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रिपोर्ट का दावा: 2027 में 9.1% की रफ्तार से बढ़ेगी भारतीयों की सैलरी

Tara Tandi
14 Oct 2026 3:25 PM IST
रिपोर्ट का दावा: 2027 में 9.1% की रफ्तार से बढ़ेगी भारतीयों की सैलरी
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नई दिल्ली: बुधवार को आई एक रिपोर्ट के अनुसार, 2027 में भारत में सैलरी में 9.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। कंपनियां ग्रोथ की महत्वाकांक्षाओं, वर्कफोर्स की बढ़ती लागत और कुशल टैलेंट के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अपने सैलरी बजट को स्थिर बनाए रखेंगी।
यह अनुमान ग्लोबल प्रोफेशनल सर्विस फर्म 'एओन' (Aon) के 'एनुअल सैलरी इंक्रीज एंड टर्नओवर सर्वे फॉर इंडिया 2026-27' पर आधारित है। यह 2026 में दर्ज की गई 9 प्रतिशत की वास्तविक औसत सैलरी बढ़ोतरी से बहुत अलग नहीं है।
इस सर्वे में 45 इंडस्ट्रीज़ की 1,200 से ज़्यादा कंपनियों के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिससे यह देश के सबसे बड़े सैलरी और कंपनसेशन स्टडीज़ में से एक बन गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, मज़बूत घरेलू खपत, लगातार निवेश और एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी से बिज़नेस कॉन्फिडेंस बना हुआ है। इससे कंपनियां लागत पर नियंत्रण रखते हुए टैलेंट में निवेश कर पा रही हैं।
सेक्टर के हिसाब से देखें तो, 2027 में नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) में सैलरी में सबसे ज़्यादा 10.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। एनर्जी सेक्टर में सैलरी में 9.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है, इसके बाद रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में 9.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी की संभावना है।
एओन में टैलेंट सॉल्यूशंस इंडिया के पार्टनर और रिवार्ड्स कंसल्टिंग लीडर, रूपंक चौधरी ने कहा कि कंपनियां सैलरी और कंपनसेशन के मामले में अब ज़्यादा टारगेटेड अप्रोच अपना रही हैं।
चौधरी ने कहा, "मज़बूत घरेलू खपत, लगातार निवेश और एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी से बिज़नेस कॉन्फिडेंस बना हुआ है, जिससे कंपनियां लागत पर नियंत्रण रखते हुए टैलेंट में निवेश कर पा रही हैं।"
उन्होंने कहा, "स्थिर सैलरी बजट की वजह से सैलरी देने के मामले में ज़्यादा टारगेटेड अप्रोच अपनाना संभव हो पा रहा है। नॉन-मेरिट एडजस्टमेंट में मामूली बढ़ोतरी, खासकर मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी सेक्टर में, मार्केट अलाइनमेंट, दुर्लभ स्किल्स और अहम टैलेंट पर ज़्यादा फोकस को दिखाती है। कंपनियां अब सिर्फ़ इस बात पर ध्यान नहीं दे रही हैं कि वे कितना खर्च कर रही हैं, बल्कि इस बात पर भी ध्यान दे रही हैं कि उस निवेश से वर्कफोर्स और बिज़नेस को सबसे ज़्यादा वैल्यू कैसे मिल सकती है।"
रिपोर्ट में टैलेंट को बनाए रखने (रिटेंशन) में आ रही बढ़ती चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला गया है। कुल मिलाकर, कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर (एट्रिशन रेट) 2024 में 17.1% और 2025 में 16.2% से बढ़कर 2026 में 18% हो गई।
साथ ही, कंपनियाँ तेज़ी से अपने कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शामिल कर रही हैं। AI प्रोडक्टिविटी टूल्स का इस्तेमाल 2026 में बढ़कर 56% हो गया, जो एक साल पहले 46.1% था; सर्वे में शामिल सभी प्रमुख जॉब कैटेगरी में इनका इस्तेमाल बढ़ा है।
Aon में टैलेंट सॉल्यूशंस इंडिया के एसोसिएट पार्टनर अमित कुमार ओटवानी ने कहा कि सिर्फ़ नियमों का पालन करना ही काफ़ी नहीं होगा; एम्प्लॉयर्स को कर्मचारियों के साथ बेहतर बातचीत सुनिश्चित करते हुए 'वेज कोड' (Wage Code) के तहत वर्कफोर्स और लागत पर पड़ने वाले व्यापक असर का भी आकलन करना होगा।
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