शेयर बाजार में भूचाल, निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये डूबे

मुंबई। मध्य पूर्व में जारी तनाव और संघर्ष का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार लगातार चौथे सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में करीब आधा प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 363.66 अंक यानी 0.47 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,391.39 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का प्रमुख सूचकांक निफ्टी-50 भी 126.65 अंक यानी 0.53 प्रतिशत टूटकर 23,869.60 अंक के स्तर पर पहुंच गया।
दिन की शुरुआत भी बाजार के लिए कमजोर रही। सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 76,755.05 अंक के मुकाबले 0.31 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,515.10 अंक पर खुला। कारोबार के दौरान बिकवाली का दबाव बढ़ने से सेंसेक्स एक समय 0.78 प्रतिशत तक गिरकर 76,151.98 अंक के इंट्रा-डे निचले स्तर तक पहुंच गया।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसी चिंता के कारण निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया और बाजार में बिकवाली देखने को मिली।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर उन कंपनियों पर पड़ सकता है, जिनका खर्च ईंधन पर निर्भर करता है। इसके अलावा महंगे तेल से महंगाई बढ़ने की संभावना भी रहती है, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित होती है।
बाजार में गिरावट के पीछे वैश्विक संकेतों का भी असर रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के चलते निवेशकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी है। विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर भी बाजार की नजर बनी हुई है।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय बाजार की लंबी अवधि की स्थिति मजबूत बनी हुई है। घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती, कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन और निवेशकों की सकारात्मक उम्मीदों के कारण बाजार में आगे सुधार की संभावना बनी हुई है। लेकिन फिलहाल वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
गुरुवार के कारोबार में निवेशकों ने ऊर्जा, बैंकिंग और अन्य प्रमुख सेक्टरों में सतर्कता दिखाई। बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहने की संभावना है, क्योंकि आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की स्थिति, अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर निवेशकों की नजर रहेगी।
शेयर बाजार विशेषज्ञों ने निवेशकों को सलाह दी है कि मौजूदा अस्थिर माहौल में जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें और निवेश करते समय कंपनियों के मूलभूत प्रदर्शन पर ध्यान दें। फिलहाल बाजार पर वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों का दबाव बना हुआ है।





