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क्रूड महंगाई और होर्मुज तनाव से तय होगी बाजार की चाल निवेशकों की बढ़ी चिंता

Ratna Netam
9 Aug 2026 6:35 PM IST
क्रूड महंगाई और होर्मुज तनाव से तय होगी बाजार की चाल निवेशकों की बढ़ी चिंता
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मुंबई : भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह काफी अहम रहने वाला है। घरेलू और वैश्विक स्तर पर कई ऐसे घटनाक्रम हैं, जो शेयर बाजार की दिशा और निवेशकों के रुख को प्रभावित कर सकते हैं। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े घटनाक्रम और भारत तथा अमेरिका के मुद्रास्फीति के आंकड़े बाजार के लिए प्रमुख संकेतक रहेंगे। इसके अलावा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई की गतिविधियों और घरेलू कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
कच्चे तेल की कीमतें बनेंगी बड़ा फैक्टर
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतें शेयर बाजार के साथ-साथ अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण होती हैं। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की स्थिति में कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की कीमतों में तेज वृद्धि होती है तो इससे भारत के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।
रिलायंस ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट रिसर्च अजित मिश्रा के अनुसार, बाजार की नजर पश्चिम एशिया की स्थिति, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी। इन घटनाक्रमों में किसी भी बड़े बदलाव का असर निवेशकों की धारणा पर दिखाई दे सकता है।
महंगाई के आंकड़ों पर रहेगी नजर
घरेलू मोर्चे पर जुलाई के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई आधारित महंगाई के आंकड़े और थोक मूल्य सूचकांक यानी डब्ल्यूपीआई आधारित महंगाई के आंकड़े महत्वपूर्ण रहेंगे। इसके अलावा विदेशी मुद्रा भंडार के ताजा आंकड़ों से भी अर्थव्यवस्था की बाहरी स्थिति का संकेत मिलेगा।
भारत में 12 अगस्त को सीपीआई आधारित महंगाई के आंकड़े जारी होने हैं, जबकि 14 अगस्त को डब्ल्यूपीआई आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़े सामने आएंगे। इन आंकड़ों से बाजार को महंगाई की मौजूदा स्थिति और आगे के आर्थिक रुख का अनुमान लगाने में मदद मिलेगी।
अगर महंगाई के आंकड़े बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहते हैं तो निवेशकों का भरोसा मजबूत हो सकता है। वहीं, उम्मीद से ज्यादा महंगाई के आंकड़े आने पर बाजार में दबाव देखने को मिल सकता है।
अमेरिका के महंगाई आंकड़े भी अहम
भारतीय बाजार के लिए केवल घरेलू आंकड़े ही महत्वपूर्ण नहीं हैं। अमेरिका में भी जुलाई के सीपीआई और पीपीआई आंकड़े जारी होने वाले हैं। अमेरिका की महंगाई के आंकड़ों का असर वहां की ब्याज दरों और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति से जुड़ी उम्मीदों पर पड़ता है।
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के मुताबिक, पश्चिम एशिया की स्थिति के साथ अमेरिका के जुलाई के महंगाई आंकड़े इस सप्ताह के प्रमुख वैश्विक घटनाक्रमों में शामिल होंगे। अमेरिकी महंगाई के आंकड़े वैश्विक बाजारों के रुख को प्रभावित कर सकते हैं और इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है।
कंपनियों के तिमाही नतीजे भी डालेंगे असर
बाजार की दिशा तय करने में कंपनियों के वित्तीय नतीजों की भी अहम भूमिका रहेगी। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजों का सिलसिला जारी है। इस सप्ताह हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स, भारत फोर्ज, ग्रासिम इंडस्ट्रीज और टाटा मोटर्स समेत कई प्रमुख कंपनियां अपने तिमाही नतीजे घोषित करेंगी।
निवेशक इन कंपनियों की बिक्री, मुनाफे, मार्जिन और भविष्य के कारोबार को लेकर दिए गए प्रबंधन के संकेतों पर नजर रखेंगे। उम्मीद से बेहतर नतीजे संबंधित शेयरों में तेजी ला सकते हैं, जबकि कमजोर प्रदर्शन से दबाव देखने को मिल सकता है।
एफपीआई निवेश से बाजार को सहारा
इस बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने अगस्त के पहले सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार में 12,921 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया। इससे बाजार में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी का संकेत मिलता है। हालांकि वैश्विक घटनाक्रम और डॉलर की चाल के कारण एफपीआई का रुख बदल भी सकता है।
पिछले सप्ताह बीएसई का सेंसेक्स 404.53 अंक यानी 0.51 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 187.05 अंक यानी 0.76 प्रतिशत मजबूत हुआ। स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के रिसर्च हेड संतोष मीणा के मुताबिक, पिछले सप्ताह नई समापन नीलामी व्यवस्था का लागू होना भी बाजार के प्रमुख आकर्षणों में रहा।
कुल मिलाकर इस सप्ताह शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। निवेशकों की नजर एक तरफ महंगाई के आंकड़ों और कंपनियों के नतीजों पर होगी, वहीं दूसरी तरफ पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर भी बाजार प्रतिक्रिया दे सकता है।
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