व्यापार
कम वजन वाले चिप्स पर बड़ा फैसला, PepsiCo को हर्जाने का आदेश
Rajeshwari Nishad
30 Oct 2026 2:10 PM IST

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बिज़नेस। ग्राहक अगर अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो, तो बड़ी से बड़ी कंपनी को भी जवाबदेह बनाया जा सकता है। राजस्थान की राजधानी जयपुर से ऐसा ही एक दिलचस्प मामला सामने आया है, जहां महज पांच रुपये के चिप्स के पैकेट को लेकर एक ग्राहक ने अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी पेप्सिको के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी और उपभोक्ता आयोग से अपने पक्ष में फैसला हासिल किया। मामला Lay's के चिप्स के पैकेट में निर्धारित मात्रा से कम चिप्स मिलने का है। पैकेट पर 15 ग्राम वजन लिखा था, लेकिन ग्राहक के अनुसार, उसमें केवल चार ग्राम चिप्स निकले। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जयपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-द्वितीय ने पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदार ठहराया है। आयोग ने कंपनी को पांच रुपये की कीमत ब्याज सहित लौटाने के साथ ही मानसिक परेशानी और मुकदमे के खर्च के रूप में कुल आठ हजार रुपये देने का आदेश दिया है।
मेहमानों के लिए खरीदा था चिप्स का पैकेट
जानकारी के अनुसार, जयपुर के कारोबारी चंद्रमण जालान ने 10 नवंबर 2020 को मेट्रो कैश एंड कैरी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से घर आए मेहमानों के लिए खाने-पीने का सामान खरीदा था। इस सामान में पेप्सिको कंपनी के Lay's चिप्स का पांच रुपये वाला पैकेट भी शामिल था।चंद्रमण जालान जालान बिल्डिंग एंड हार्डवेयर स्टोर के संचालक हैं। उन्होंने अन्य सामान के साथ चिप्स खरीदे थे और दुकान से उन्हें खरीदारी का बिल भी दिया गया था।शिकायतकर्ता के अनुसार, जब उन्होंने मेहमानों को चिप्स परोसने के लिए पैकेट खोला, तो उसमें चिप्स की मात्रा बेहद कम दिखाई दी। उन्हें पैकेट असामान्य रूप से हल्का लगा।इसके बाद उन्होंने चिप्स का वजन किया। उनका दावा था कि पैकेट में केवल चार ग्राम चिप्स मौजूद थे, जबकि उस पर 15 ग्राम वजन दर्ज था।इस तरह घोषित मात्रा के मुकाबले 11 ग्राम चिप्स कम थे। ग्राहक ने इसे गंभीर मामला मानते हुए कंपनी के खिलाफ शिकायत करने का फैसला किया।
शिकायत का समाधान नहीं हुआ तो पहुंचे उपभोक्ता आयोग
चंद्रमण जालान ने पहले इस मामले में विक्रेता के समक्ष शिकायत रखी। हालांकि, उनके अनुसार, शिकायत का संतोषजनक समाधान नहीं हुआ।इसके बाद उन्होंने अपने उपभोक्ता अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कानूनी रास्ता अपनाया।6 अप्रैल 2022 को चंद्रमण जालान ने जयपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-द्वितीय के समक्ष शिकायत दर्ज कराई।उन्होंने आरोप लगाया कि पैकेट पर घोषित मात्रा से कम चिप्स उपलब्ध कराना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का मामला है।शिकायत में मेट्रो कैश एंड कैरी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड को पक्षकार बनाया गया था।ग्राहक ने खरीदारी का बिल और अन्य संबंधित साक्ष्य आयोग के समक्ष प्रस्तुत किए।
कोर्ट में पेश नहीं हुई पेप्सिको कंपनी
इस मामले की सुनवाई के दौरान मेट्रो कैश एंड कैरी की ओर से अपना पक्ष रखा गया।विक्रेता ने दलील दी कि यदि पैकेट में चिप्स की मात्रा कम थी, तो इसकी वजह निर्माण प्रक्रिया के दौरान हुई कोई गड़बड़ी हो सकती है।कंपनी का कहना था कि उसने ग्राहक को निर्धारित पैकेट बेचा था और खरीदारी का बिल भी जारी किया था। ऐसे में उत्पाद की मात्रा में कमी के लिए निर्माता की जिम्मेदारी बनती है।दूसरी ओर, पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड नोटिस मिलने के बावजूद आयोग के सामने उपस्थित नहीं हुई।इसके बाद आयोग ने पेप्सिको के खिलाफ एकपक्षीय कार्यवाही जारी रखी।आयोग ने शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों, खरीदारी के बिल और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार किया।
