व्यापार
दीवाली से पहले चीन पर भारत का एक्शन, टाइटेनियम डाइऑक्साइड पर शुल्क
Rajeshwari Nishad
25 Oct 2026 5:45 PM IST

x
नई दिल्ली। केंद्र सरकार के इस फैसले का उद्देश्य भारतीय टाइटेनियम डाइऑक्साइड निर्माताओं को उन आयातों से राहत देना है, जिन्हें जांच में अनुचित रूप से कम कीमत पर बेचा जाना पाया गया। टाइटेनियम डाइऑक्साइड एक महत्वपूर्ण सफेद रंगद्रव्य है, जिसका इस्तेमाल पेंट, कोटिंग, प्लास्टिक और कई औद्योगिक उत्पादों में किया जाता है। इसलिए इस शुल्क का असर घरेलू उत्पादकों के साथ-साथ इस कच्चे माल का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों पर भी पड़ सकता है।
क्या है पूरा मामला?
वाणिज्य मंत्रालय के अधीन व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) ने चीन से आने वाले टाइटेनियम डाइऑक्साइड उत्पादों की दोबारा जांच की थी। जांच में निष्कर्ष निकाला गया कि संबंधित उत्पादों का भारत में डंपिंग के जरिए आयात हो रहा था और इससे घरेलू उद्योग को वास्तविक नुकसान पहुंचा था। इसके बाद डीजीटीआर ने 3 अगस्त 2026 को अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट में एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की सिफारिश की। राजस्व विभाग ने अब इस सिफारिश के आधार पर शुल्क लागू कर दिया है।
यह मामला पहले भी चर्चा में रहा था। मई 2025 में टाइटेनियम डाइऑक्साइड पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई गई थी, लेकिन भारतीय पेंट एसोसिएशन की कानूनी चुनौती के बाद कलकत्ता हाई कोर्ट ने मामले पर दोबारा विचार करने का आदेश दिया। इसके बाद नई जांच प्रक्रिया पूरी की गई और सरकार ने संशोधित निष्कर्षों के आधार पर शुल्क फिर लागू किया।
कितनी लगेगी एंटी-डंपिंग ड्यूटी?
सरकार ने शुल्क की दर सभी उत्पादकों के लिए समान नहीं रखी है। यह संबंधित निर्माता और अधिसूचना में तय श्रेणी के अनुसार अलग-अलग होगी।
शुल्क प्रति मीट्रिक टन
कुछ निर्धारित उत्पादक
460 डॉलर
सूचीबद्ध सहकारी उत्पादकों की कुछ श्रेणियां
510 डॉलर
कुछ निर्दिष्ट चीनी उत्पादक
563 डॉलर
609 डॉलर
अन्य संबंधित उत्पादक
681 डॉलर
ये दरें अधिसूचना में निर्धारित शर्तों के अधीन हैं। कुछ दरों का लाभ लेने के लिए आयातक को निर्माता का नाम और अन्य निर्धारित विवरण वाला वैध वाणिज्यिक बिल प्रस्तुत करना होगा। जरूरी दस्तावेज न होने की स्थिति में अन्य उत्पादकों के लिए निर्धारित दर लागू हो सकती है।
सरकार के मुताबिक, यह शुल्क भारत में आयात के समय लागू नियमों के अनुसार वसूला जाएगा। इसकी अवधि अधिसूचना प्रकाशित होने की तारीख से पांच वर्ष होगी, जब तक इसे पहले वापस नहीं लिया जाता, बदला नहीं जाता या किसी अन्य आदेश से प्रतिस्थापित नहीं किया जाता।
क्या होता है एंटी-डंपिंग शुल्क?
