Gold की चमक बढ़ी, RBI की तिजोरी में 9.9 लाख करोड़ रुपये का गोल्ड रिजर्व

New Delhi नई दिल्ली : भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ती जा रही है। सोने की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी और रिजर्व एसेट्स में विविधता लाने की रणनीति के चलते देश के आधिकारिक स्वर्ण भंडार का मूल्य बढ़कर 115.8 अरब डॉलर (करीब 9.9 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच गया है।
आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह महीनों में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़कर 17 प्रतिशत हो गई है। वहीं, एक साल पहले इसी अवधि में यह हिस्सेदारी करीब 12 प्रतिशत थी। यानी विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में हुई जबरदस्त तेजी है। इसके अलावा केंद्रीय बैंक पारंपरिक विदेशी मुद्राओं के साथ-साथ सोने जैसे सुरक्षित और स्थिर परिसंपत्तियों में भी निवेश बढ़ा रहे हैं।
सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल
पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में बड़ी तेजी देखने को मिली है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 की शुरुआत में सोने की कीमत लगभग 2,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास थी, जो 2026 में बढ़कर 4,000 डॉलर प्रति औंस से अधिक हो गई है।
सोने की कीमतों में इस तेजी का सीधा असर भारत के स्वर्ण भंडार के मूल्य पर पड़ा है। भले ही सोने की मात्रा में उतनी तेजी से बदलाव नहीं हुआ हो, लेकिन कीमत बढ़ने के कारण रिजर्व में मौजूद सोने की कुल वैल्यू काफी बढ़ गई है।
सुरक्षित निवेश के तौर पर बढ़ा सोने का महत्व
वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताओं, महंगाई और मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच सोने को सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है। दुनिया के कई केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।
भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ने से देश की आर्थिक मजबूती और वैश्विक जोखिमों से निपटने की क्षमता को बढ़ावा मिलता है।
विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता पर जोर
विदेशी मुद्रा भंडार में आमतौर पर अमेरिकी डॉलर, यूरो, पाउंड जैसी विदेशी मुद्राएं और सोना शामिल होता है। लंबे समय तक डॉलर का दबदबा रहा है, लेकिन अब कई देश अपने रिजर्व पोर्टफोलियो में सोने का हिस्सा बढ़ा रहे हैं।
भारत के लिए भी सोना एक महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसी भी तरह की अस्थिरता आने पर सोना आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर सकता है।
अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत
भारत का बढ़ता स्वर्ण भंडार देश की वित्तीय स्थिरता को दर्शाता है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए अहम माना जाता है, क्योंकि इससे आयात भुगतान, मुद्रा स्थिरता और वैश्विक निवेशकों का भरोसा बनाए रखने में मदद मिलती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भी अगर सोने की कीमतों में तेजी बनी रहती है तो भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की वैल्यू और बढ़ सकती है। साथ ही, रिजर्व में सोने की बढ़ती हिस्सेदारी वैश्विक आर्थिक बदलावों के बीच भारत की दीर्घकालिक वित्तीय रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।





