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सोने का सस्ता विकल्प बना भारत, यूरोप में मची हलचल

Rajeshwari Nishad
31 Oct 2026 12:12 PM IST
सोने का सस्ता विकल्प बना भारत, यूरोप में मची हलचल
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बिज़नेस। भारत में सोने की मांग हमेशा से दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले काफी अधिक रही है। शादी-ब्याह, त्योहारों और निवेश के लिए भारतीय परिवार बड़ी मात्रा में सोना खरीदते हैं। लेकिन भारत में सोने का घरेलू उत्पादन सीमित होने के कारण देश को अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेशों से आयात करना पड़ता है। दशकों तक स्विट्जरलैंड भारत के लिए सोने की आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत रहा। वहां की विश्वस्तरीय रिफाइनरियों में सोने को शुद्ध करके आकर्षक गोल्ड बार के रूप में तैयार किया जाता है और फिर भारत जैसे बड़े बाजारों में भेजा जाता है। हालांकि, अब यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। भारत की बढ़ती रिफाइनिंग क्षमता, नई व्यापार नीतियों और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ व्यापार समझौते ने सोने के आयात का पूरा नक्शा बदलना शुरू कर दिया है।
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, भारत अब केवल स्विट्जरलैंड से तैयार सोना खरीदने पर निर्भर नहीं रहना चाहता। घरेलू रिफाइनरियां अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों से कच्चा या अर्ध-शुद्ध सोना मंगाकर भारत में ही उसे शुद्ध कर रही हैं। इससे भारत के सामने सोने की खरीद के नए विकल्प खुल रहे हैं।
स्विट्जरलैंड की हिस्सेदारी में आई बड़ी गिरावट
भारत के गोल्ड इंपोर्ट में स्विट्जरलैंड लंबे समय तक सबसे आगे रहा है। इसकी वजह वहां की अत्याधुनिक रिफाइनिंग तकनीक, शुद्धता के अंतरराष्ट्रीय मानक और सोने के कारोबार में वर्षों से बना भरोसा है। लेकिन अब इस बाजार में स्विट्जरलैंड की हिस्सेदारी घट रही है।
इकोनॉमिक टाइम्स की 26 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कुल बुलियन आयात में स्विट्जरलैंड की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2026 में घटकर 21.9 प्रतिशत रह गई, जबकि पांच साल पहले यह 42.4 प्रतिशत थी। यानी इस दौरान स्विट्जरलैंड की हिस्सेदारी लगभग आधी हो गई है।
दूसरी तरफ संयुक्त अरब अमीरात की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी हुई है। पांच साल पहले भारत के बुलियन आयात में UAE की हिस्सेदारी 10.8 प्रतिशत थी, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 16.5 प्रतिशत हो गई। ये आंकड़े बताते हैं कि भारत का सोना खरीदने का तरीका अब बदल रहा है और नए देशों की भूमिका बढ़ रही है।
UAE कैसे बन रहा है सोने के आयात का बड़ा केंद्र?
भारत और UAE के बीच हुए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते यानी CEPA ने इस बदलाव को गति दी है। यह समझौता मई 2022 में लागू हुआ था। इसके तहत निर्धारित कोटे के अंतर्गत UAE से आने वाले सोने पर सामान्य आयात शुल्क की तुलना में रियायत दी गई है।
शुरुआत में इस व्यवस्था के तहत सालाना 120 टन सोने का कोटा निर्धारित किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, 2027 से इसे बढ़ाकर 200 टन करने की योजना है। इससे भारत को UAE के माध्यम से सोने की आपूर्ति बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
मई 2026 में भारत ने सोने पर सामान्य आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। वहीं निर्धारित कोटे के तहत पात्र UAE से आयातित सोने पर 14 प्रतिशत शुल्क लागू है। इस एक प्रतिशत की रियायत से आयातकों को कारोबारी लाभ मिलता है।
जून 2026 में UAE से भारत का सोना आयात 649.4 मिलियन डॉलर रहा, जो जून 2025 के 235.9 मिलियन डॉलर के मुकाबले 175.2 प्रतिशत अधिक था। इससे UAE की बढ़ती भूमिका का अंदाजा लगाया जा सकता है।
अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से भी आ रहा सोना
भारत के आयात नक्शे में एक और बड़ा बदलाव यह है कि अब देश की रिफाइनरियां सीधे सोना उत्पादन करने वाले देशों से कच्चा सोना मंगाने लगी हैं। घाना, चिली और पेरू जैसे देश इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
यह सोना सामान्य तैयार गोल्ड बार की तरह नहीं होता। इसे डोरे (Doré) कहा जाता है। डोरे सोना अर्ध-शुद्ध अवस्था में होता है, जिसमें चांदी और कुछ अन्य धातुओं की मिलावट हो सकती है। इसे विशेष तकनीक से रिफाइन करके उच्च शुद्धता वाले सोने में बदला जाता है।
पहले भारतीय आयातक बड़ी मात्रा में तैयार शुद्ध सोना खरीदते थे, लेकिन अब घरेलू रिफाइनिंग क्षमता बढ़ने के कारण कच्चा सोना मंगाकर भारत में ही उसकी प्रोसेसिंग की जा रही है। इससे सोने की वैल्यू एडिशन यानी मूल्य संवर्धन का काम भी देश के भीतर हो रहा है।
लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप के विश्लेषक के अनुसार, भारत में रिफाइनिंग क्षमता के विस्तार ने डोरे आयात के लिए नई सप्लाई चेन तैयार करने में मदद की है। इससे पारंपरिक स्विस सप्लाई पर निर्भरता कम हुई है।
भारत में बढ़ रही है गोल्ड रिफाइनिंग की क्षमता
भारत में सोने की रिफाइनिंग का कारोबार अब पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। घरेलू रिफाइनरियां विदेशों से आने वाले अर्ध-शुद्ध सोने को प्रोसेस करके शुद्ध बुलियन, सिक्के और अन्य उत्पाद तैयार कर रही हैं।
इस कारोबार को बढ़ावा देने में आयात शुल्क की संरचना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। पात्र डोरे सोने पर तैयार बुलियन के मुकाबले 0.65 प्रतिशत कम आयात शुल्क लगता है। इससे रिफाइनरों को कच्चा सोना आयात करके देश में शुद्ध करने का आर्थिक प्रोत्साहन मिलता है।
इसका लाभ केवल रिफाइनिंग कंपनियों को ही नहीं, बल्कि ज्वेलरी उद्योग को भी मिल सकता है। देश में सोने की प्रोसेसिंग बढ़ने से रोजगार, तकनीकी कौशल और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना रहती है।
क्या भारत सोने के मामले में आत्मनिर्भर हो पाएगा?
सोने के आयात के स्रोतों में बदलाव का मतलब यह नहीं है कि भारत अब विदेशी सोने पर निर्भर नहीं रहेगा। देश में सोने का घरेलू खनन उत्पादन बेहद कम है, जबकि सालाना खपत लगभग 800 से 1,000 टन के बीच रहने का अनुमान है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा अभी भी अंतरराष्ट्रीय बाजार से ही पूरा करता है।
नीति आयोग की ट्रेड वॉच रिपोर्ट के मुताबिक, UAE, स्विट्जरलैंड और हांगकांग भारत के प्रमुख आयात स्रोत हैं। हालांकि, घरेलू रिफाइनिंग उद्योग के विस्तार के बावजूद इस क्षेत्र में कई चुनौतियां मौजूद हैं। छोटी रिफाइनरियों की सीमित क्षमता, पूंजी की जरूरत और अंतरराष्ट्रीय मान्यता जैसे मुद्दे उद्योग के विकास को प्रभावित करते हैं।
आयात के नए रास्तों से जुड़ी चुनौतियां भी
UAE से सोने के आयात में बढ़ोतरी के साथ कुछ चिंताएं भी सामने आई हैं। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने आशंका जताई है कि UAE से आने वाले सोने का कुछ हिस्सा अन्य देशों से होकर दुबई के रास्ते भारत पहुंच सकता है, ताकि व्यापार समझौते के तहत मिलने वाले शुल्क लाभ का फायदा उठाया जा सके।
इसलिए कारोबार में पारदर्शिता बनाए रखने और सोने के वास्तविक मूल देश की पहचान सुनिश्चित करने की जरूरत है। इसके लिए आयात के नियमों और मूल देश से जुड़े प्रमाणपत्रों की प्रभावी जांच महत्वपूर्ण होगी।
कुल मिलाकर भारत के सोना आयात का नक्शा बदल रहा है। स्विट्जरलैंड की हिस्सेदारी घट रही है, UAE की भूमिका बढ़ रही है और घाना, चिली तथा पेरू जैसे देशों से कच्चे सोने की आपूर्ति मजबूत हो रही है। भारत के लिए यह बदलाव केवल आयात के नए रास्ते खुलने तक सीमित नहीं है, बल्कि घरेलू रिफाइनिंग उद्योग को मजबूत बनाने और सोने के कारोबार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का भी अवसर है।
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