
Business बिजनेस : वैश्विक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के बीच केंद्र की **नरेंद्र मोदी सरकार** एलपीजी सिलेंडर को लेकर लगातार अहम फैसले ले रही है। जून महीने में ही सरकार ने एलपीजी से जुड़े तीन बड़े निर्णय लिए हैं, जिनका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर देखने को मिल रहा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन में अस्थिरता के कारण यह कदम उठाए जा रहे हैं। इन फैसलों के बाद घरेलू रसोई गैस की कीमतों और सब्सिडी संरचना में बदलाव देखने को मिला है, जिससे आम लोगों के लिए गैस सिलेंडर पहले की तुलना में महंगा हो गया है।
पहले फैसले के तहत एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में संशोधन किया गया, जिससे बाजार दरों में बढ़ोतरी हुई। दूसरे फैसले में सब्सिडी से जुड़े नियमों में बदलाव किए गए, जिसके चलते कुछ उपभोक्ताओं को मिलने वाली राहत कम हो गई है। तीसरे फैसले में वितरण और सप्लाई व्यवस्था को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिससे लागत में भी वृद्धि देखी जा रही है।
इन सभी निर्णयों का असर सीधे तौर पर आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ा है। रसोई गैस की कीमत बढ़ने से घरेलू खर्चों में इजाफा हुआ है, खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों पर इसका ज्यादा असर देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार में अस्थिरता और ऊर्जा संसाधनों की कीमतों में बदलाव के कारण सरकार के पास सीमित विकल्प बचे हैं। हालांकि, सरकार का दावा है कि वह स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आम जनता को राहत देने के लिए वैकल्पिक उपायों पर भी काम कर रही है।
विपक्षी दलों ने इन फैसलों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं और महंगाई बढ़ने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि एलपीजी जैसी जरूरी वस्तु की कीमत बढ़ने से आम जनता पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
कुल मिलाकर, जून महीने में लिए गए इन तीन बड़े फैसलों ने एलपीजी बाजार और घरेलू बजट दोनों पर असर डाला है, जिससे आने वाले समय में भी कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है।





