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चीनी उत्पादन में जबरदस्त उछाल, पहले महीने में ही 8.45 लाख टन उत्पादन
Rajeshwari Nishad
3 Nov 2026 7:37 PM IST

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बिज़नेस : देश में चीनी के नए पेराई सीजन 2026-27 की शुरुआत शानदार रही है। पिछले सीजन के अंत में आपूर्ति की कमी, बढ़ती कीमतों और बाजार में घबराहट के कारण खरीदारी जैसी समस्याओं के बीच नए सीजन के पहले ही महीने चीनी उत्पादन में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। अक्टूबर 2026 में देशभर की चीनी मिलों ने कुल 8.45 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में केवल एक लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था।
इस बार महाराष्ट्र ने चीनी उत्पादन में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। राज्य की चीनी मिलों ने अकेले 7.20 लाख टन चीनी का उत्पादन किया। उत्पादन में आई इस तेजी से घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है। हालांकि, उत्पादन बढ़ने के बावजूद चीनी की रिकवरी दर में गिरावट चिंता का विषय बनी हुई है।नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (NFCSF) के आंकड़ों के अनुसार, 31 अक्टूबर 2026 तक देशभर में 152 चीनी मिलों ने गन्ने की पेराई शुरू कर दी थी।
पिछले साल के मुकाबले आठ गुना से ज्यादा उत्पादन
चीनी उद्योग के लिए अक्टूबर का महीना काफी महत्वपूर्ण साबित हुआ है। पिछले वर्ष अक्टूबर में देश में लगभग एक लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था।वहीं, इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 8.45 लाख टन पहुंच गया है। यानी सालाना आधार पर उत्पादन आठ गुना से ज्यादा हो गया है।इस वृद्धि का प्रमुख कारण कई राज्यों में गन्ने की पेराई जल्दी शुरू होना माना जा रहा है।पिछले वर्षों में कुछ राज्यों की मिलें नवंबर में पेराई शुरू करती थीं, लेकिन इस बार अक्टूबर से ही बड़ी संख्या में मिलों ने उत्पादन शुरू कर दिया।इससे त्योहारी सीजन के दौरान घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलने की संभावना है।हालांकि, अक्टूबर में रिकॉर्ड उत्पादन का मतलब यह नहीं है कि पूरे सीजन में भी इसी अनुपात में उत्पादन बढ़ेगा। कुल वार्षिक उत्पादन गन्ने की उपलब्धता, मौसम और मिलों की कार्यक्षमता पर निर्भर करेगा।
महाराष्ट्र ने उत्पादन में मारी बाजी
चीनी उत्पादन के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे रहा है।आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर के अंत तक महाराष्ट्र में 123 चीनी मिलों ने पेराई शुरू कर दी थी।इन मिलों ने लगभग 91.14 लाख टन गन्ने की पेराई करके 7.20 लाख टन चीनी का उत्पादन किया।इस तरह राष्ट्रीय स्तर पर हुए कुल उत्पादन में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी लगभग 85 प्रतिशत रही।महाराष्ट्र में गन्ने की पेराई जल्दी शुरू होने का सीधा असर उत्पादन के आंकड़ों पर दिखाई दिया है।राज्य में सहकारी और निजी चीनी मिलों का बड़ा नेटवर्क है, जो देश के कुल चीनी उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देता है।महाराष्ट्र के बाद कर्नाटक और अन्य राज्यों से भी उत्पादन की जानकारी सामने आई है।आगामी सप्ताहों में उत्तर प्रदेश सहित दूसरे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में पेराई तेज होने से राष्ट्रीय उत्पादन में और बढ़ोतरी होने की संभावना है।
105 लाख टन से ज्यादा गन्ने की पेराई
