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भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों की दूरी, वित्त मंत्री ने बताई वजह

Rajeshwari Nishad
19 Oct 2026 6:42 PM IST
भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों की दूरी, वित्त मंत्री ने बताई वजह
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नई दिल्ली : भारतीय शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली भी बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे समय में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय शेयर बाजार के कमजोर प्रदर्शन के पीछे कई अहम कारणों की ओर इशारा किया है। उनके मुताबिक, बाजार में नकदी की उपलब्धता जहां कारोबार को आसान बनाती है, वहीं निवेशकों के लिए तेजी से पैसा निकालने का रास्ता भी खोलती है। इसके अलावा, वैश्विक निवेश का अमेरिका और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े अवसरों की ओर जाना भी चिंता का विषय है।
निर्मला सीतारमण ने बाजार की कमजोरी पर क्या कहा?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक इंटरव्यू में भारतीय शेयर बाजार के प्रदर्शन पर चर्चा करते हुए नकदी की उपलब्धता और निवेशकों के व्यवहार को अहम बताया। उनका कहना है कि बाजार में जब पैसा आसानी से उपलब्ध होता है, तो निवेशक उतनी ही आसानी से अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाहर भी निकल सकते हैं। इससे बाजार में स्थिरता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब भारतीय शेयर बाजार पिछले कुछ समय से दबाव का सामना कर रहा है। निवेशकों के मन में सवाल है कि देश की अर्थव्यवस्था की संभावनाओं के बावजूद शेयर बाजार में अपेक्षित तेजी क्यों नहीं दिखाई दे रही है।
हालांकि, बाजार की गिरावट के पीछे केवल एक कारण नहीं है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, अमेरिकी बॉन्ड पर बढ़ता प्रतिफल, महंगा कच्चा तेल, डॉलर की मजबूती और कंपनियों के नतीजे जैसे कई कारक बाजार की दिशा को प्रभावित कर रहे हैं।
विदेशी निवेशक क्यों निकाल रहे हैं पैसा?
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली शामिल है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक दुनिया के अलग-अलग बाजारों में मिलने वाले संभावित रिटर्न और जोखिम की तुलना करके निवेश का फैसला लेते हैं। जब उन्हें किसी दूसरे बाजार में बेहतर अवसर दिखाई देता है, तो वे भारतीय शेयरों से पैसा निकाल सकते हैं।
हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, अक्टूबर 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से हजारों करोड़ रुपये की निकासी की है। इसकी प्रमुख वजहों में ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, मजबूत डॉलर और कच्चे तेल की महंगी कीमतें शामिल हैं। विदेशी निवेशकों की निकासी से बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ता है और प्रमुख सूचकांकों पर असर पड़ सकता है।
जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं, तो घरेलू संस्थागत निवेशकों और खुदरा निवेशकों के खरीदारी करने के बावजूद बाजार को संभालना मुश्किल हो सकता है। यही कारण है कि विदेशी पूंजी का प्रवाह भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
अमेरिका में ज्यादा रिटर्न मिलने से भारतीय बाजार पर दबाव
विदेशी निवेशकों के फैसलों में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की भी अहम भूमिका होती है। अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर अधिक प्रतिफल मिलने की स्थिति में निवेशकों को अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले विकल्प में पैसा लगाने का आकर्षण बढ़ सकता है।
इसके मुकाबले शेयर बाजार में निवेश से मिलने वाला रिटर्न निश्चित नहीं होता और इसमें नुकसान की आशंका भी रहती है। ऐसे में विदेशी निवेशक अपने जोखिम और संभावित मुनाफे का आकलन करके निवेश की रणनीति बदल सकते हैं।
डॉलर मजबूत होने और रुपये पर दबाव पड़ने से भी विदेशी निवेशकों के रिटर्न पर असर पड़ता है। अगर भारतीय शेयरों से कमाई के बावजूद मुद्रा विनिमय में नुकसान होता है, तो निवेशकों के लिए भारत में निवेश का आकर्षण घट सकता है।
AI निवेश की ओर बढ़ रहा वैश्विक पैसा
निर्मला सीतारमण ने वैश्विक पूंजी के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अमेरिकी बाजारों की ओर जाने को भी चिंता का विषय बताया है। दुनियाभर में AI से जुड़ी कंपनियों और तकनीकी क्षेत्रों में निवेश के अवसर बढ़ने के कारण निवेशकों का पैसा कुछ चुनिंदा बाजारों और क्षेत्रों की ओर जा सकता है।
इसका असर उभरते बाजारों पर पड़ सकता है, क्योंकि विदेशी निवेशकों के पास निवेश के लिए सीमित पूंजी होती है और वे अलग-अलग देशों के बीच उसका आवंटन बदलते रहते हैं। अगर उन्हें किसी दूसरे बाजार में ज्यादा संभावित रिटर्न दिखाई देता है, तो भारतीय शेयरों में निवेश घट सकता है।
इसका मतलब यह जरूरी नहीं है कि विदेशी निवेशकों का भारत की अर्थव्यवस्था पर भरोसा पूरी तरह खत्म हो गया है। कई बार निवेश का फैसला घरेलू परिस्थितियों के बजाय वैश्विक अवसरों और जोखिमों के आधार पर भी लिया जाता है।
महंगे कच्चे तेल और बैंक शेयरों ने भी बढ़ाई चिंता
भारतीय शेयर बाजार पर कच्चे तेल की कीमतों का भी असर पड़ता है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई तथा रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
इसके अलावा, 19 अक्टूबर 2026 को भी भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। बाजार रिपोर्ट के अनुसार, सेंसेक्स करीब 876 अंक गिरकर 73,780 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 करीब 257 अंक टूटकर 22,889 के आसपास आ गया। निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंक शेयरों में कमजोरी और तिमाही नतीजों को लेकर निवेशकों की प्रतिक्रिया ने भी बाजार पर दबाव बनाया।
निवेशकों को आगे क्या ध्यान रखना चाहिए?
बाजार में गिरावट के दौरान निवेशकों के लिए जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय कंपनियों की वित्तीय स्थिति, कमाई की संभावनाओं और अपने निवेश के उद्देश्य पर ध्यान देना जरूरी है। केवल सूचकांकों में गिरावट देखकर शेयर खरीदना या घबराहट में सभी निवेश बेच देना जोखिम भरा हो सकता है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली कब रुकेगी, इसकी निश्चित भविष्यवाणी करना संभव नहीं है। इसके लिए अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल, कंपनियों के नतीजों और वैश्विक बाजारों की स्थिति पर नजर रखनी होगी।
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