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LIC के हजारों करोड़ डूबे जानें कौन से 6 शेयर बने वजह

Ratna Netam
11 Aug 2026 4:40 PM IST
LIC के हजारों करोड़ डूबे जानें कौन से 6 शेयर बने वजह
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बिजनेस : शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव का असर देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC के निवेश पोर्टफोलियो पर भी दिखाई दे रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान LIC के पोर्टफोलियो में शामिल कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई। इसका सीधा असर इन कंपनियों में LIC की हिस्सेदारी की बाजार वैल्यू पर पड़ा। खास तौर पर Infosys, Vedanta, ONGC, TCS, HCL Technologies और Reliance Industries के शेयरों में कमजोरी से LIC को हजारों करोड़ रुपये की वैल्यू का नुकसान हुआ है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पहली तिमाही में जिन कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई, उनमें IT सेक्टर की दिग्गज कंपनियां भी शामिल रहीं। शेयर बाजार में कमजोर सेंटीमेंट, ग्लोबल आर्थिक परिस्थितियों और अलग-अलग सेक्टरों में दबाव के कारण कई बड़े शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। LIC जैसी बड़ी संस्थागत निवेशक के लिए शेयर कीमतों में मामूली गिरावट भी उसकी होल्डिंग की वैल्यू में हजारों करोड़ रुपये का अंतर पैदा कर सकती है।
सबसे पहले Infosys की बात करें तो इस IT कंपनी के शेयरों में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। 30 जून 2026 तक LIC के पास Infosys के शेयरों की होल्डिंग करीब 43,895 करोड़ रुपये की थी। शेयर में गिरावट के कारण LIC की इस हिस्सेदारी की बाजार वैल्यू में लगभग 10,229 करोड़ रुपये की कमी आई। IT सेक्टर में मांग, ग्लोबल आर्थिक अनिश्चितता और टेक कंपनियों के प्रदर्शन को लेकर निवेशकों की चिंताओं का असर इस तरह के शेयरों पर देखने को मिला।
Vedanta भी LIC के पोर्टफोलियो के लिए नुकसान का कारण बनी। आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2026 को Vedanta में LIC की होल्डिंग की वैल्यू करीब 12,109 करोड़ रुपये थी, जो 30 जून तक घटकर लगभग 4,996 करोड़ रुपये रह गई। इस तरह LIC की हिस्सेदारी की वैल्यू में करीब 7,113 करोड़ रुपये की कमी आई। कंपनी के शेयर प्रदर्शन में कमजोरी ने सरकारी बीमा कंपनी के पोर्टफोलियो पर दबाव बढ़ाया।सरकारी ऊर्जा कंपनी ONGC के शेयरों में गिरावट का असर भी LIC पर पड़ा। 31 मार्च 2026 तक ONGC में LIC की होल्डिंग की वैल्यू करीब 36,461 करोड़ रुपये थी। 30 जून तक यह घटकर लगभग 29,413 करोड़ रुपये रह गई। यानी तीन महीने की अवधि में LIC की होल्डिंग वैल्यू में करीब 7,048 करोड़ रुपये की गिरावट आई।
TCS के शेयरों में आई कमजोरी ने भी LIC के पोर्टफोलियो को नुकसान पहुंचाया। मार्च 2026 में TCS में LIC की होल्डिंग की वैल्यू करीब 47,073 करोड़ रुपये बताई गई थी। पहली तिमाही के दौरान TCS के शेयर में करीब 13 प्रतिशत की गिरावट आई, जिसके चलते LIC की हिस्सेदारी की वैल्यू में लगभग 6,504 करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई।HCL Technologies भी उन प्रमुख कंपनियों में शामिल रही, जिनके शेयरों में गिरावट से LIC को नुकसान हुआ। मार्च 2026 में कंपनी में LIC की होल्डिंग करीब 25,393 करोड़ रुपये की थी, जो जून के अंत तक घटकर लगभग 20,789 करोड़ रुपये रह गई। इस तरह LIC की हिस्सेदारी की वैल्यू करीब 4,604 करोड़ रुपये कम हुई। कंपनी के शेयर में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
इसके अलावा Reliance Industries के शेयरों में भी पहली तिमाही के दौरान कमजोरी रही। इस अवधि में कंपनी के शेयर करीब 3.72 प्रतिशत नीचे आए। मार्च 2026 में Reliance Industries में LIC की होल्डिंग की वैल्यू लगभग 1,21,548 करोड़ रुपये थी, जो 30 जून तक घटकर करीब 1,18,396 करोड़ रुपये रह गई। यानी इस हिस्सेदारी की बाजार वैल्यू में लगभग 3,152 करोड़ रुपये की कमी आई।इन आंकड़ों से साफ है कि पहली तिमाही में कुछ प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट का असर LIC के इक्विटी पोर्टफोलियो पर पड़ा है। हालांकि, शेयर बाजार में किसी होल्डिंग की बाजार वैल्यू में कमी को सीधे तौर पर कंपनी के वास्तविक या स्थायी नुकसान के बराबर नहीं माना जा सकता। शेयर की कीमतें लगातार बदलती रहती हैं और बाजार में तेजी आने पर यही वैल्यू दोबारा बढ़ भी सकती है।
LIC लंबे समय से भारतीय शेयर बाजार में एक बड़े संस्थागत निवेशक के तौर पर सक्रिय है और देश की कई प्रमुख कंपनियों में उसकी हिस्सेदारी है। इसलिए बाजार में व्यापक गिरावट या बड़े शेयरों में कमजोरी का असर उसके पोर्टफोलियो पर दिखाई देना स्वाभाविक है। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि किसी एक तिमाही के प्रदर्शन के आधार पर LIC के पूरे निवेश पोर्टफोलियो का आकलन नहीं किया जा सकता। बाजार के आगे के रुख, कंपनियों के तिमाही नतीजे और शेयरों की कीमतों में होने वाले बदलाव LIC की होल्डिंग वैल्यू को प्रभावित करते रहेंगे।यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले कंपनी के वित्तीय आंकड़ों और अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करना जरूरी है।
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