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पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत देशभर में डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट अभियान शुरू

Ratna Netam
3 Nov 2026 7:14 PM IST
पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत देशभर में डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट अभियान शुरू
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देशभर के पेंशनभोगियों को बड़ी राहत देने के उद्देश्य से पांचवां राष्ट्रव्यापी डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत सरकार का लक्ष्य सभी पात्र पेंशनभोगियों तक डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र की सुविधा पहुंचाना है, ताकि बुजुर्गों को अपनी पेंशन जारी रखने के लिए बार-बार बैंक या सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। विशेष रूप से अधिक उम्र के नागरिकों, दिव्यांग व्यक्तियों और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले पेंशनभोगियों को इस अभियान से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के अंतर्गत पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) ने 1 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक यह अभियान आयोजित करने का निर्णय लिया है। इसे अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट अभियान बताया गया है। सरकार ने देश के करीब 2,000 शहरों और जिलों में विशेष शिविर आयोजित करने की योजना बनाई है।मंगलवार, 3 नवंबर को विभाग ने पंजाब नेशनल बैंक के सहयोग से नई दिल्ली की संसद मार्ग शाखा में एक मेगा कैंप आयोजित किया। इस शिविर में पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशन प्राप्त करने वालों को डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र बनवाने में सहायता दी गई। कार्यक्रम में फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक के इस्तेमाल और डिजिटल सेवाओं की जानकारी भी दी गई।
इस दौरान पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रत्येक पेंशनभोगी तक सुविधाएं पहुंचाना है। उन्होंने अभियान में शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उनके अनुसार, इस पहल की सफलता तभी मानी जाएगी, जब दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्गों को भी इसका लाभ मिल सके।डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट को हिंदी में डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र कहा जाता है। पेंशन प्राप्त करने वाले लोगों को निर्धारित नियमों के अनुसार समय-समय पर यह प्रमाणित करना होता है कि वे जीवित हैं। इसी उद्देश्य से जीवन प्रमाणपत्र जमा करने की व्यवस्था लागू है।पहले अधिकतर पेंशनभोगियों को बैंक, डाकघर या संबंधित कार्यालय पहुंचकर प्रमाणपत्र जमा करना पड़ता था। उम्र अधिक होने, बीमारी या चलने-फिरने में परेशानी के कारण कई लोगों के लिए यह प्रक्रिया कठिन हो जाती थी।सरकार की डिजिटल जीवन प्रमाण योजना ने इस प्रक्रिया को आसान बनाने का प्रयास किया है। अब पात्र पेंशनभोगी आधार आधारित पहचान सत्यापन और डिजिटल तकनीक की सहायता से प्रमाणपत्र तैयार कर सकते हैं। फेस ऑथेंटिकेशन सुविधा के जरिए स्मार्टफोन से चेहरे का सत्यापन कर प्रमाणपत्र बनवाना संभव है।
सरकारी जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2014 में डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट व्यवस्था की शुरुआत हुई थी। इसके बाद वर्ष 2021 में फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक को शामिल किए जाने से प्रक्रिया और सुविधाजनक हुई। इस तकनीक का बड़ा लाभ यह है कि कई मामलों में अलग बायोमेट्रिक उपकरण की आवश्यकता नहीं पड़ती और उपयुक्त स्मार्टफोन की सहायता से सत्यापन किया जा सकता है।इस वर्ष के अभियान के लिए सरकार ने 2.30 करोड़ डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र तैयार करने का लक्ष्य रखा है। इनमें लगभग 1.50 करोड़ प्रमाणपत्र फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक के माध्यम से तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस कार्य में 19 बैंक, 785 जिला डाकघर, 56 पेंशनभोगी कल्याण संगठन और विभिन्न सरकारी विभाग सहयोग कर रहे हैं।रेलवे, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), रक्षा लेखा विभाग, दूरसंचार विभाग, राज्य सरकारें और अन्य संबंधित संस्थाएं भी अभियान से जुड़ी हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानी UIDAI तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
