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सोने की कीमतों में फिर आएगी तेजी, 2027 के लिए गोल्ड का नया टारगेट जानिए

Rajeshwari Nishad
7 Nov 2026 5:41 PM IST
सोने की कीमतों में फिर आएगी तेजी, 2027 के लिए गोल्ड का नया टारगेट जानिए
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बिज़नेस : सोने की कीमतों में पिछले कुछ समय से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। कभी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने वाला सोना अक्टूबर में अचानक कमजोर पड़ गया। अक्टूबर 2026 के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में 6.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया है। हालांकि, वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की ताजा रिपोर्ट ने सोने के भविष्य को लेकर उम्मीद जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा गिरावट किसी लंबी मंदी की शुरुआत नहीं, बल्कि एक अस्थायी करेक्शन हो सकती है।
WGC का कहना है कि सोने की कीमतों में बड़ी रिकवरी से पहले ऐतिहासिक रूप से तीन महत्वपूर्ण परिस्थितियां देखने को मिली हैं। इनमें से दो शर्तें फिलहाल पूरी हो चुकी हैं, जबकि तीसरी का इंतजार है। ऐसे में सोने में निवेश करने वाले लोगों के लिए आने वाले महीने महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
अक्टूबर में सोना 6.3% टूटा, जनवरी के रिकॉर्ड से 25% नीचे
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की 5 नवंबर 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर के अंत में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 3,913 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई। यह सितंबर की तुलना में 6.3 प्रतिशत कम थी।इस साल 29 जनवरी को सोने ने लगभग 5,405 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। इसके बाद कीमतों में गिरावट का दौर शुरू हुआ और अक्टूबर के अंत तक सोना अपने रिकॉर्ड स्तर से करीब 25 प्रतिशत नीचे आ गया।भारतीय बाजार की बात करें तो WGC के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में रुपये के हिसाब से सोने की कीमत में 5.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। 30 अक्टूबर को भारत में सोने का संदर्भ भाव 1,39,830 रुपये प्रति 10 ग्राम था।
सोने की कीमतों में गिरावट की 3 बड़ी वजहें
WGC के मुताबिक, अक्टूबर में सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे तीन प्रमुख कारण रहे।
1. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बदलाव: अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदों में बदलाव आया। इससे बाजार में बॉन्ड और सोने के बीच निवेश का संतुलन प्रभावित हुआ।
2. निवेशकों की मुनाफावसूली: सोने में पहले आई बड़ी तेजी के बाद कई निवेशकों ने अपना मुनाफा सुरक्षित करने के लिए बिकवाली की। इससे कीमतों पर दबाव बढ़ा।
3. शेयर बाजार से बॉन्ड की ओर निवेश का रुख: अक्टूबर में शेयर बाजार में कमजोरी और क्रेडिट बाजार में बढ़ती चिंता के बीच कुछ निवेशकों ने सोने और शेयरों से पैसा निकालकर अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में लगाया। इससे सोने की मांग पर अस्थायी दबाव पड़ा।
रिकवरी के लिए WGC ने बताईं ये 3 ऐतिहासिक शर्तें
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने वर्ष 2005 से अक्टूबर 2026 तक के सोने के मंदी वाले दौर का अध्ययन किया। इसमें तीन ऐसे संकेतों की पहचान की गई, जो ऐतिहासिक रूप से कीमतों में वापसी से पहले देखने को मिले।
पहली शर्त: सोने का 200-दिन के औसत से नीचे जाना
