
New Delhi नई दिल्ली : ग्लोबल टेंशन के बीच भारत की अर्थव्यवस्था ने मार्च तिमाही में 7.8 प्रतिशत की रफ्तार से वृद्धि दर्ज की है। हालांकि, यह वृद्धि पिछली तिमाही की तुलना में थोड़ी कम रही है।
आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर तिमाही में देश की GDP ग्रोथ 8 प्रतिशत रही थी। इसके मुकाबले मार्च तिमाही में मामूली गिरावट देखने को मिली है, लेकिन इसके बावजूद अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। खासकर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को भी इस गिरावट का एक कारण माना जा रहा है।
इन वैश्विक परिस्थितियों का असर व्यापार, तेल की कीमतों और सप्लाई चेन पर देखने को मिला, जिससे आर्थिक गतिविधियों की गति पर थोड़ा दबाव बना।
इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने स्थिर प्रदर्शन बनाए रखा है। घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की मजबूती ने GDP ग्रोथ को सहारा दिया है।
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, आने वाले महीनों में वैश्विक स्थिति स्थिर होने पर भारत की आर्थिक वृद्धि में फिर से सुधार देखने को मिल सकता है।
कुल मिलाकर, मार्च तिमाही में 7.8% GDP ग्रोथ के साथ भारत ने मजबूत प्रदर्शन किया है, हालांकि वैश्विक तनाव के कारण इसमें हल्की गिरावट दर्ज की गई है।





