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Moody's Report : जल प्रबंधन खामियों से पानी संकट और दबाव का खतरा

Kavita2
22 Jun 2026 5:18 PM IST
Moodys Report : जल प्रबंधन खामियों से पानी संकट और दबाव का खतरा
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Business बिजनेस: मूडीज़ रेटिंग्स ने अपनी एक ताज़ा रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि भारत में पानी के प्रबंधन की मौजूदा व्यवस्था कई संरचनात्मक कमजोरियों से जूझ रही है, जिससे भविष्य में पानी की कमी बढ़ सकती है और सरकारी खजाने पर लंबे समय तक दबाव बनने का खतरा भी बढ़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में जल प्रबंधन का ढांचा बिखरा हुआ है और इसमें लचीलापन कम है, जिसके कारण पानी के संसाधनों का प्रभावी उपयोग और वितरण चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पानी की कीमतें बहुत अधिक सब्सिडी पर आधारित हैं, जिससे इसके वास्तविक मूल्य का सही संकेत नहीं मिलता। इसके अलावा, विभिन्न सेक्टरों—जैसे घरेलू उपयोग, उद्योग और कृषि—के बीच पानी के बंटवारे में अक्सर देरी होती है, जिससे संसाधनों का सही समय पर और सही तरीके से उपयोग नहीं हो पाता। मूडीज़ का कहना है कि ये सभी कारक मिलकर पानी की कमी की स्थिति को और गंभीर बना सकते हैं और आपूर्ति की कमी सीधे तौर पर सरकारी वित्तीय व्यवस्था पर असर डाल सकती है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पानी के बंटवारे के नियम, जो यह तय करते हैं कि घरों, उद्योगों और कृषि के बीच पानी की प्राथमिकता कैसे तय होगी, उसकी कीमत क्या होगी और वितरण कैसे किया जाएगा, किसी भी पानी-संकटग्रस्त प्रणाली की आर्थिक मजबूती के लिए बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मूडीज़ के अनुसार, ये नियम ही यह तय करते हैं कि पानी की कमी की स्थिति में संकट कितनी तेजी से बढ़कर सरकारी बजट पर दबाव में बदलती है।

इसके अलावा, रिपोर्ट में एक और उभरते हुए दबाव की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है। मूडीज़ ने कहा कि क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विस्तार के कारण डेटा सेंटरों से पानी की मांग तेजी से बढ़ रही है। यह एक नई चुनौती के रूप में सामने आ रहा है, क्योंकि डेटा सेंटर पानी की अधिक खपत करने वाले उद्योगों में शामिल होते हैं। ऐसे में आने वाले समय में सरकारों और यूटिलिटी कंपनियों को इस बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए जल नीति और प्रबंधन रणनीति तैयार करनी होगी।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में जल प्रबंधन प्रणाली में निवेश के रास्ते भी पूरी तरह भरोसेमंद नहीं हैं, जिससे बुनियादी ढांचे के विकास में बाधाएं आती हैं। पानी के वितरण और प्रबंधन में बिखराव, कीमतों में बदलाव की सीमित गुंजाइश और निर्णय लेने में देरी जैसी समस्याएं इस प्रणाली को और कमजोर बनाती हैं।

मूडीज़ ने संकेत दिया है कि यदि इन संरचनात्मक समस्याओं को समय रहते दूर नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में पानी की उपलब्धता, वितरण और मूल्य निर्धारण से जुड़ी चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं। इसका असर न केवल कृषि और उद्योगों पर पड़ेगा, बल्कि सरकार के वित्तीय संसाधनों पर भी दीर्घकालिक दबाव देखने को मिल सकता है।

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