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Stock Market Today: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को भारी गिरावट देखने को मिली। कारोबार की शुरुआत में तेजी के बाद अचानक बिकवाली का दबाव बढ़ गया और प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स तथा निफ्टी लाल निशान में पहुंच गए। बाजार में आई इस गिरावट से निवेशकों को बड़ा झटका लगा। उपलब्ध इंट्राडे आंकड़ों के मुताबिक, सेंसेक्स 724 अंक गिरकर 72,524 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 306 अंक टूटकर 22,388 के आसपास कारोबार करता नजर आया।
इस दौरान बाजार में गिरावट इतनी तेज रही कि कुछ ही घंटों में लाखों करोड़ रुपये का बाजार पूंजीकरण कम हो गया। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 11 लाख करोड़ रुपये घटकर 447 लाख करोड़ रुपये रह गया।
बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, वैश्विक बाजारों में कमजोरी और निवेशकों की बढ़ती चिंता को माना जा रहा है।
दिन के उच्चतम स्तर से सेंसेक्स में 1314 अंकों की गिरावट
शुक्रवार को शेयर बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सेंसेक्स कारोबार के दौरान 73,766 अंक के उच्चतम स्तर तक पहुंचा था। हालांकि, ऊंचे स्तर पर बिकवाली बढ़ने के बाद इसमें तेज गिरावट दर्ज की गई।
सेंसेक्स दिन के उच्चतम स्तर से फिसलकर 72,452 अंक के निचले स्तर तक आ गया। इस तरह दिन के उच्चतम और न्यूनतम स्तर के बीच 1,314 अंकों का अंतर देखने को मिला।
निफ्टी में भी कुछ ऐसा ही हाल रहा। निफ्टी दिन के दौरान 22,787 अंक तक पहुंचा, लेकिन बाद में बिकवाली के दबाव में करीब 22,388 अंक के स्तर तक आ गया।
बाजार की इस कमजोरी से साफ दिखाई दिया कि शुरुआती खरीदारी के बाद निवेशकों ने शेयरों की बिक्री बढ़ा दी।
निवेशकों के 11 लाख करोड़ रुपये स्वाहा
शेयर बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा असर कंपनियों के बाजार पूंजीकरण पर पड़ा। उपलब्ध कारोबारी आंकड़ों के मुताबिक, बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण करीब 11 लाख करोड़ रुपये घट गया।
इसके बाद कुल बाजार पूंजीकरण लगभग 447 लाख करोड़ रुपये रह गया।
हालांकि, बाजार पूंजीकरण में इतनी कमी का मतलब यह नहीं है कि निवेशकों ने वास्तव में 11 लाख करोड़ रुपये नकद गंवा दिए। यह शेयरों की कीमतों में गिरावट के कारण कंपनियों के कुल बाजार मूल्य में आई कमी को दर्शाता है।
बाजार में गिरावट का असर बड़ी कंपनियों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी पड़ा। शुक्रवार को निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 सूचकांकों में तीन प्रतिशत तक की कमजोरी देखने को मिली।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
शेयर बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही।
वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 113 से 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचने से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने से देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है।
महंगे कच्चे तेल का असर पेट्रोलियम उत्पादों, परिवहन लागत और कंपनियों के उत्पादन खर्च पर भी पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ने और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव आने की आशंका रहती है।
वैश्विक बाजारों में कमजोरी का असर
भारतीय शेयर बाजार पर विदेशी बाजारों की कमजोरी का भी असर देखने को मिला।
अमेरिकी शेयर बाजार में गुरुवार को प्रमुख तकनीकी कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई थी। नैस्डैक कंपोजिट सूचकांक करीब 2.6 प्रतिशत गिर गया, जबकि एसएंडपी 500 सूचकांक में भी 1.2 प्रतिशत की कमजोरी आई।
एशियाई बाजारों में भी कई प्रमुख सूचकांक दबाव में रहे। जापान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों में कमजोरी का रुख दिखाई दिया।
वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और महंगे कच्चे तेल ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया।
इन सेक्टरों में सबसे ज्यादा बिकवाली
शुक्रवार के कारोबार में कई प्रमुख सेक्टरों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली।
मेटल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में करीब तीन प्रतिशत तक की कमजोरी दर्ज की गई। इसके अलावा ऑटोमोबाइल, सरकारी बैंक और रियल एस्टेट से जुड़े शेयरों पर भी दबाव रहा।
शुरुआती कारोबार में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कुछ प्रमुख कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली थी। लेकिन बाजार की व्यापक कमजोरी के बीच शुरुआती तेजी टिक नहीं सकी।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब बड़े सूचकांकों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी तेजी से गिरने लगते हैं, तो यह बाजार में व्यापक बिकवाली का संकेत हो सकता है।
लगातार चौथे दिन दबाव में शेयर बाजार
भारतीय शेयर बाजार पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से दबाव में है। गुरुवार, 22 अक्टूबर को सेंसेक्स 460.30 अंक गिरकर 73,249.39 पर बंद हुआ था।
वहीं, निफ्टी 123.70 अंक टूटकर 22,687.65 के स्तर पर बंद हुआ था।
गुरुवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई थी। शुक्रवार की कमजोरी ने बाजार में दबाव को और बढ़ा दिया।
छोटे निवेशकों को क्या करना चाहिए?
शेयर बाजार में अचानक आने वाली बड़ी गिरावट छोटे निवेशकों के लिए चिंता का कारण बन सकती है। खासकर वे निवेशक जो कम समय में मुनाफा कमाने के उद्देश्य से शेयर खरीदते हैं, उन्हें तेज उतार-चढ़ाव के दौरान नुकसान होने का जोखिम अधिक रहता है।
बाजार विशेषज्ञ आमतौर पर निवेशकों को ऐसी परिस्थितियों में जल्दबाजी से बचने की सलाह देते हैं।
किसी कंपनी के शेयर खरीदने से पहले उसके वित्तीय परिणाम, कर्ज, मुनाफे और कारोबार की संभावनाओं का आकलन करना जरूरी है।
साथ ही बाजार में गिरावट के दौरान उधार लेकर निवेश करना या बिना समझे अत्यधिक जोखिम लेना नुकसानदायक हो सकता है।
आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?
आने वाले कारोबारी सत्रों में कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक बाजारों की दिशा, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के तिमाही नतीजे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है, तो निवेशकों के भरोसे को कुछ सहारा मिल सकता है। हालांकि, बाजार में आगे तेजी आएगी या गिरावट जारी रहेगी, इसका निश्चित अनुमान लगाना संभव नहीं है।
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