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महाकाल मंदिर में खोए जूते तलाशने में ChatGPT बना मददगार

nidhi
17 Aug 2026 2:50 PM IST
महाकाल मंदिर में खोए जूते तलाशने में ChatGPT बना मददगार
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AI की मदद से मिला खोया जूता उज्जैन महाकाल मंदिर का वीडियो वायरल

उज्जैन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल अब रोजमर्रा की छोटी-बड़ी परेशानियों को हल करने में भी किया जाने लगा है। इसका एक अनोखा उदाहरण मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर के बाहर देखने को मिला, जहां एक व्यक्ति ने अपने खोए हुए क्लॉग्स (जूते) ढूंढने के लिए ChatGPT की मदद ली और कुछ ही समय में जूतों के बड़े ढेर के बीच अपनी जोड़ी पहचान ली। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

जानकारी के अनुसार, गोवा के रहने वाले शुभांग बोरकर महाकाल मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे। दर्शन के बाद जब वह बाहर आए तो उन्हें अपने क्लॉग्स नहीं मिले। मंदिर के बाहर हजारों जूते-चप्पलों का ढेर लगा हुआ था, जिससे अपनी जोड़ी ढूंढना काफी मुश्किल हो गया।
AI से मांगी जूते ढूंढने में मदद
शुभांग ने अपने खोए हुए क्लॉग्स की तस्वीर और मंदिर के बाहर रखे जूतों के ढेर की फोटो ChatGPT को भेजी। इसके बाद AI ने तस्वीरों का विश्लेषण कर उन्हें उनके जूतों की पहचान करने में मदद की। वीडियो में दावा किया गया कि ChatGPT की मदद से उन्होंने कुछ ही सेकंड में अपनी चप्पल ढूंढ ली।
उन्होंने इस पूरे अनुभव को वीडियो के जरिए सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया। लोग AI के इस अनोखे इस्तेमाल को देखकर हैरान रह गए।
सोशल मीडिया पर लोगों ने की तारीफ
वीडियो वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने कहा कि AI का इस्तेमाल अब सिर्फ पढ़ाई, ऑफिस और तकनीकी कामों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजमर्रा की समस्याओं में भी मददगार साबित हो सकता है।
कई लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि ChatGPT अब "जूता डिटेक्टिव" भी बन गया है। वहीं कुछ यूजर्स ने इसे AI की बढ़ती उपयोगिता का शानदार उदाहरण बताया।
मंदिरों में बढ़ जाती है ऐसी परेशानी
बड़े धार्मिक स्थलों पर दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं को अक्सर अपने जूते-चप्पल पहचानने में परेशानी होती है। खासकर भीड़ वाले दिनों में एक जैसे दिखने वाले जूतों के बीच अपनी जोड़ी ढूंढना मुश्किल हो जाता है।
ऐसे में AI आधारित तकनीक का यह प्रयोग लोगों के लिए एक नया तरीका दिखाता है। हालांकि तस्वीरों से पहचान करने की क्षमता कई चीजों पर निर्भर करती है और हर स्थिति में यह सटीक हो, यह जरूरी नहीं है।
AI के नए इस्तेमाल की मिसाल
महाकाल मंदिर की यह घटना दिखाती है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता धीरे-धीरे आम लोगों के जीवन का हिस्सा बन रही है। जहां पहले AI को बड़े तकनीकी कामों के लिए इस्तेमाल किया जाता था, वहीं अब लोग इसका उपयोग छोटी समस्याओं के समाधान के लिए भी करने लगे हैं।
शुभांग बोरकर का यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग AI के इस नए रूप को देखकर काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं।
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