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सेंसेक्स ने लगाई लंबी छलांग, 1000 अंकों की तेजी से बाजार में जोश

Rajeshwari Nishad
3 Nov 2026 6:53 PM IST
सेंसेक्स ने लगाई लंबी छलांग, 1000 अंकों की तेजी से बाजार में जोश
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बिज़नेस : भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। घरेलू शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार खरीदारी हुई। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,225.07 अंक यानी 1.62 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,917.85 पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला निफ्टी 370.05 अंक यानी 1.58 प्रतिशत उछलकर 23,810.85 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी दर्ज की गई। इस दौरान निवेशकों की संपत्ति के मूल्य में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। बेहतर तिमाही नतीजे, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और टैक्स में संभावित बदलाव की उम्मीद ने बाजार को मजबूती दी।
मंगलवार को शेयर बाजार की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ हुई थी। सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 75,692.78 से बढ़कर 76,288.65 पर खुला। इसी तरह निफ्टी भी बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया।
दिन चढ़ने के साथ खरीदारी तेज होती गई और दोनों प्रमुख सूचकांकों ने एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त हासिल कर ली। कारोबार के दौरान बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, एफएमसीजी, रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली।
सेंसेक्स में 1200 अंकों से ज्यादा की तेजी
शेयर बाजार में मंगलवार की तेजी ने निवेशकों का उत्साह बढ़ा दिया। सेंसेक्स ने कारोबार के दौरान 76,000 का स्तर पार किया और अंत में 76,917.85 पर बंद हुआ।वहीं, निफ्टी ने 23,800 के महत्वपूर्ण स्तर को पार करते हुए 23,810.85 पर कारोबार समाप्त किया।इस तेजी के कारण बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण लगभग चार लाख करोड़ रुपये बढ़कर करीब 486 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।यह बढ़ोतरी निवेशकों की कुल संपत्ति के बाजार मूल्य में बदलाव को दर्शाती है। इसका अर्थ यह नहीं है कि इतनी राशि वास्तविक नकदी के रूप में निवेशकों के खातों में आ गई है।
पहली वजह: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
भारतीय शेयर बाजार में तेजी की सबसे महत्वपूर्ण वजहों में से एक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी रही।पिछले कारोबारी सत्र में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब सात प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। इसके बाद मंगलवार को कीमतें लगभग 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहीं।भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने से देश के आयात खर्च और महंगाई को लेकर चिंताएं कम हो सकती हैं।कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सकारात्मक असर एविएशन, पेंट, केमिकल और तेल का अधिक इस्तेमाल करने वाले अन्य उद्योगों पर पड़ सकता है।हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण तेल की कीमतों में आगे उतार-चढ़ाव की आशंका बनी हुई है।
दूसरी वजह: विदेशी निवेशकों की वापसी
शेयर बाजार को विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से भी समर्थन मिला है।सोमवार, 2 नवंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में लगभग 3,114.68 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी।इससे पहले विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई थी।अब विदेशी निवेशकों की खरीदारी लौटने से बाजार में सकारात्मक माहौल बन रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी जारी रहने की स्थिति में प्रमुख सूचकांकों को
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समर्थन मिल सकता है। हालांकि, निवेश का यह प्रवाह वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की गतिविधियों पर निर्भर करता है।
तीसरी वजह: कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजे
