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जामनगर रिफाइनरी बनी अंबानी की सबसे बड़ी ताकत

Rajeshwari Nishad
22 Oct 2026 6:27 PM IST
जामनगर रिफाइनरी बनी अंबानी की सबसे बड़ी ताकत
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Business : गुजरात के जामनगर में स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज की विशाल रिफाइनरी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्क रुबियो की भारत यात्रा और जामनगर रिफाइनरी के दौरे ने इस औद्योगिक परिसर का महत्व फिर से उजागर कर दिया है। मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए जामनगर रिफाइनरी किसी कामधेनु या भाग्यलक्ष्मी से कम नहीं मानी जाती। यह न केवल कंपनी के तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार का प्रमुख आधार है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
दुनिया के सबसे बड़े एकल-स्थान तेल शोधन परिसरों में शामिल जामनगर रिफाइनरी अपनी विशाल उत्पादन क्षमता, आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के कारण अलग पहचान रखती है। यहां से तैयार पेट्रोलियम उत्पाद दुनिया के कई देशों तक पहुंचते हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्क रुबियो ने किया दौरा
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्क रुबियो ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज के रिफाइनरी परिसर का दौरा किया। उनके साथ भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी मौजूद रहे। इस दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और कार्यकारी निदेशक अनंत अंबानी ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।
दौरे के दौरान वैश्विक ऊर्जा बाजार, पारंपरिक और नई ऊर्जा, अत्याधुनिक तकनीक तथा व्यावसायिक साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा हुई। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को रिफाइनरी की विशाल क्षमता और आधुनिक संचालन प्रणाली की जानकारी दी गई।
दुनिया की सबसे बड़ी सिंगल-साइट रिफाइनरी
जामनगर रिफाइनरी की सबसे बड़ी विशेषता इसकी उत्पादन क्षमता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के अनुसार, यहां प्रतिदिन लगभग 14 लाख बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता है।
यह दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे जटिल एकल-स्थान रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स है। इसकी कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 21.1 है, जो जटिल किस्म के कच्चे तेल को विभिन्न उपयोगी पेट्रोलियम उत्पादों में बदलने की तकनीकी क्षमता को दर्शाता है।
इस परिसर में कई प्रकार के कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया जा सकता है। यही लचीलापन रिलायंस को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान करता है।
रिलायंस की कमाई में सबसे बड़ा योगदान
रिलायंस इंडस्ट्रीज का कारोबार आज दूरसंचार, खुदरा व्यापार, डिजिटल सेवाओं और नई ऊर्जा जैसे विभिन्न क्षेत्रों तक फैल चुका है। इसके बावजूद तेल से रसायन यानी ऑयल-टू-केमिकल्स कारोबार कंपनी के राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है।
वित्त वर्ष 2025-26 में रिलायंस के ऑयल-टू-केमिकल्स कारोबार का राजस्व लगभग 6.62 लाख करोड़ रुपये रहा। यह पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 5.7 प्रतिशत अधिक था। इसी अवधि में इस कारोबार का EBITDA लगभग 60,546 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि रिलायंस के विशाल कारोबारी साम्राज्य में तेल शोधन और पेट्रोकेमिकल कारोबार कितना महत्वपूर्ण स्थान रखता है। हालांकि, कंपनी के ऑयल-टू-केमिकल्स कारोबार में जामनगर के अलावा अन्य संबंधित गतिविधियां भी शामिल हैं।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा में अहम भूमिका
जामनगर रिफाइनरी केवल रिलायंस इंडस्ट्रीज की आर्थिक ताकत का केंद्र नहीं है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। ऐसे में देश में बड़ी रिफाइनिंग क्षमता उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। जामनगर में कच्चे तेल को पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों में बदला जाता है।
इससे घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में
निर्यात
का अवसर भी मिलता है। जामनगर की विशाल क्षमता भारत को वैश्विक पेट्रोलियम उत्पाद व्यापार में मजबूत स्थिति प्रदान करती है।
वैश्विक तेल बाजार में क्यों है इतनी अहमियत?
पश्चिम एशिया में तनाव, समुद्री परिवहन में बाधा और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का प्रभाव दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है।
ऐसे समय में जामनगर जैसे बड़े रिफाइनिंग केंद्रों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। इस परिसर की सालाना शोधन क्षमता लगभग 6.82 करोड़ टन है। इसमें विशेष निर्यात इकाई की क्षमता लगभग 3.52 करोड़ टन सालाना है।
विशाल उत्पादन और निर्यात व्यवस्था के कारण रिलायंस वैश्विक बाजार में डीजल तथा विमान ईंधन की आपूर्ति करने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल है।
भारत-अमेरिका ऊर्जा साझेदारी को मिल सकती है मजबूती
मार्क रुबियो की जामनगर यात्रा को भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते ऊर्जा सहयोग के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अमेरिका वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में अपनी भूमिका मजबूत करने के साथ भारतीय कंपनियों के साथ व्यापारिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।
वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज भी पारंपरिक ऊर्जा के साथ नई ऊर्जा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत विनिर्माण क्षेत्र में विस्तार कर रही है।
रुबियो और अंबानी परिवार के बीच हुई बातचीत में डेटा सेंटर, ऊर्जा प्रौद्योगिकी और अमेरिकी कंपनियों के साथ संभावित साझेदारी जैसे विषय भी शामिल रहे। हालांकि, इस यात्रा से किसी नए वाणिज्यिक समझौते की पुष्टि नहीं हुई है।
नई ऊर्जा के क्षेत्र में भी बड़ा निवेश
रिलायंस इंडस्ट्रीज अब तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार के साथ स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में भी अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही है।
जामनगर में नई ऊर्जा से जुड़ी गीगा फैक्ट्रियां विकसित की जा रही हैं। इनमें सौर ऊर्जा, बैटरी और अन्य ऊर्जा तकनीकों से संबंधित उत्पादन क्षमताओं का विस्तार कंपनी की योजनाओं का हिस्सा है।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को इन परियोजनाओं और निर्माणाधीन डेटा सेंटर से जुड़ी योजनाओं की भी जानकारी दी गई।
इससे संकेत मिलता है कि आने वाले वर्षों में जामनगर की पहचान केवल तेल रिफाइनरी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह आधुनिक ऊर्जा और तकनीकी विनिर्माण का भी प्रमुख केंद्र बन सकता है।
अंबानी साम्राज्य की मजबूत आर्थिक नींव
जामनगर रिफाइनरी की सफलता ने रिलायंस इंडस्ट्रीज को वैश्विक ऊर्जा कारोबार में महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है। विशाल उत्पादन क्षमता, आधुनिक तकनीक, मजबूत निर्यात व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संबंध इसकी प्रमुख ताकत हैं।
मार्क रुबियो की यात्रा ने यह स्पष्ट किया है कि जामनगर का महत्व केवल भारतीय उद्योग जगत तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक सहयोग के क्षेत्र में भी इसकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए यह रिफाइनरी आज भी आर्थिक मजबूती का बड़ा स्तंभ है। यही वजह है कि जामनगर को अंबानी परिवार के कारोबारी साम्राज्य की सबसे मूल्यवान औद्योगिक संपत्तियों में गिना जाता है।
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