व्यापार
सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए जरूरी खबर, फेड के फैसले से बदलेंगे भाव
Rajeshwari Nishad
26 Oct 2026 7:44 PM IST

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बिजनेस। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी फैसले से पहले सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को घरेलू सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में सीमित बदलाव देखने को मिला। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत 80 रुपये बढ़कर 1,41,710 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। इससे पहले इसका भाव 1,41,630 रुपये था। वहीं, चांदी की कीमत में भी मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता के बीच निवेशक फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं।
24 कैरेट सोना 1.42 लाख रुपये के करीब
सोमवार को 24 कैरेट सोने की कीमत में मामूली तेजी दर्ज की गई। IBJA के मुताबिक, सोना 80 रुपये बढ़कर 1,41,710 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।इसी तरह, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के भाव में भी हल्की बढ़त देखने को मिली। हालांकि, यह तेजी इतनी बड़ी नहीं थी कि बाजार में किसी बड़े बदलाव का संकेत दे सके।
सोने की कीमतों में होने वाले छोटे उतार-चढ़ाव पर भी निवेशकों और खरीदारों की नजर रहती है। खासकर त्योहारों के समय लोग सोना खरीदने की योजना बनाते हैं, इसलिए कीमतों में मामूली बदलाव भी खरीदारी के फैसले को प्रभावित कर सकता है।
आज 22 और 18 कैरेट सोने का भाव
IBJA के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को सोने की अलग-अलग शुद्धता के भाव इस प्रकार रहे:
सोने की शुद्धता कीमत प्रति 10 ग्राम
24 कैरेट ₹1,41,710
22 कैरेट ₹1,29,806
18 कैरेट ₹1,06,283
ये IBJA के बेंचमार्क भाव हैं। आभूषण खरीदते समय इन कीमतों के अलावा 3 प्रतिशत जीएसटी, मेकिंग चार्ज और अन्य लागू शुल्क भी जुड़ सकते हैं। इसलिए ज्वैलरी की अंतिम कीमत इससे अधिक हो सकती है।
सोने के साथ चांदी के भाव में भी सीमित तेजी दर्ज की गई। सोमवार को चांदी की कीमत 64 रुपये बढ़कर 1,94,479 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। इससे पहले इसका भाव 1,94,415 रुपये प्रति किलोग्राम था।इस तरह चांदी की कीमत 1.95 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर से नीचे बनी रही।
चांदी का इस्तेमाल आभूषणों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा और औद्योगिक उत्पादों में भी होता है। इसलिए इसकी कीमत पर केवल निवेशकों की मांग ही नहीं, बल्कि उद्योगों की जरूरत और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों का भी असर पड़ता है।
मिडिल ईस्ट तनाव और कच्चे तेल की कीमतों का असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर निवेशक अक्सर सुरक्षित माने जाने वाले विकल्पों की ओर रुख करते हैं। सोना ऐसी ही संपत्तियों में शामिल है। हालांकि, इसकी कीमत हमेशा तनाव बढ़ने के साथ नहीं चढ़ती, क्योंकि डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों की दिशा भी अहम भूमिका निभाती है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा हो सकती है। इससे केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है और सोने-चांदी जैसी संपत्तियों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।सोमवार को घरेलू सर्राफा बाजार में कारोबार सीमित दायरे में रहने के पीछे भी वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निवेशकों की सतर्कता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले पर बाजार की नजर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से संबंधित नीति सोने और चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकती है।यदि ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं, तो ब्याज देने वाली संपत्तियां निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक हो सकती हैं। इसके उलट, ब्याज दरों में कटौती की संभावना बढ़ने पर सोने की मांग को समर्थन मिल सकता है।इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की चाल भी महत्वपूर्ण है। डॉलर मजबूत होने पर दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मांग प्रभावित हो सकती है।फिलहाल बाजार की दिशा तय करने में इन वैश्विक संकेतकों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है।
क्या त्योहारों से पहले सोना खरीदना सही रहेगा?
त्योहारों के समय सोने-चांदी की मांग बढ़ सकती है, लेकिन खरीदारी का फैसला केवल किसी एक दिन की कीमत देखकर नहीं करना चाहिए।यदि आप आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अलग-अलग ज्वैलर्स के भाव और मेकिंग चार्ज की तुलना करें। हॉलमार्किंग और बिल की जानकारी भी जरूर जांचें।
निवेश के उद्देश्य से सोना खरीदने वाले लोगों को अपने वित्तीय लक्ष्य, निवेश की अवधि और जोखिम सहने की क्षमता पर ध्यान देना चाहिए। एक ही दिन की मामूली तेजी या गिरावट के आधार पर बड़ा निवेश करना उचित नहीं है।
आगे कैसी रह सकती है सोने-चांदी की चाल?
आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों पर मिडिल ईस्ट की स्थिति, कच्चे तेल की चाल, डॉलर की मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति से जुड़े संकेतों का असर पड़ सकता है।यदि वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है, तो सोने की मांग को समर्थन मिल सकता है। वहीं डॉलर की मजबूती या ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख कीमतों पर दबाव डाल सकता है। चांदी के मामले में औद्योगिक मांग भी महत्वपूर्ण रहेगी।
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