"29 रुपये महंगा हुआ रसोई गैस सिलेंडर, सरकार ने की कीमत बढ़ोतरी का समर्थन"

Business बिजनेस : केंद्र सरकार ने घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की वृद्धि की है। इस बढ़ोतरी के एक दिन बाद सरकार ने अपने इस फैसले का बचाव किया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में लगातार तेजी के बावजूद भारत में घरेलू परिवारों को रसोई गैस अन्य देशों की तुलना में सस्ती कीमत पर मिल रही है।
सरकार के अनुसार, एलपीजी की कीमतों में यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय मार्केट रेट के अनुरूप की गई है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी लगातार जारी है, जिससे घरेलू स्तर पर भी गैस के आयात की लागत बढ़ रही है। केंद्र सरकार का कहना है कि भारत में एलपीजी की कीमतें अब भी विश्व स्तर पर काफी प्रतिस्पर्धी और आम जनता के लिए सुलभ हैं।
इस बढ़ोतरी के साथ ही घरेलू रसोई गैस सिलेंडर का मूल्य राज्य और सब्सिडी के आधार पर भिन्न हो सकता है। हालांकि, सरकार की सब्सिडी नीति के चलते अधिकांश घरेलू परिवारों को राहत मिलती है और रसोई गैस की कीमत अंतरराष्ट्रीय स्तर की तुलना में कम बनी रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम एलपीजी आपूर्ति और आयात लागत को संतुलित रखने के लिए आवश्यक था।
केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने बयान में कहा कि “अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में तेजी के बावजूद भारत में घरेलू परिवारों को रसोई गैस दुनिया के अन्य देशों की तुलना में किफायती दरों पर मिल रही है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि आम परिवारों को एलपीजी की उपलब्धता और कीमतों में संतुलन बना रहे।”
इस बढ़ोतरी से आम घरेलू उपयोगकर्ताओं पर प्रत्यक्ष असर पड़ेगा। हालांकि, सरकार का तर्क है कि यह कदम एलपीजी आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर रखने और अंतरराष्ट्रीय बाजार की अस्थिरता के प्रभाव को घरेलू स्तर पर सीमित करने के लिए जरूरी था। पिछले कुछ महीनों में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी देखी गई है, जिससे आयात लागत बढ़ी है। सरकार ने इसे नियंत्रित करने के लिए समय-समय पर कीमतों को अपडेट किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू एलपीजी की कीमतों में इस तरह की बढ़ोतरी वैश्विक बाजार की स्थितियों के अनुसार होना सामान्य प्रक्रिया है। इससे न केवल वितरकों और आपूर्तिकर्ताओं को फायदा होता है, बल्कि घरेलू आपूर्ति श्रृंखला भी सुचारू बनी रहती है। हालांकि आम जनता के लिए यह थोड़ी अतिरिक्त आर्थिक दबाव पैदा कर सकती है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि एलपीजी की कीमतों में यह बढ़ोतरी नियमित रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और मुद्रा विनिमय दर के अनुसार की जाती रहेगी। इसका मकसद घरेलू परिवारों को हमेशा किफायती दर पर गैस उपलब्ध कराना और बाजार में अस्थिरता को नियंत्रित करना है।
इस प्रकार, एलपीजी की कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी एक नीतिगत कदम के रूप में देखी जा रही है। सरकार का मानना है कि इस कदम से घरेलू आपूर्ति और आयात लागत के बीच संतुलन बना रहेगा। भारतीय परिवारों को दुनिया के अन्य देशों की तुलना में अभी भी सस्ती और किफायती रसोई गैस उपलब्ध है, और भविष्य में भी यह नीति इसी दिशा में जारी रहेगी।





