
Business व्यापार : दिग्गज गोल्ड रिफाइनर और ज्वेलरी एक्सपोर्ट कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स (Rajesh Exports) एक बार फिर चर्चा में है। कंपनी और इसके प्रमोटर्स पर लगे फंड हेरफेर (Fund Diversion) के आरोपों को लेकर बाजार में हलचल देखने को मिल रही है। इस बीच कंपनी के फाउंडर और चेयरमैन राजेश मेहता ने सामने आकर इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
मंगलवार को समाचार एजेंसी PTI से बातचीत के दौरान राजेश मेहता ने स्पष्ट रूप से कहा कि कंपनी में किसी भी तरह की फंड हेराफेरी नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि बाजार नियामक सेबी (SEBI) की ओर से केवल कुछ टिप्पणियां की गई हैं, लेकिन इन टिप्पणियों को गलत तरीके से समझा जा रहा है। उनके अनुसार, कंपनी की वित्तीय स्थिति और लेनदेन पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुसार हैं।
राजेश मेहता ने यह भी दावा किया कि सेबी ने कंपनी की ‘अकाउंटिंग एंट्रीज’ को शायद सही तरीके से नहीं समझा है, जिसके कारण गलतफहमियां पैदा हुई हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि कंपनी के सभी वित्तीय रिकॉर्ड और लेनदेन पूरी तरह वैध हैं और उनमें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि राजेश एक्सपोर्ट्स लंबे समय से देश और विदेश में एक प्रतिष्ठित ज्वेलरी एक्सपोर्ट कंपनी के रूप में काम कर रही है और कंपनी की साख पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, कंपनी का बिजनेस मॉडल और वित्तीय प्रबंधन मजबूत आधार पर काम करता है।
इस पूरे मामले को लेकर बाजार में निवेशकों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। कुछ निवेशक जहां इस खबर को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं, वहीं कंपनी प्रबंधन के बयान के बाद कई लोगों ने भरोसा जताया है कि स्थिति जल्द स्पष्ट हो जाएगी। शेयर बाजार में भी इस खबर का असर देखने को मिला है और कंपनी के स्टॉक पर नजरें बनी हुई हैं।
राजेश मेहता ने बातचीत में यह भी कहा कि उन्हें सेबी पर पूरा भरोसा है और जांच प्रक्रिया के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि कंपनी पूरी तरह सहयोग कर रही है और सभी जरूरी दस्तावेज नियामक संस्थाओं को उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में जब तक आधिकारिक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होता। फिलहाल बाजार की नजर सेबी की आगे की कार्रवाई और कंपनी की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।
राजेश एक्सपोर्ट्स भारत की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनिंग और ज्वेलरी एक्सपोर्ट कंपनियों में से एक मानी जाती है। ऐसे में इस तरह के आरोप और स्पष्टीकरण कंपनी की साख और निवेशकों के भरोसे के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, राजेश मेहता के इस बयान ने फंड हेराफेरी के आरोपों पर कंपनी का पक्ष साफ किया है। अब आगे की स्थिति पूरी तरह से नियामक जांच और उसके निष्कर्ष पर निर्भर करेगी, जिस पर निवेशकों और बाजार की नजर बनी हुई है।





