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महामारी या आपदा में घट सकती है PF कटौती, जानिए आपकी सैलरी और रिटायरमेंट पर कितना पड़ेगा असर
jantaserishta.com
16 Sept 2026 1:15 PM IST

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नई दिल्ली: क्या किसी बड़ी महामारी या राष्ट्रीय आपदा के दौरान आपकी हर महीने कटने वाली PF की रकम अचानक कम हो सकती है? केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि यानी EPF स्कीम-2026 में एक ऐसा आपातकालीन प्रावधान जोड़ा है, जिसके तहत असाधारण परिस्थितियों में कर्मचारियों और कंपनियों के PF योगदान को सीमित अवधि के लिए घटाया या टाला जा सकता है। इसका सीधा असर आपकी टेक-होम सैलरी और लंबे समय में रिटायरमेंट फंड पर पड़ सकता है।
इमरजेंसी में तीन महीने तक बदल सकता है योगदान
नए प्रावधान के मुताबिक, अगर देश में महामारी या राष्ट्रीय आपदा जैसी स्थिति पैदा होती है तो केंद्र सरकार कर्मचारियों और कंपनियों के PF योगदान को एक बार में अधिकतम तीन महीने के लिए कम या स्थगित कर सकती है। यह व्यवस्था पूरे देश या किसी खास राज्य अथवा क्षेत्र में लागू की जा सकती है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सामान्य दिनों में PF कटौती अपने आप कम हो जाएगी। जब तक सरकार किसी विशेष आपात स्थिति में अधिसूचना जारी नहीं करती, तब तक सामान्य योगदान व्यवस्था जारी रहेगी। सामान्य स्थिति में कर्मचारी और कंपनी का निर्धारित PF योगदान 12% है, जबकि कुछ अधिसूचित संस्थानों में यह दर 10% हो सकती है। कर्मचारी या कंपनी अपनी इच्छा से इस अनिवार्य योगदान को कम नहीं कर सकते।
PF कम हुआ तो हाथ में ज्यादा आएगी सैलरी
अगर किसी आपातकालीन आदेश के तहत कर्मचारी का PF योगदान घटाया जाता है, तो उसकी हर महीने मिलने वाली इन-हैंड सैलरी बढ़ सकती है। मसलन, अगर अभी किसी कर्मचारी के वेतन से हर महीने 6,000 रुपये PF में जाते हैं और अस्थायी रूप से यह रकम 5,000 रुपये कर दी जाती है, तो उसके हाथ में हर महीने 1,000 रुपये ज्यादा आएंगे।
तीन महीने तक यही व्यवस्था रहने पर कर्मचारी को कुल 3,000 रुपये अतिरिक्त नकद मिल सकते हैं। यानी तत्काल तौर पर उसे खर्च करने या जरूरी जरूरतों के लिए अधिक रकम उपलब्ध होगी।
लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है। PF खाते में कम पैसा जमा होने का मतलब है कि उस अवधि में रिटायरमेंट के लिए जमा होने वाली रकम घट जाएगी। कम मूलधन पर भविष्य में मिलने वाला चक्रवृद्धि ब्याज भी कम हो सकता है। इसलिए तत्काल कैश राहत के साथ लंबे समय में रिटायरमेंट फंड पर कुछ असर पड़ सकता है।
योगदान घटाना और टालना अलग-अलग है
नए नियम में योगदान कम करने और भुगतान को स्थगित करने के बीच अंतर है। अगर सरकार योगदान की दर घटाती है, तो तय अवधि के लिए कम रकम PF में जमा होगी और उस कमी को बाद में भरना जरूरी नहीं होगा।
दूसरी स्थिति में योगदान को कुछ समय के लिए टाला जा सकता है। इसमें संकट के दौरान भुगतान रोक दिया जाता है, लेकिन बाद में बकाया रकम PF खाते में जमा करनी पड़ती है।
इस शक्ति का इस्तेमाल सामान्य परिस्थितियों में नहीं किया जा सकता। इसका उद्देश्य महामारी, एंडेमिक या राष्ट्रीय आपदा जैसी असाधारण स्थिति में कर्मचारियों और कंपनियों को सीमित अवधि के लिए वित्तीय राहत देना है।
कोविड के समय भी घटाई गई थी PF दर
ऐसी व्यवस्था की जरूरत पहले भी सामने आ चुकी है। कोविड-19 महामारी के दौरान मई, जून और जुलाई 2020 के लिए PF योगदान की दर 12% से घटाकर 10% की गई थी। इसका उद्देश्य उस समय कर्मचारियों और कंपनियों पर वित्तीय दबाव कम करना और लोगों के हाथ में अधिक नकदी उपलब्ध कराना था।
अब EPF स्कीम-2026 में आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए इस तरह की शक्ति को स्पष्ट प्रावधान के रूप में शामिल किया गया है।
वहीं, VPF यानी वॉलेंटरी प्रोविडेंट फंड का नियम अलग है। कर्मचारी अपनी इच्छा से अनिवार्य PF योगदान से ज्यादा रकम VPF के रूप में जमा कर सकता है। इस अतिरिक्त योगदान पर कंपनी के लिए बराबर रकम देना जरूरी नहीं होता। आपातकालीन कटौती का प्रावधान मुख्य रूप से वैधानिक अनिवार्य PF योगदान से जुड़ा है और VPF पर इसका असर सरकारी आदेश के मुताबिक तय होगा।
यानी नए नियम का असर तभी सामने आएगा, जब सरकार किसी वास्तविक महामारी या राष्ट्रीय आपदा के दौरान इसके इस्तेमाल को लेकर अलग से आदेश जारी करेगी। सामान्य दिनों में कर्मचारियों की नियमित PF कटौती पहले की निर्धारित व्यवस्था के अनुसार ही चलती रहेगी।
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