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रेलवे का बड़ा फैसला, 18 ट्रेनों से हटेगा सुपरफास्ट का टैग
Rajeshwari Nishad
3 Nov 2026 4:50 PM IST

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बिज़नेस : भारतीय रेलवे ने यात्रियों को बड़ी राहत देने वाला फैसला लिया है। रेलवे ने 18 ट्रेनों का सुपरफास्ट दर्जा समाप्त करने का निर्णय लिया है। इसके बाद ये ट्रेनें सामान्य एक्सप्रेस श्रेणी में संचालित होंगी। इस बदलाव से यात्रियों को टिकट के साथ लगने वाला अतिरिक्त सुपरफास्ट शुल्क नहीं देना पड़ेगा। नई व्यवस्था 1 जनवरी 2027 से लागू होने की जानकारी सामने आई है। प्रभावित ट्रेनों के नंबर भी बदले जाएंगे, इसलिए यात्रियों को नए साल में टिकट बुक करते समय विशेष सावधानी बरतनी होगी।
इस बदलाव के तहत पूर्णागिरि जनशताब्दी, सप्तक्रांति एक्सप्रेस और श्रमजीवी एक्सप्रेस जैसी प्रमुख सेवाओं का उल्लेख किया जा रहा है। हालांकि, रेलवे के अलग-अलग जोन में ट्रेनों के पुनर्वर्गीकरण की सूचियां अलग हैं। इसलिए यात्रियों को अपनी ट्रेन का नया नंबर और लागू होने की तारीख संबंधित रेलवे जोन की अधिसूचना से जांचनी चाहिए।
क्यों हटाया जा रहा सुपरफास्ट का दर्जा?
भारतीय रेलवे के नियमों के अनुसार, किसी ट्रेन को सुपरफास्ट श्रेणी में रखने के लिए उसकी औसत गति कम से कम 55 किलोमीटर प्रति घंटा होना जरूरी है।यह औसत गति ट्रेन द्वारा तय की गई कुल दूरी और यात्रा में लगने वाले निर्धारित समय के आधार पर निकाली जाती है। इसमें रास्ते में पड़ने वाले स्टेशनों पर ठहराव का समय भी शामिल होता है।रेलवे समय-समय पर ट्रेनों की औसत गति और परिचालन की समीक्षा करता है। जिन ट्रेनों की औसत गति निर्धारित मानक से कम पाई जाती है, उन्हें सामान्य एक्सप्रेस श्रेणी में रखा जा सकता है।रिपोर्ट्स के अनुसार, संबंधित ट्रेनों की औसत गति सुपरफास्ट के निर्धारित मानक से कम होने के कारण उनका दर्जा बदला जा रहा है।
यात्रियों को कितना सस्ता मिलेगा टिकट?
सुपरफास्ट ट्रेनों में यात्रा करने वाले यात्रियों से सामान्य किराए के अतिरिक्त सुपरफास्ट सरचार्ज वसूला जाता है।
यह शुल्क यात्रा की श्रेणी के अनुसार अलग-अलग होता है। सुपरफास्ट दर्जा समाप्त होने पर संबंधित ट्रेनों में यह अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, किराए में संभावित राहत इस प्रकार होगी:
- स्लीपर क्लास: 30 रुपये
- थर्ड एसी और थर्ड एसी इकोनॉमी: 45 रुपये
- सेकंड एसी: 45 रुपये
- एसी चेयरकार: 45 रुपये
- फर्स्ट एसी: 75 रुपये
- एग्जीक्यूटिव क्लास: 75 रुपये
इस तरह फर्स्ट एसी और एग्जीक्यूटिव क्लास के यात्रियों को अधिकतम 75 रुपये तक की राहत मिल सकती है। हालांकि, अंतिम टिकट किराया यात्रा की दूरी, श्रेणी और लागू शुल्कों पर निर्भर करेगा।
इन 18 ट्रेन सेवाओं के नंबर बदलने की जानकारी
सामने आई एक पुनर्वर्गीकरण सूची के अनुसार, दिल्ली, उत्तराखंड, बिहार और पंजाब से जुड़ी निम्नलिखित ट्रेनों के नंबर बदले जाने हैं।
ट्रेन का रूट पुराना नंबर नया नंबर
टनकपुर–दिल्ली जंक्शन 12035 15317
दिल्ली जंक्शन–टनकपुर 12036 15318
देहरादून–काठगोदाम 12091 15315
काठगोदाम–देहरादून 12092 15316
मुरादाबाद–रामनगर 25013 15313
रामनगर–मुरादाबाद 25014 15314
मुरादाबाद–रामनगर 25035 15335
रामनगर–मुरादाबाद 25036 15336
इस्लामपुर–नई दिल्ली 20801 18633
नई दिल्ली–इस्लामपुर 20802 18634
दरभंगा–जालंधर सिटी 22551 15541
जालंधर सिटी–दरभंगा 22552 15542
पाटलिपुत्र–चंडीगढ़ 22355 13255
