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IT और फाइनेंशियल शेयरों में कमजोरी से निफ्टी की तेजी पर ब्रेक

Tara Tandi
22 Sept 2026 4:45 PM IST
IT और फाइनेंशियल शेयरों में कमजोरी से निफ्टी की तेजी पर ब्रेक
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मुंबई: मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार के मुख्य इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। Nifty की लगातार चार दिनों की बढ़त का सिलसिला टूट गया, क्योंकि IT और फाइनेंशियल शेयरों में बिकवाली का दबाव, मेटल, मीडिया और रियल्टी शेयरों में हुई बढ़त पर भारी पड़ा
Sensex 329.91 अंक या 0.44% गिरकर 74,529.08 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 85.30 अंक या 0.36% गिरकर 23,329.00 पर बंद हुआ। इस गिरावट के साथ Nifty की चार दिन की बढ़त का सिलसिला खत्म हो गया, क्योंकि निवेशकों ने बाजार के बड़े सेक्टरों में मुनाफावसूली की।
Nifty के टेक्निकल आउटलुक पर बात करते हुए जानकारों ने कहा कि तुरंत रेजिस्टेंस 23,400–23,500 के स्तर पर बना हुआ है। बाजार पर नज़र रखने वालों ने कहा, "नीचे की तरफ, 23,300 तुरंत सपोर्ट का काम करेगा, और उसके बाद 23,200 का स्तर होगा। अगर Nifty 23,300 के नीचे मजबूती से टूटता है, तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और इंडेक्स 23,200 के ज़ोन तक जा सकता है।"
IT और फाइनेंशियल सेक्टर में सबसे ज़्यादा बिकवाली का दबाव दिखा, जिससे पूरे बाजार का सेंटिमेंट प्रभावित हुआ। Nifty इंडेक्स में सबसे ज़्यादा गिरने वाले शेयरों में Trent, Tata Consumer Products और Tata Consultancy Services (TCS) शामिल थे; ये सभी शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।
बाजार के बाकी हिस्सों में भी कमजोरी दिखी, हालांकि गिरावट सीमित रही। Nifty MidCap इंडेक्स 0.08% नीचे बंद हुआ, जबकि Nifty SmallCap इंडेक्स में 0.23% की गिरावट आई।
सेक्टर के हिसाब से देखें तो Nifty IT इंडेक्स दिन का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला इंडेक्स रहा; इसके साथ ही Nifty PSU Bank और Nifty Pharma इंडेक्स में भी गिरावट देखी गई। इन सेक्टरों में हुई गिरावट ने बाजार के दूसरे हिस्सों में हुई बढ़त के असर को खत्म कर दिया।
वहीं, मीडिया, रियल एस्टेट और मेटल शेयरों में खरीदारी का रुझान दिखा। Nifty Media, Nifty Realty और Nifty Metal इंडेक्स सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले सेक्टर इंडेक्स रहे, जिससे बाजार की गिरावट को कुछ हद तक रोकने में मदद मिली। जानकारों का कहना है कि दिन भर बाजार में कमजोरी के बावजूद, बाजार के भागीदार सेक्टर-खास मौकों पर नजर बनाए हुए थे। निवेशक IT और फाइनेंशियल शेयरों में अपना निवेश कम करते हुए बाजार के चुनिंदा हिस्सों में फंड लगा रहे थे।
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