आयोग ने पेप्सिको को ठहराया जिम्मेदार
जयपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-द्वितीय के अध्यक्ष अशोक शर्मा और सदस्य अजय कुमार एवं सुप्रिया अग्रवाल की पीठ ने इस मामले में 17 सितंबर 2026 को आदेश पारित किया।आयोग ने मामले की सुनवाई के बाद पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदार माना।वहीं, मेट्रो कैश एंड कैरी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ दर्ज शिकायत को खारिज कर दिया गया।आयोग के अनुसार, विक्रेता ने उत्पाद को बिल के साथ बेचा था, जबकि पैकेट में निर्धारित मात्रा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निर्माता से संबंधित थी।इस फैसले में आयोग ने ग्राहक के पक्ष में आदेश देते हुए पेप्सिको को आर्थिक क्षतिपूर्ति करने का निर्देश दिया।
पांच रुपये के बदले आठ हजार रुपये का मुआवजा
आयोग ने पेप्सिको को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ता को चिप्स के पैकेट की पांच रुपये की कीमत वापस लौटाए।इस राशि पर 6 अप्रैल 2022 से वास्तविक भुगतान की तारीख तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।इसके अलावा आयोग ने मानसिक परेशानी के लिए पांच हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।मुकदमे के दौरान हुए खर्च के रूप में तीन हजार रुपये अतिरिक्त देने के निर्देश दिए गए।इस तरह कंपनी को कुल आठ हजार रुपये का मुआवजा और मुकदमे का खर्च देना होगा। इसके अलावा पांच रुपये की खरीद कीमत ब्याज सहित लौटानी होगी।आयोग ने भुगतान के लिए आदेश की तारीख से एक महीने का समय निर्धारित किया था।निर्धारित अवधि में आठ हजार रुपये का भुगतान नहीं होने पर इस राशि पर भी आदेश की तारीख से भुगतान तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
ग्राहक जागरूकता के लिए अहम मामला
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि विवाद महज पांच रुपये के उत्पाद से शुरू हुआ था।आमतौर पर छोटी रकम के सामान में कमी मिलने पर कई ग्राहक शिकायत करने से बचते हैं। लेकिन चंद्रमण जालान ने अपने अधिकारों के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाई।उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत ग्राहकों को सामान की गुणवत्ता, मात्रा, कीमत और अन्य आवश्यक जानकारियां प्राप्त करने का अधिकार है।यदि किसी उत्पाद में निर्धारित मात्रा से कमी मिलती है या कंपनी की ओर से भ्रामक जानकारी दी जाती है, तो ग्राहक संबंधित मंच पर शिकायत दर्ज करा सकता है।इसके लिए खरीदारी का बिल, उत्पाद की पैकेजिंग और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखना उपयोगी होता है।
सामान खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
उपभोक्ताओं को पैकेटबंद सामान खरीदते समय उसकी अधिकतम खुदरा कीमत, वजन, निर्माण तिथि, एक्सपायरी डेट और निर्माता की जानकारी जरूर देखनी चाहिए।यदि पैकेट में किसी तरह की गड़बड़ी दिखाई देती है, तो उसका फोटो या वीडियो सुरक्षित रखने के साथ खरीदारी का बिल भी संभालकर रखना चाहिए।ग्राहक पहले विक्रेता या निर्माता से शिकायत कर सकते हैं। समाधान नहीं मिलने पर राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन या संबंधित उपभोक्ता आयोग का सहारा लिया जा सकता है।जयपुर का यह मामला दर्शाता है कि उत्पाद की कीमत कम होने के बावजूद उपभोक्ता अधिकारों का महत्व कम नहीं होता।हालांकि, यह आदेश एक विशेष शिकायत से संबंधित है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि कंपनी के सभी उत्पादों में वजन की कमी है।
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