चंडीगढ़–पाटलिपुत्र 22356 13256
मुजफ्फरपुर–आनंद विहार 12557 15577
आनंद विहार–मुजफ्फरपुर 12558 15578
राजगीर–नई दिल्ली 12391 13291
नई दिल्ली–राजगीर 12392 13292
इन नंबरों के लागू होने की तारीख संबंधित ट्रेन की अधिसूचना के अनुसार अलग हो सकती है।
सप्तक्रांति एक्सप्रेस के यात्रियों पर पड़ेगा असर
मुजफ्फरपुर से आनंद विहार टर्मिनल के बीच चलने वाली सप्तक्रांति एक्सप्रेस बिहार और दिल्ली के यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण ट्रेन है।वर्तमान में यह ट्रेन 12557 और 12558 नंबर से संचालित होती है। नई व्यवस्था के तहत इसके नंबर क्रमशः 15577 और 15578 होने की जानकारी दी गई है।इसके सुपरफास्ट श्रेणी से बाहर होने पर संबंधित यात्रियों को अतिरिक्त शुल्क से राहत मिलने की उम्मीद है।हालांकि, ट्रेन का नंबर बदलने का अर्थ यह नहीं है कि उसकी सभी सुविधाएं, समय या ठहराव तुरंत बदल जाएंगे। इनसे संबंधित किसी भी परिवर्तन की पुष्टि रेलवे की आधिकारिक समय-सारिणी से करनी होगी।
अन्य रेलवे जोन में भी हो रहे बदलाव
मध्य रेलवे ने भी अपनी नौ जोड़ी यानी 18 ट्रेन सेवाओं को सुपरफास्ट श्रेणी से सामान्य एक्सप्रेस में बदलने का निर्णय लिया है।इस अलग सूची में मुंबई–हिंगोली जनशताब्दी, मुंबई–पुणे प्रगति एक्सप्रेस, महानगरी एक्सप्रेस और तुलसी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें शामिल हैं।मध्य रेलवे के अनुसार, इन सेवाओं के नंबरों में भी 1 जनवरी 2027 से बदलाव प्रस्तावित है। इस कारण यात्रियों के लिए यह समझना जरूरी है कि अलग-अलग रेलवे जोन की 18 ट्रेनों वाली सूचियों को एक ही सूची नहीं माना जाए।
क्या ट्रेनों की रफ्तार भी कम हो जाएगी?
सुपरफास्ट दर्जा हटने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ये ट्रेनें पहले से धीमी चलेंगी।दरअसल, सुपरफास्ट से सामान्य एक्सप्रेस में बदलाव मुख्य रूप से ट्रेन की श्रेणी और उससे जुड़े किराए का पुनर्निर्धारण है।इसका मतलब यह नहीं है कि रेलवे अनिवार्य रूप से ट्रेन की अधिकतम गति घटा देगा। किसी ट्रेन के वास्तविक यात्रा समय में बदलाव तभी होगा, जब रेलवे उसकी समय-सारिणी, ठहराव या परिचालन व्यवस्था में संशोधन करेगा।इसलिए यात्रियों को केवल श्रेणी बदलने के आधार पर यात्रा अवधि बढ़ने का अनुमान नहीं लगाना चाहिए।
टिकट बुकिंग से पहले इन बातों का रखें ध्यान
रेलवे के इस फैसले से हजारों यात्रियों को आर्थिक राहत मिलने की संभावना है। विशेषकर लंबी दूरी की नियमित यात्राएं करने वाले लोगों के लिए सुपरफास्ट शुल्क समाप्त होना उपयोगी साबित हो सकता है।हालांकि, नए नंबर लागू होने के बाद टिकट बुकिंग में सावधानी जरूरी होगी।यात्रियों को सलाह है कि वे 1 जनवरी 2027 या उसके बाद की यात्रा के लिए IRCTC की वेबसाइट, मोबाइल ऐप अथवा रेलवे के आधिकारिक पूछताछ माध्यम पर ट्रेन का नंबर और समय अवश्य जांच लें।
यदि किसी यात्री ने पहले से टिकट बुक कराया है, तो उसे अपनी यात्रा की तारीख के अनुसार लागू ट्रेन नंबर और परिचालन स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए।कुल मिलाकर रेलवे का यह निर्णय यात्रियों के लिए किराए में राहत लेकर आएगा। अब सुपरफास्ट के नाम पर अतिरिक्त शुल्क देने वाले यात्रियों को सामान्य एक्सप्रेस श्रेणी का किराया देना होगा। साथ ही रेलवे की इस पहल से ट्रेनों की वास्तविक औसत गति के आधार पर उनका वर्गीकरण सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।
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