
Business बिजनेस: वर्ल्ड बैंक में भारत के नए एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा ने शुक्रवार को कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के अनुमान से कहीं अधिक मजबूत हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय बैंक द्वारा FY26 और FY27 के लिए जारी किए गए GDP ग्रोथ के अनुमान भारत की वास्तविक आर्थिक ताकत को पूरी तरह नहीं दिखाते।
RBI ने शुक्रवार को अपने नवीनतम आर्थिक अनुमान में FY26 के लिए 6.6 प्रतिशत GDP ग्रोथ का अनुमान पेश किया, जो पहले के 6.9 प्रतिशत के पूर्वानुमान से कम है। वहीं, FY27 के लिए केंद्रीय बैंक ने ग्रोथ का अनुमान 6.3 प्रतिशत रखा है, जबकि इसका पिछला अनुमान 6.7 प्रतिशत था।
नीलकंठ मिश्रा का कहना है कि RBI के ये अनुमान “सुरक्षा के लिहाज़ से सतर्क” हैं और वास्तविक आर्थिक स्थिति से पीछे रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड बैंक की आंतरिक असेसमेंट और हालिया डेटा का विश्लेषण बताते हैं कि फरवरी और मार्च 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था करीब 8 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ मजबूत रही।
मिश्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की अर्थव्यवस्था की यह ताकत कई प्रमुख क्षेत्रों में दिखाई दे रही है, जैसे कि विनिर्माण, निर्यात और घरेलू खपत। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ते निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार और रोजगार सृजन ने आर्थिक गतिविधियों को मजबूत बनाए रखा है।
उन्होंने आगे कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितताओं और मुद्रास्फीति के दबाव के बावजूद भारत की इकोनॉमी ने स्थिरता बनाए रखी है और यह संकेत देता है कि आने वाले वित्तीय वर्ष में विकास के अवसर और बढ़ सकते हैं।
नीलकंठ मिश्रा ने कहा, "RBI के अनुमान एक सुरक्षित पक्ष रखते हैं, लेकिन हमारी आंतरिक समीक्षा और ताज़ा आर्थिक डेटा दिखाते हैं कि भारत की ग्रोथ FY26 में 7.5 से 8 प्रतिशत के बीच रहने की पूरी संभावना है। यह भारत की मजबूत मांग, निवेश आकर्षण और निर्यात क्षमताओं का संकेत है।"
वर्ल्ड बैंक के निदेशक ने यह भी जोड़ा कि भारत का वित्तीय ढांचा, बैंकिंग सेक्टर की मजबूती और मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने की नीतियाँ अर्थव्यवस्था की वृद्धि को आगे बढ़ाने में मदद कर रही हैं। उन्होंने निवेशकों और उद्योगपतियों को विश्वास दिलाया कि भारत की आर्थिक संभावनाएं अभी भी ऊँचाई पर हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि RBI के अनुमान और वर्ल्ड बैंक के दृष्टिकोण में अंतर यह दर्शाता है कि भारत की आर्थिक गतिविधियाँ अधिक गतिशील और संभावनाओं से भरी हुई हैं। सरकार की नीतियाँ, बुनियादी ढांचे में निवेश और डिजिटलाइजेशन से जुड़े कार्यक्रम भी आर्थिक वृद्धि को बल प्रदान कर रहे हैं।
नीलकंठ मिश्रा के अनुसार, वैश्विक बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और भारत की निर्यात रणनीतियों के चलते FY26 में निर्यात और विनिर्माण क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान रहने की उम्मीद है। इसके साथ ही, घरेलू मांग और उपभोक्ता खर्च भी बढ़ने की संभावना है, जो समग्र GDP ग्रोथ को ऊपर खींचेगा।





