व्यापार
ई-कॉमर्स कारोबारियों के लिए GST रजिस्ट्रेशन में नई व्यवस्था
Ashish verma
9 Oct 2026 9:01 PM IST

x
नई दिल्ली। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए सामान बेचने वाले छोटे कारोबारियों के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जीएसटी परिषद ने ऐसे पात्र विक्रेताओं को दूसरे राज्यों में ई-कॉमर्स ऑपरेटर के गोदाम का पता अपने मुख्य कारोबार स्थल के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति देने की सिफारिश की है। इससे कारोबार विस्तार के लिए हर राज्य में अपना अलग कार्यालय या दुकान स्थापित करने की आवश्यकता घटेगी। हालांकि, परिषद की सिफारिश को तत्काल लागू नियम नहीं माना जाना चाहिए। संबंधित प्रावधान की अधिसूचना और निर्धारित शर्तें महत्वपूर्ण होंगी।
आठ अक्टूबर को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में यह व्यवस्था आगे बढ़ाई गई। परिषद ने केंद्रीय जीएसटी नियमों में नया नियम 14B जोड़ने की सिफारिश की है। इसका उद्देश्य उन छोटे माल विक्रेताओं को सरल पंजीकरण उपलब्ध कराना है, जो ई-कॉमर्स ऑपरेटर के माध्यम से कारोबार करते हैं और संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में उनकी अपनी भौतिक मौजूदगी नहीं है। पात्र मामलों में शर्तों के अधीन सिस्टम के जरिए स्वतः रजिस्ट्रेशन देने का प्रस्ताव है।
इस बदलाव को समझने के लिए एक उदाहरण लिया जा सकता है। कोई छोटा विक्रेता अपने राज्य से ऑनलाइन कारोबार करता है और दूसरे राज्य में प्लेटफॉर्म के गोदाम में माल रखना चाहता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पात्रता पूरी होने पर वह उस गोदाम को वहां अपना मुख्य कारोबार स्थल घोषित कर सकेगा। इस तरह अलग परिसर जुटाने की आवश्यकता कम हो सकती है। यह उदाहरण व्यवस्था का संभावित उपयोग समझाता है; वास्तविक आवेदन की मंजूरी अधिसूचित नियम, प्लेटफॉर्म की व्यवस्था और विक्रेता की पात्रता पर निर्भर करेगी।
नई सुविधा के साथ वित्तीय पात्रता की सीमा भी रखी गई है। परिषद की सिफारिश के अनुसार यह व्यवस्था ऐसे विक्रेताओं के लिए होगी, जो खरीदारों को प्रति महीने 2.5 लाख रुपये से अधिक इनपुट टैक्स क्रेडिट आगे देने का इरादा नहीं रखते। अलग-अलग पंजीकरणों के बीच स्टॉक ट्रांसफर को इस गणना से बाहर रखने की बात कही गई है। यहां 2.5 लाख रुपये का आंकड़ा बिक्री या सालाना टर्नओवर की सीमा नहीं है। यह आगे दिए जाने वाले इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़ी शर्त है।
इसके अलावा विक्रेता की कम से कम एक राज्य में वास्तविक भौतिक मौजूदगी जरूरी होगी। इसलिए “बिना दुकान या ऑफिस के कारोबार” का अर्थ हर प्रकार के कारोबार स्थल और सत्यापन से पूरी तरह छूट नहीं है। राहत मुख्य रूप से दूसरे राज्यों में अपना परिसर स्थापित करने की आवश्यकता से संबंधित है। रिपोर्ट किए गए ढांचे में एक राज्य में प्रति पैन इस प्रकार का एक ही रजिस्ट्रेशन रखने और उसके तहत केवल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से होने वाली आपूर्ति शामिल करने की शर्त है। निर्धारित सीमा पार होने पर सामान्य पंजीकरण व्यवस्था में जाना होगा।
छोटे ऑनलाइन विक्रेताओं के लिए यह सुधार बाजार तक पहुंच बढ़ाने की दिशा में उपयोगी हो सकता है। परिषद के मुताबिक प्लेटफॉर्म से सामान बेचने वाले 90 प्रतिशत से अधिक विक्रेता प्रति महीने 2.5 लाख रुपये से कम क्रेडिट आगे देते हैं। इसलिए पात्रता की इस सीमा के दायरे में बड़ी संख्या में छोटे कारोबारियों के आने की संभावना है। हालांकि, किसी व्यक्तिगत विक्रेता को लाभ मिलने का निर्णय उसके कारोबार के आंकड़ों और अंतिम नियमों के आधार पर होगा। सभी ऑनलाइन कारोबारियों को स्वतः इस सुविधा का पात्र मानना सही नहीं होगा।
बैठक से पहले सामने आए प्रस्ताव में ई-कॉमर्स ऑपरेटर की सहमति और जिम्मेदारी को भी महत्व दिया गया था। इसमें विक्रेताओं का सत्यापित विवरण साझा करने, उनके बारे में जानकारी देने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति नियुक्त करने और विवरण बदलने या विक्रेता हटने पर पोर्टल को सूचना देने जैसी बातें शामिल थीं। इससे स्पष्ट होता है कि सरल पंजीकरण के साथ जानकारी और जवाबदेही की व्यवस्था भी प्रस्ताव का हिस्सा रही है। अंतिम संचालन प्रक्रिया के लिए अधिसूचित प्रावधानों को देखना जरूरी होगा।
जीएसटी रजिस्ट्रेशन के व्यापक सुधारों में आवेदन भरने की प्रक्रिया स्पष्ट करने पर भी जोर दिया गया है। आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी, सवाल-जवाब और ऑनलाइन आवेदन में बेहतर मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं प्रस्तावित हैं। पंजीकरण विवरण में संशोधन स्वीकार करने की प्रक्रिया को भी अधिक स्वचालित बनाने की सिफारिश की गई है। मुख्य कारोबार स्थल से संबंधित बदलावों के लिए अलग प्रावधान रखे गए हैं। इन उपायों का उद्देश्य आवेदन में अस्पष्टता कम करना और विवरण अपडेट करने की प्रक्रिया आसान बनाना है।
ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए दूसरी महत्वपूर्ण सिफारिश इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में अतिरिक्त जमा राशि के रिफंड से जुड़ी है। परिषद ने ऐसे रिफंड को अधिकारी के हस्तक्षेप के बिना सिस्टम से मंजूर करने का प्रस्ताव रखा है। पात्र कारोबारियों के लिए इससे जमा रकम वापस मिलने की प्रक्रिया सरल हो सकती है। पंजीकरण और रिफंड में स्वचालन का उद्देश्य प्रक्रियागत बोझ घटाना है। फिर भी इन सुविधाओं का वास्तविक लाभ उनके लागू होने और संबंधित शर्तें पूरी होने पर ही मिलेगा।
कारोबारियों के लिए फिलहाल मुख्य बात यह है कि हर राज्य में अपना कार्यालय खोलने की जरूरत घटाने वाला ढांचा आगे बढ़ा है। इसे पूरे देश के लिए एक ही जीएसटी नंबर मिलने की घोषणा नहीं समझना चाहिए। प्रस्ताव दूसरे राज्यों में पात्र विक्रेताओं के पंजीकरण को आसान बनाने से संबंधित है। कारोबार विस्तार की योजना बनाते समय विक्रेता को अपने माल, गोदाम की व्यवस्था, प्लेटफॉर्म की सहमति और पंजीकरण की पात्रता देखनी होगी। अधिसूचना जारी होने के बाद आवेदन प्रक्रिया और लागू शर्तों की स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
Next Story





