, लेकिन औसतन कम मूल्य की खरीदारी की जा रही है।
अक्टूबर और नवंबर में खर्च बढ़ने की उम्मीद
सितंबर में गिरावट के बावजूद वित्तीय विश्लेषकों को अगले दो महीनों में क्रेडिट कार्ड खर्च बढ़ने की उम्मीद है।इसका प्रमुख कारण त्योहारी सीजन में खरीदारी बढ़ने की संभावना है।अक्टूबर में ऑनलाइन सेल और नवंबर में दिवाली जैसे बड़े त्योहारों के कारण इलेक्ट्रॉनिक सामान, कपड़े, आभूषण और घरेलू उत्पादों की मांग बढ़ सकती है।केयरएज रेटिंग्स के अनुसार, अक्टूबर में कुल क्रेडिट कार्ड खर्च लगभग 2.28 लाख करोड़ से 2.38 लाख करोड़ रुपये के बीच पहुंच सकता है।हालांकि, यह अनुमान है और वास्तविक आंकड़े सामने आने के बाद ही त्योहारी खरीदारी की स्थिति स्पष्ट होगी।
क्रेडिट कार्ड ग्राहकों के लिए क्या मायने हैं?
क्रेडिट कार्ड खर्च में आई गिरावट का सीधा अर्थ यह नहीं है कि बैंकों ने कार्ड से भुगतान की सुविधा कम कर दी है या ग्राहकों की क्रेडिट लिमिट में व्यापक कटौती की गई है।यह आंकड़ा मुख्य रूप से भुगतान के कुल मूल्य में बदलाव को दर्शाता है।क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को अपने भुगतान की समयसीमा, बकाया राशि और ब्याज दरों पर ध्यान देना चाहिए।समय पर पूरा बिल नहीं चुकाने पर बकाया राशि पर ब्याज और अन्य शुल्क लग सकते हैं।वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, क्रेडिट कार्ड का उपयोग अपनी भुगतान क्षमता के अनुसार करना चाहिए, ताकि अनावश्यक कर्ज से बचा जा सके।
क्या भारतीयों की खरीदारी करने की क्षमता घट रही है?
सितंबर के आंकड़े उपभोक्ताओं के खर्च में नरमी का संकेत जरूर देते हैं, लेकिन केवल एक महीने के क्रेडिट कार्ड आंकड़ों के आधार पर देश की पूरी उपभोक्ता मांग का आकलन नहीं किया जा सकता।त्योहारी सीजन का समय, ऑनलाइन बिक्री, भुगतान के वैकल्पिक तरीके और पिछले वर्ष का ऊंचा आधार भी इस गिरावट के प्रमुख कारण हो सकते हैं।इसके अलावा यूपीआई और अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों का बढ़ता इस्तेमाल भी भुगतान के स्वरूप को प्रभावित कर रहा है।
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