
Business: नौकरी बदलने वाले लोगों को इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय खास सावधानी रखने की जरूरत होती है। अगर एक ही वित्तीय वर्ष में आपने जॉब स्विच की है, तो पुरानी और नई दोनों कंपनियों से मिले फॉर्म 16 और सैलरी डिटेल्स को सही तरीके से जोड़ना जरूरी होता है। अक्सर लोग दोनों कंपनियों की आय को सही तरह से क्लब नहीं करते या टैक्स डिडक्शन की जानकारी गलत भर देते हैं, जिससे इनकम कम या ज्यादा दिख सकती है और आगे चलकर टैक्स नोटिस मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा कई बार पुरानी कंपनी का TDS और नई कंपनी का TDS अलग-अलग दिखता है, जिसे सही तरीके से क्रॉस चेक करना जरूरी है। अगर यह जानकारी मिसमैच हो जाती है तो रिफंड रुक सकता है या अतिरिक्त टैक्स देना पड़ सकता है। इसलिए ITR भरते समय सभी सैलरी स्लिप, फॉर्म 16 और बैंक स्टेटमेंट को ध्यान से मिलाना चाहिए और जरूरत पड़े तो टैक्स एक्सपर्ट की मदद लेनी चाहिए।
इंकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने का सीजन शुरू हो चुका है और इस बार FY 2025-26 के लिए बड़ी संख्या में नौकरीपेशा लोग रिटर्न फाइल करने की तैयारी कर रहे हैं। खासकर वे कर्मचारी जिन्होंने इस वित्तीय वर्ष में नौकरी बदली है, उनके लिए ITR फाइल करते समय अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। ऐसे लोगों को एक से ज्यादा Form 16 मिलने की संभावना होती है और सही जानकारी नहीं देने पर टैक्स नोटिस या अतिरिक्त टैक्स का सामना करना पड़ सकता है।
अगर आपने साल के बीच में नौकरी बदली है तो यह सामान्य स्थिति है। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी ने अप्रैल से सितंबर तक एक कंपनी में काम किया और उसके बाद दूसरी कंपनी जॉइन की, तो दोनों कंपनियां अपने-अपने कार्यकाल के लिए अलग-अलग Form 16 जारी करती हैं। पुरानी कंपनी की जिम्मेदारी रहती है कि वह कर्मचारी को Form 16 उपलब्ध कराए।
Form 16 एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है जिसमें सैलरी, TDS, छूट और टैक्स कटौती की पूरी जानकारी होती है। ITR फाइल करते समय इसके अलावा Form 26AS, AIS और TIS का मिलान करना भी जरूरी होता है।
अगर किसी को एक से ज्यादा Form 16 मिले हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है। सभी कंपनियों की सैलरी और TDS को जोड़कर एक ही ITR फाइल करना होता है। अलग-अलग रिटर्न भरने की जरूरत नहीं होती।
सबसे बड़ी गलती यह होती है कि कर्मचारी पुरानी नौकरी की सैलरी नई कंपनी को नहीं बताते। ऐसे में नया एम्प्लॉयर केवल वर्तमान सैलरी पर TDS काटता है, जिससे कुल टैक्स कम कट सकता है और बाद में अतिरिक्त टैक्स देना पड़ सकता है। इसके लिए Form 12B के जरिए पुरानी सैलरी की जानकारी नई कंपनी को देना जरूरी होता है।
इसके अलावा सेक्शन 80C, 80D, 80G, HRA और स्टैंडर्ड डिडक्शन जैसी छूटों का दावा एक ही बार किया जाना चाहिए। दो बार लाभ लेने से टैक्स गणना में गड़बड़ी हो सकती है।
अगर पुरानी कंपनी से Form 16 नहीं मिलता है, तो भी सैलरी स्लिप, बैंक स्टेटमेंट, Form 26AS और AIS की मदद से ITR फाइल किया जा सकता है। हालांकि, Form 16 प्राप्त करने के लिए पुराने एम्प्लॉयर से संपर्क करना जरूरी होता है क्योंकि यह उसकी कानूनी जिम्मेदारी है।