जब सोने की कीमत लंबे समय तक अपने 200-दिन के औसत से काफी नीचे कारोबार करती है, तो इसे बाजार में बड़ी गिरावट का संकेत माना जाता है। WGC के अनुसार, ऐसी स्थिति में बिकवाली काफी बढ़ चुकी हो सकती है और बाजार में अस्थायी निचला स्तर बनने की संभावना रहती है।
दूसरी शर्त: अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना
सोने की कीमतों पर अमेरिकी डॉलर की चाल का सीधा असर पड़ता है। जब डॉलर तेजी से मजबूत होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले सोना महंगा पड़ सकता है। ऐतिहासिक रूप से ऐसी स्थिति में सोने की कमजोरी कई बार अस्थायी साबित हुई है।
तीसरी शर्त: वायदा बाजार में सट्टेबाजी की पोजीशन कम होना
जब सोने में तेजी की उम्मीद रखने वाले सट्टा निवेशक बड़ी संख्या में अपनी पोजीशन खत्म कर देते हैं, तो बाजार में बिकवाली का दबाव घट सकता है। इससे कीमतों में रिकवरी के लिए परिस्थितियां बन सकती हैं।इतिहास में दो शर्तें पूरी होने पर 90% बार मिला सकारात्मक रिटर्नWGC ने अपने अध्ययन में पाया कि वर्ष 2005 से अक्टूबर 2026 के बीच जब तीन में से कम से कम दो शर्तें पूरी हुईं, तो अगले तीन महीनों में सोने का प्रदर्शन सकारात्मक रहने की संभावना 90 प्रतिशत रही।ऐसे 10 ऐतिहासिक उदाहरणों में अगले तीन महीनों का औसत नहीं, बल्कि मीडियन रिटर्न 4.2 प्रतिशत रहा।वहीं, जब तीनों शर्तें एक साथ पूरी हुईं, तब अध्ययन में शामिल पांचों मामलों में अगले तीन महीनों के दौरान सोने ने सकारात्मक रिटर्न दिया। इन पांच मामलों में मीडियन रिटर्न 9.8 प्रतिशत रहा।
क्या 2011 जैसी लंबी गिरावट दोबारा आएगी?
कुछ निवेशक सोने की मौजूदा गिरावट की तुलना वर्ष 2011 के बाद आए लंबे मंदी के दौर से कर रहे हैं। हालांकि, WGC का मानना है कि दोनों परिस्थितियों में काफी अंतर है।2011 में वास्तविक ब्याज दरें काफी नीचे थीं और बाद में तेजी से बढ़ी थीं। उस समय अमेरिकी डॉलर की स्थिति भी अलग थी। इसके विपरीत मौजूदा समय में केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी, भू-राजनीतिक जोखिम और महंगाई को लेकर अनिश्चितता सोने के समर्थन में काम कर सकती है।WGC के आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय बैंकों की सालाना शुद्ध सोने की खरीदारी लगभग 800 टन के आसपास रही है। यह भी लंबी अवधि में सोने की मांग को समर्थन देने वाला कारक है।
सोने में निवेश करने वालों को क्या करना चाहिए?
WGC की रिपोर्ट के आधार पर निवेशकों को जल्दबाजी में सोना खरीदने या बेचने का फैसला नहीं करना चाहिए। रिपोर्ट का संकेत है कि सोने की कीमतें अस्थायी निचले स्तर के करीब पहुंच सकती हैं, लेकिन रिकवरी की तीसरी शर्त अभी पूरी नहीं हुई है।लंबी अवधि के निवेशक एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय किस्तों में निवेश करने की रणनीति पर विचार कर सकते हैं। गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड म्यूचुअल फंड भी निवेश के विकल्प हैं।वहीं, आभूषण खरीदने वालों को निवेश और निजी इस्तेमाल के उद्देश्य में अंतर समझना चाहिए। सोने के गहनों पर मेकिंग चार्ज और अन्य लागत भी लागू होती है।
आगे क्या रहेगा सोने का रुख?
कुल मिलाकर, अक्टूबर में सोने की 6.3 प्रतिशत गिरावट के बावजूद वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल को लंबी मंदी की आशंका कम नजर आ रही है। उसके ऐतिहासिक विश्लेषण में रिकवरी की तीन में से दो शर्तें पूरी होती दिखाई दे रही हैं।
अब बाजार की नजर वायदा बाजार में सट्टा निवेशकों की पोजीशन, अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों पर रहेगी। यदि तीसरी शर्त भी पूरी होती है, तो सोने की कीमतों में वापसी की संभावना मजबूत हो सकती है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक घटनाक्रम के कारण आगे भी कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
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