एंटी-डंपिंग ड्यूटी ऐसा व्यापारिक शुल्क है, जो तब लगाया जा सकता है जब विदेश से आने वाले उत्पादों को अनुचित रूप से कम कीमत पर बेचे जाने और उससे घरेलू उद्योग को नुकसान पहुंचने की पुष्टि होती है।
इसका मकसद विदेशी उत्पादों पर सामान्य प्रतिबंध लगाना नहीं, बल्कि घरेलू निर्माताओं को अनुचित मूल्य प्रतिस्पर्धा से सुरक्षा देना है। इस तरह के शुल्क के लिए संबंधित उत्पादों की कीमत, आयात की स्थिति और घरेलू उद्योग पर पड़े प्रभाव की जांच की जाती है।
टाइटेनियम डाइऑक्साइड के मामले में सरकार की कार्रवाई इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। जांच में पाया गया कि चीन से आने वाले संबंधित उत्पादों की कीमतों से भारतीय निर्माताओं को नुकसान हुआ है। नए शुल्क से घरेलू कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में राहत मिलने की उम्मीद है।
पेंट उद्योग पर पड़ सकता है असर
टाइटेनियम डाइऑक्साइड का इस्तेमाल पेंट और कोटिंग उद्योग में बड़े पैमाने पर होता है। यह उत्पादों को सफेदी, चमक और अपारदर्शिता देने में मदद करता है। प्लास्टिक और कई अन्य औद्योगिक उत्पादों में भी इसका उपयोग होता है।
इसलिए चीन से आने वाले संबंधित उत्पादों पर शुल्क लगने से उन कंपनियों की आयात लागत बढ़ सकती है, जो इस कच्चे माल पर निर्भर हैं। यदि कंपनियां बढ़ी हुई लागत को खुद वहन नहीं कर पातीं, तो भविष्य में उनके उत्पादों की कीमतों पर भी दबाव पड़ सकता है।
हालांकि, शुल्क लागू होने का मतलब यह नहीं है कि बाजार में पेंट या अन्य उपभोक्ता उत्पाद तुरंत महंगे हो जाएंगे। वास्तविक असर घरेलू उपलब्धता, कंपनियों के पुराने स्टॉक, वैकल्पिक आयात स्रोतों, खरीद लागत और कारोबारियों की लागत वहन करने की क्षमता पर निर्भर करेगा।
कुछ इस्तेमालों को मिली छूट
सरकार की अधिसूचना में टाइटेनियम डाइऑक्साइड के कुछ विशेष इस्तेमालों को शुल्क के दायरे से बाहर रखा गया है। इनमें कुछ खाद्य उपयोग, दवा की गोलियों की कोटिंग, कॉस्मेटिक्स और सनस्क्रीन, कपड़ा एवं फाइबर उत्पादन तथा निर्धारित शर्तों के तहत 100 नैनोमीटर से छोटे नैनो या अल्ट्राफाइन टाइटेनियम डाइऑक्साइड के कुछ उपयोग शामिल हैं। ये छूट अधिसूचना में दी गई उत्पाद संबंधी परिभाषाओं और शर्तों के अधीन हैं।
इसका अर्थ है कि शुल्क सभी प्रकार के टाइटेनियम डाइऑक्साइड या उसके हर इस्तेमाल पर समान रूप से लागू नहीं होगा। आयातकों को संबंधित उत्पाद की श्रेणी और निर्धारित उपयोग के आधार पर नियमों की जांच करनी होगी।
घरेलू उद्योग को राहत की उम्मीद
भारत सरकार के इस फैसले से घरेलू टाइटेनियम डाइऑक्साइड निर्माताओं को विदेशी उत्पादों से मिल रही मूल्य प्रतिस्पर्धा के दबाव में राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं, इस कच्चे माल का इस्तेमाल करने वाले उद्योगों को अपनी खरीद और लागत का नए सिरे से आकलन करना पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, चीन से आने वाले चुनिंदा टाइटेनियम डाइऑक्साइड उत्पादों पर 460 से 681 डॉलर प्रति टन तक शुल्क लागू करने का निर्णय घरेलू उद्योग की सुरक्षा के उद्देश्य से लिया गया है। इसका अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि घरेलू उत्पादन, वैकल्पिक आपूर्ति और कंपनियों की लागत संबंधी रणनीति किस तरह बदलती है।
Next Story





