
Business:उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक सिगरेट पैकेट को एमआरपी से अधिक कीमत पर बेचने का मामला उपभोक्ता फोरम तक पहुंच गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए दुकानदार और सिगरेट निर्माता कंपनी दोनों पर 10 लाख रुपये का संयुक्त जुर्माना लगाया है। मामला सिर्फ 20 रुपये अधिक वसूली का था, लेकिन इसे ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ मानते हुए अदालत ने सख्त रुख अपनाया।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
अलीगढ़ की प्रतिभा कॉलोनी स्थित एक दुकान पर जनवरी 2026 में वकील देवेश गौतम सिगरेट खरीदने पहुंचे थे। पैकेट पर अधिकतम खुदरा मूल्य 340 रुपये छपा था, लेकिन दुकानदार ने उनसे 360 रुपये वसूल लिए। जब ग्राहक ने विरोध किया तो बहस हुई, लेकिन उन्होंने डिजिटल भुगतान कर सबूत सुरक्षित कर लिया और बाद में उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कर दी।
डिजिटल सबूत बना अहम आधार
ग्राहक ने ऑनलाइन पेमेंट का प्रिंट आउट और अन्य दस्तावेजों के साथ फरवरी 2026 में केस दर्ज कराया। आयोग ने लगभग 5 महीने तक मामले की सुनवाई की। नोटिस के बावजूद दुकानदार अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, जबकि कंपनी ने यह तर्क दिया कि दुकानदार उनका अधिकृत विक्रेता नहीं है।
कोर्ट ने कंपनी की दलील खारिज की
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हसनैन कुरैशी और सदस्य पूर्णिमा सिंह राजपूत की पीठ ने कंपनी की दलील को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि ब्रांडेड उत्पाद बेचने वाली कंपनियां अपने वितरण तंत्र से जुड़े मामलों से जिम्मेदारी नहीं टाल सकतीं। कोर्ट ने इसे आम उपभोक्ता के साथ ‘छिपी हुई लूट’ करार दिया।
जुर्माने और मुआवजे का आदेश
अदालत ने दुकानदार और कंपनी को 45 दिनों के भीतर 10 लाख रुपये उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा करने का आदेश दिया। इसके साथ ही ग्राहक को वसूले गए 20 रुपये पर 18% वार्षिक ब्याज के साथ वापसी, मानसिक प्रताड़ना के लिए 5,000 रुपये और कानूनी खर्च के लिए 5,000 रुपये देने का निर्देश दिया गया।
उपभोक्ताओं के लिए सख्त संदेश
इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि एमआरपी से अधिक वसूली किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।