NFCSF के आंकड़ों के अनुसार, देशभर की 152 चीनी मिलों ने अक्टूबर के अंत तक कुल 105.43 लाख टन गन्ने की पेराई की है।इस गन्ने से 8.45 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ।यह आंकड़ा बताता है कि नए सीजन की शुरुआत में ही चीनी उद्योग की गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं।चीनी मिलों के जल्दी चालू होने से किसानों को अपना गन्ना समय पर मिलों तक पहुंचाने का अवसर मिल सकता है।हालांकि, किसानों को वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब गन्ने की खरीद और भुगतान समय पर किया जाएगा।चीनी उद्योग में उत्पादन के साथ किसानों का भुगतान भी महत्वपूर्ण मुद्दा रहता है।इसलिए मिलों की पेराई क्षमता, चीनी की बिक्री और किसानों को भुगतान की स्थिति पर आने वाले महीनों में नजर रहेगी।
उत्पादन बढ़ा, लेकिन रिकवरी दर घटी
अक्टूबर में उत्पादन बढ़ने के बावजूद चीनी उद्योग के लिए एक चिंता सामने आई है।राष्ट्रीय स्तर पर चीनी की औसत रिकवरी दर पिछले वर्ष के 8.44 प्रतिशत से घटकर इस वर्ष 8.01 प्रतिशत रह गई है।रिकवरी दर का मतलब है कि एक निश्चित मात्रा में गन्ने से कितनी चीनी प्राप्त होती है।उदाहरण के लिए, 100 किलोग्राम गन्ने से आठ किलोग्राम चीनी प्राप्त होने पर रिकवरी दर आठ प्रतिशत होगी।रिकवरी दर कम होने से मिलों को समान मात्रा में चीनी बनाने के लिए अधिक गन्ने की जरूरत पड़ सकती है।महाराष्ट्र में अक्टूबर के दौरान औसत रिकवरी दर लगभग 7.90 प्रतिशत दर्ज की गई।विशेषज्ञों के अनुसार, गन्ने की गुणवत्ता, परिपक्वता, मौसम और पेराई का समय रिकवरी दर को प्रभावित कर सकते हैं।इसलिए शुरुआती उत्पादन अधिक होने के बावजूद पूरे सीजन की स्थिति का आकलन अभी जल्दबाजी होगी।
नवंबर के पहले 15 दिनों के लिए 13 लाख टन बिक्री कोटा
घरेलू बाजार में चीनी की आपूर्ति बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने नवंबर 2026 के पहले पखवाड़े के लिए 13 लाख मीट्रिक टन चीनी का बिक्री कोटा निर्धारित किया है।खाद्य मंत्रालय की ओर से 30 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के अनुसार, यह कोटा देश की 587 चीनी मिलों के लिए आवंटित किया गया है।इस व्यवस्था के तहत मिलों को निर्धारित अवधि के दौरान घरेलू बाजार में चीनी बेचने की अनुमति दी जाती है।सरकार का उद्देश्य बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और आपूर्ति में अनावश्यक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना है।इसके अलावा अक्टूबर में पेराई शुरू करने वाली मिलों को उस महीने उत्पादित चीनी की बिक्री के संबंध में भी अतिरिक्त सुविधा दी गई है।
क्या आम ग्राहकों को मिलेगी महंगी चीनी से राहत?
चीनी उत्पादन बढ़ने का सीधा प्रभाव बाजार की आपूर्ति पर पड़ सकता है।अगर मिलों से पर्याप्त मात्रा में चीनी बाजार तक पहुंचती है, तो थोक बाजार में उपलब्धता बेहतर हो सकती है।इससे खुदरा कीमतों पर दबाव कम होने की संभावना बन सकती है।हालांकि, उत्पादन बढ़ने से कीमतों में तत्काल गिरावट आना जरूरी नहीं है।खुदरा कीमतें परिवहन लागत, स्थानीय मांग, उपलब्ध स्टॉक, व्यापारियों की खरीद और सरकारी बिक्री व्यवस्था जैसे कई कारकों से प्रभावित होती हैं।त्योहारी सीजन में मिठाई, बेकरी और खाद्य उत्पाद बनाने वाले उद्योगों में चीनी की मांग बढ़ जाती है।
ऐसे समय में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है।
किसानों और चीनी मिलों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है नया सीजन?चीनी उत्पादन में तेजी गन्ना किसानों और चीनी मिलों, दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।पेराई जल्दी शुरू होने से किसानों को अपनी तैयार फसल बेचने में सुविधा हो सकती है।वहीं, मिलों को उत्पादन और बिक्री के लिए अधिक समय मिल सकता है।इसके साथ ही चीनी उद्योग एथेनॉल उत्पादन और अन्य सह-उत्पादों के माध्यम से भी आर्थिक गतिविधियों में योगदान देता है।हालांकि, पूरे सीजन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि गन्ने की उपलब्धता कितनी रहती है और मिलें कितनी कुशलता से उत्पादन जारी रखती हैं।
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