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पेट्रोल-डीजल महंगे, कच्चे तेल के बढ़ते दाम का असर

Ratna Netam
3 Jun 2026 5:08 PM IST
पेट्रोल-डीजल महंगे, कच्चे तेल के बढ़ते दाम का असर
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Business बिजनेस : पश्चिम एशिया में संकट और महंगे कच्चे तेल की वजह से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी है। ब्रेंट क्रूड अब एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के करीब पहुंच रहा है, जिससे सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है।

जानकारी के अनुसार, 15 मई से अब तक सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें चार बार बढ़ाई हैं। इसके परिणामस्वरूप पेट्रोल और डीजल की कीमतें करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर तक महंगी हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एक बैरल कच्चे तेल में 10 डॉलर की बढ़ोतरी कंपनियों को लगभग 6 रुपये प्रति लीटर का अतिरिक्त नुकसान पहुंचाती है।

पश्चिम एशिया के तनाव और तेल आपूर्ति में रुकावट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने के संकेत ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव बनाया है। भारतीय तेल कंपनियां, जो सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों के अंतर्गत आती हैं, बढ़ते तेल भाव और विदेशी मुद्रा दरों का असर सीधे तौर पर खुदरा कीमतों पर डाल रही हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव निवेशकों और आम उपभोक्ताओं दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण है। महंगे ईंधन का असर न केवल वाहन चालकों पर पड़ता है बल्कि ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी करता है।

सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों को अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और विदेशी मुद्रा दर के अनुसार अपडेट किया जाता है। इस वजह से कीमतों में बढ़ोतरी या कमी समय-समय पर होती रहती है। इसके अलावा, कच्चे तेल के दाम में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले बदलावों का असर घरेलू बाजार पर सीधे पड़ता है।

उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि तेल कंपनियों ने पहले की तुलना में कीमतों में बदलाव को धीरे-धीरे लागू किया है। बावजूद इसके, लगातार बढ़ती कीमतें आम आदमी की जेब पर असर डाल रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता तब तक नहीं आएगी जब तक वैश्विक तेल बाजार और राजनीतिक तनावों में सुधार नहीं होता।

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