व्यापार

UPI पेमेंट पर शुल्क की खबरों के बीच सरकार का बड़ा बयान जानें किसे देना होगा पैसा

Ratna Netam
9 Aug 2026 3:31 PM IST
UPI पेमेंट पर शुल्क की खबरों के बीच सरकार का बड़ा बयान जानें किसे देना होगा पैसा
x
नई दिल्ली : पिछले कुछ दिनों से डिजिटल पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों के बीच यह सवाल तेजी से चर्चा में है कि क्या आने वाले समय में UPI से भुगतान करने पर यूजर्स को भी कोई चार्ज देना पड़ेगा। इस बहस की शुरुआत Payment and Settlement Systems Act में प्रस्तावित बदलाव के बाद हुई, जिसके तहत UPI लेनदेन पर मर्चेंट से शुल्क लेने की व्यवस्था को सक्षम करने का प्रावधान सामने आया। इसके बाद सोशल मीडिया से लेकर आम लोगों के बीच यह आशंका बढ़ गई कि कहीं सरकार UPI पेमेंट पर सीधे ग्राहकों से पैसा वसूलना शुरू न कर दे। हालांकि, केंद्र सरकार ने शनिवार को इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि आम यूजर्स को UPI से भुगतान करने के लिए कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं देना होगा। ([Press Information Bureau][1])
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ग्राहक पहले की तरह बिना किसी शुल्क के UPI के जरिए भुगतान कर सकेंगे। यानी किसी दुकान, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या अन्य मर्चेंट को QR कोड स्कैन करके भुगतान करने पर ग्राहक के बैंक खाते से अतिरिक्त चार्ज नहीं काटा जाएगा। सरकार ने यह भी साफ किया है कि व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P ट्रांजैक्शन भी मुफ्त रहेगा। इसका मतलब है कि कोई व्यक्ति अपने परिवार के सदस्य, दोस्त या किसी अन्य व्यक्ति के बैंक खाते में UPI के जरिए पैसे भेजता है तो इसके लिए भी उससे ट्रांजैक्शन फीस नहीं ली जाएगी। ([Press Information Bureau][1])
सरकार के मुताबिक, बदलाव का संबंध मुख्य रूप से UPI के भविष्य के वित्तीय ढांचे और मर्चेंट लेनदेन से है। यदि भविष्य में Merchant Discount Rate यानी MDR लागू किया जाता है, तो यह सभी व्यापारियों पर एक समान तरीके से नहीं लगाया जाएगा। सरकार ने कहा है कि MDR केवल एक निश्चित सीमा से ऊपर होने वाले सीमित मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मामूली दर से लागू हो सकता है। साथ ही यह डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले MDR की तुलना में काफी कम रखने की बात कही गई है। ([Press Information Bureau][1])
सरकार ने यह भी कहा है कि UPI पर होने वाले अधिकांश मर्चेंट ट्रांजैक्शन पहले की तरह शुल्क मुक्त रहेंगे। यानी हर QR कोड भुगतान पर व्यापारी से चार्ज लेने की कोई बात नहीं है। छोटे दुकानदारों और कम मूल्य वाले रोजमर्रा के लेनदेन को लेकर भी लोगों की चिंता काफी हद तक दूर हो गई है। हालांकि, MDR की अंतिम व्यवस्था और उसकी दरों को लेकर फैसला आगे की प्रक्रिया के बाद संबंधित व्यवस्था के तहत किया जाएगा। ([Press Information Bureau][1])
दरअसल, UPI का इस्तेमाल पिछले कुछ वर्षों में बेहद तेजी से बढ़ा है। सब्जी की दुकान से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल, ऑनलाइन खरीदारी, बिल भुगतान, मोबाइल रिचार्ज और बैंक ट्रांसफर तक के लिए लोग UPI पर निर्भर हो चुके हैं। ऐसे में अगर ग्राहकों से हर ट्रांजैक्शन पर शुल्क लेने की व्यवस्था आती तो इसका सीधा असर डिजिटल भुगतान की आदतों पर पड़ सकता था। सरकार के ताजा बयान ने फिलहाल इस आशंका को खत्म कर दिया है।
सरकार का कहना है कि UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इसके बुनियादी ढांचे को लगातार मजबूत करने की जरूरत है। साइबर सुरक्षा, फ्रॉड रोकने की व्यवस्था, सर्वर क्षमता और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार निवेश करना पड़ता है। सरकार के अनुसार, केवल सब्सिडी पर निर्भर रहकर UPI के अगले चरण की वृद्धि को बनाए रखना लंबे समय तक व्यावहारिक नहीं हो सकता। इसलिए एक ऐसा वित्तीय मॉडल तैयार करने की जरूरत है जिससे UPI सुरक्षित, मजबूत और लंबे समय तक टिकाऊ बना रहे। ([Press Information Bureau][1])
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि **UPI नागरिकों के लिए मुफ्त रहेगा**। यानी आम ग्राहक को UPI से भुगतान करने के लिए कोई अतिरिक्त ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं देना होगा। P2P ट्रांसफर भी मुफ्त रहेगा। वहीं भविष्य में यदि MDR लागू होता है तो उसका दायरा सीमित मर्चेंट लेनदेन तक रखने और उसे मामूली दर पर लागू करने की बात कही गई है। ([Press Information Bureau][1])
इसलिए फिलहाल UPI इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों को किसी अतिरिक्त भुगतान की चिंता करने की जरूरत नहीं है। सरकार के आधिकारिक स्पष्टीकरण के मुताबिक UPI से पेमेंट करने की मौजूदा सुविधा ग्राहकों के लिए मुफ्त ही रहेगी। आने वाले समय में यदि मर्चेंट शुल्क की व्यवस्था में कोई बदलाव होता है, तो उसका असर मुख्य रूप से तय मानदंडों के तहत आने वाले व्यापारिक लेनदेन पर पड़ेगा, आम यूजर के UPI भुगतान पर नहीं।
Next Story