सरकार का उद्देश्य केवल बड़े शहरों में शिविर लगाना नहीं है, बल्कि ऐसे पेंशनभोगियों तक भी पहुंचना है जिन्हें डिजिटल सेवाओं की जानकारी कम है या जिनके पास आवश्यक तकनीकी संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।अभियान में बुजुर्गों को तकनीक के इस्तेमाल का प्रशिक्षण और सहायता देने की व्यवस्था भी की जा रही है। विभाग ने पेंशनभोगियों से अपील की है कि वे डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र बनवाने के बाद अन्यपेंशनधारकों को भी इसके फायदे बताएं।सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा ने पिछले अभियान की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि 80 वर्ष और उससे अधिक उम्र के 14 लाख से ज्यादा पेंशनभोगियों ने डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र जमा किए थे। इसे बुजुर्ग नागरिकों के बीच डिजिटल सेवाओं की बढ़ती स्वीकार्यता का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।विभाग के संयुक्त सचिव ध्रुबज्योति सेनगुप्ता ने बताया कि पिछले अभियान में फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से तैयार होने वाले प्रमाणपत्रों की संख्या लगभग 50 लाख से बढ़कर करीब 1.25 करोड़ तक पहुंची थी। इससे स्पष्ट होता है कि डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
इस अभियान की एक प्रमुख विशेषता घर तक सेवा पहुंचाने की व्यवस्था है। जिन पेंशनभोगियों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है या जो शिविर तक नहीं पहुंच सकते, उनके लिए बैंकों और डाकघरों के माध्यम से डोरस्टेप सेवा उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। सेवा की उपलब्धता और लागू शुल्क संबंधित संस्था की व्यवस्था पर निर्भर कर सकते हैं।नई दिल्ली में 2 नवंबर को भारतीय स्टेट बैंक के सहयोग से भी एक विशेष शिविर आयोजित किया गया था। विभाग के अनुसार, एसबीआई मौजूदा अभियान के दौरान 115 शहरों में विशेष शिविर लगा रहा है। बैंक ने पिछले वर्ष के अभियान में लगभग 25 लाख डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र तैयार कराने में सहयोग किया था।डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट बनवाने के लिए पेंशनभोगियों को अपनी सही पहचान और पेंशन संबंधी जानकारी उपलब्ध करानी होती है। इनमें आधार संख्या, मोबाइल नंबर, पेंशन भुगतान आदेश यानी PPO नंबर और संबंधित पेंशन वितरण संस्था का विवरण शामिल हो सकता है।पेंशनभोगी आधिकारिक जीवन प्रमाण पोर्टल और संबंधित ऐप की सहायता से प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। प्रमाणपत्र तैयार होने के बाद उसकी जानकारी संबंधित पेंशन वितरण एजेंसी को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध हो जाती है। हालांकि, प्रमाणपत्र स्वीकार हुआ है या नहीं, इसकी स्थिति जांचना भी जरूरी है।
आधिकारिक जीवन प्रमाण पोर्टल के अनुसार, गलत पेंशन विवरण या पहचान संबंधी जानकारी दर्ज होने पर प्रमाणपत्र अस्वीकृत हो सकता है। ऐसी स्थिति में पेंशनभोगी को संबंधित बैंक या पेंशन वितरण एजेंसी से संपर्क करके जानकारी सुधारनी चाहिए।सरकार ने अभियान के दौरान आधार संबंधी सहायता, स्वास्थ्य जांच और शिकायत निवारण जैसी सेवाएं भी उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। शिविरों में आने वाले बुजुर्गों को डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र के साथ अन्य उपयोगी सेवाओं की जानकारी दी जाएगी।अभियान की निगरानी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जाएगी। विभिन्न राज्यों में विशेष समीक्षा और बड़े शिविरों के माध्यम से यह सुनिश्चित करने की कोशिश होगी कि अधिक से अधिक पात्र पेंशनभोगी इस सुविधा का लाभ उठा सकें।सरकार का मानना है कि डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र व्यवस्था से पेंशनभोगियों का समय और यात्रा का खर्च कम हो सकता है। इसके साथ ही बुजुर्गों को अपनी पेंशन संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।हालांकि, डिजिटल प्रमाणपत्र की सुविधा मौजूदा पारंपरिक प्रक्रियाओं का अतिरिक्त विकल्प है। जिन पेंशनभोगियों को ऑनलाइन प्रक्रिया इस्तेमाल करने में परेशानी होती है, वे संबंधित नियमों के अनुसार अन्य उपलब्ध तरीकों से भी जीवन प्रमाणपत्र जमा कर सकते हैं।फिलहाल सरकार का पूरा ध्यान नवंबर महीने में चल रहे अभियान को सफल बनाने पर है। शत-प्रतिशत कवरेज अभी सरकार का लक्ष्य है, हासिल की गई उपलब्धि नहीं। अभियान समाप्त होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि कितने पेंशनभोगियों तक डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र की सुविधा पहुंचाई जा सकी।
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