भारतीय शेयर बाजार में तेजी के पीछे कंपनियों के सितंबर तिमाही के बेहतर वित्तीय नतीजों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कई बड़ी कंपनियों ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।एफएमसीजी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी मैरिको के तिमाही नतीजों को बाजार ने सकारात्मक रूप से लिया। कंपनी के मुनाफे को बेहतर मांग और कच्चे माल की लागत में राहत से समर्थन मिला।इसी तरह अन्य बड़ी कंपनियों के मजबूत प्रदर्शन ने भी बाजार में खरीदारी को प्रोत्साहित किया।विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों की आय और मुनाफे में सुधार शेयर बाजार की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण आधार होता है।
हालांकि, सभी कंपनियों के प्रदर्शन में समान तेजी नहीं रही और कुछ शेयरों में बिकवाली भी देखने को मिली।
चौथी वजह: LTCG टैक्स में बदलाव की उम्मीद
शेयर बाजार में मंगलवार की तेजी के पीछे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन यानी LTCG टैक्स से संबंधित संभावित बदलाव की चर्चा भी रही।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से विदेशी निवेशकों की मांग पर टैक्स संरचना की समीक्षा करने पर विचार किए जाने की बात सामने आने के बाद बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी गई।विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भविष्य में पूंजीगत लाभ पर कर व्यवस्था में निवेशकों के अनुकूल बदलाव होते हैं, तो इससे विदेशी निवेश आकर्षित करने में मदद मिल सकती है।हालांकि, फिलहाल टैक्स दरों में किसी बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।इसलिए बाजार की मौजूदा प्रतिक्रिया को संभावित नीतिगत बदलाव से जुड़ी उम्मीद के रूप में देखा जाना चाहिए।
पांचवीं वजह: रुपये में मजबूती और शॉर्ट कवरिंग
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई मजबूती ने भी निवेशकों की धारणा को सहारा दिया।मंगलवार को रुपया डॉलर के मुकाबले पिछले बंद स्तर से कुछ मजबूत दिखाई दिया। विदेशी निवेशकों की खरीदारी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी को रुपये के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।इसके अलावा बाजार में शॉर्ट कवरिंग भी तेजी की एक वजह रही।शॉर्ट कवरिंग उस स्थिति को कहा जाता है, जब शेयरों की कीमत गिरने की उम्मीद में सौदे करने वाले कारोबारी अपनी पोजीशन बंद करने के लिए खरीदारी करते हैं।ऐसी खरीदारी से बाजार में पहले से मौजूद तेजी और मजबूत हो सकती है।
इन शेयरों में दिखी शानदार खरीदारी
मंगलवार के कारोबार में एचडीएफसी बैंक और इंडिगो के शेयरों में लगभग तीन प्रतिशत की तेजी देखने को मिली।इसके अलावा अल्ट्राटेक सीमेंट, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व और इंफोसिस जैसे शेयरों में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई।एफएमसीजी और रियल एस्टेट सेक्टर के शेयरों ने बाजार की तेजी में महत्वपूर्ण योगदान दिया।हालांकि, रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में गिरावट देखने को मिली। इससे पहले सोमवार को कंपनी का शेयर लगभग 12 प्रतिशत उछला था।इससे स्पष्ट है कि प्रमुख सूचकांकों में जबरदस्त तेजी के बावजूद सभी शेयरों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा।
लगातार चौथे दिन बाजार में तेजी
भारतीय शेयर बाजार में पिछले चार कारोबारी सत्रों से तेजी का रुख बना हुआ है।रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लगभग पांच प्रतिशत बढ़े हैं और दो महीने के उच्चतम बंद स्तर पर पहुंचे हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, बेहतर कॉर्पोरेट नतीजे, विदेशी निवेशकों की वापसी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों की धारणा मजबूत हुई है।वहीं, वैश्विक स्तर पर अमेरिका के मध्यावधि चुनाव और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर भी बाजार की नजर बनी हुई है।
आगे कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करेगी।इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की खरीदारी, कंपनियों के तिमाही नतीजे और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम शामिल हैंअमेरिका के मध्यावधि चुनावों के नतीजों का असर भी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों पर पड़ सकता है।हालांकि, लगातार तेजी के बाद बाजार में मुनाफावसूली की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल मंगलवार की जोरदार खरीदारी से भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल बना है। सेंसेक्स का 1,225 अंक और निफ्टी का 370 अंक चढ़ना निवेशकों के भरोसे में सुधार का संकेत देता है।आने वाले कारोबारी सत्रों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है या नहीं और वैश्विक परिस्थितियां भारतीय बाजार को कितना समर्थन देती हैं।
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