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बिजनेस : म्यूचुअल फंड में लंबी अवधि तक अनुशासन के साथ निवेश करने वालों के लिए एक बार फिर **कंपाउंडिंग की ताकत** सामने आई है। एक मिडकैप म्यूचुअल फंड ने अपने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस फंड में अगर किसी निवेशक ने शुरुआत से हर महीने **10,000 रुपये की SIP** की होती तो उसका निवेश आज बढ़कर करीब **2.56 करोड़ रुपये** तक पहुंच गया होता।
यह उदाहरण दिखाता है कि बाजार में लंबी अवधि तक बने रहने और नियमित निवेश करने से छोटी रकम भी समय के साथ बड़ा फंड तैयार कर सकती है। हालांकि, म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होते हैं और भविष्य का रिटर्न निश्चित नहीं होता।
HSBC Midcap Fund ने दिया शानदार रिटर्न
जिस फंड ने यह प्रदर्शन किया है वह **HSBC Midcap Fund** है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2004 में शुरुआत के बाद से इस फंड ने लंबी अवधि में निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है।
अगर किसी निवेशक ने फंड की शुरुआत से हर महीने 10 हजार रुपये की SIP जारी रखी होती तो उसकी कुल निवेश राशि के मुकाबले तैयार हुआ फंड कई गुना बढ़ गया होता।
मिडकैप फंड मुख्य रूप से मध्यम आकार की कंपनियों में निवेश करते हैं। इनमें बड़ी कंपनियों की तुलना में ज्यादा ग्रोथ की संभावना हो सकती है, लेकिन जोखिम भी अधिक रहता है।
SIP की ताकत ने बनाया बड़ा फंड
SIP यानी Systematic Investment Plan में निवेशक हर महीने एक तय राशि म्यूचुअल फंड में लगाता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि निवेशक बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान भी लगातार निवेश करता रहता है।
लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है। यानी निवेश पर मिलने वाला रिटर्न आगे चलकर खुद अतिरिक्त रिटर्न कमाने लगता है।
यही वजह है कि लंबे समय तक जारी रहने वाली SIP बड़ी संपत्ति बनाने में मदद कर सकती है।
10 हजार रुपये महीने का निवेश कैसे बना करोड़ों का फंड?
मान लीजिए किसी निवेशक ने हर महीने 10,000 रुपये निवेश किए। सालभर में उसका निवेश 1.20 लाख रुपये होगा। कई वर्षों तक लगातार निवेश करने पर मूल रकम बढ़ती जाती है और बाजार से मिलने वाला रिटर्न भी उसमें जुड़ता रहता है।
इसी प्रक्रिया को चक्रवृद्धि यानी कंपाउंडिंग कहा जाता है। हालांकि हर फंड में ऐसा प्रदर्शन नहीं होता और रिटर्न बाजार की स्थिति पर निर्भर करता है।
मिडकैप फंड में क्यों बढ़ी दिलचस्पी?
मिडकैप कंपनियां अक्सर तेजी से बढ़ने वाले कारोबारों का प्रतिनिधित्व करती हैं। इनमें भविष्य में बड़ी कंपनियां बनने की क्षमता हो सकती है।
यही कारण है कि कई निवेशक लंबी अवधि के लिए मिडकैप फंड को अपने पोर्टफोलियो में शामिल करते हैं। लेकिन इन फंडों में बाजार गिरावट के समय ज्यादा उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है।
तीन साल में भी दिखा मजबूत प्रदर्शन
रिपोर्ट के अनुसार, HSBC Midcap Fund ने हाल के वर्षों में भी अच्छा प्रदर्शन किया है। पिछले तीन साल की अवधि में इस फंड ने मिडकैप कैटेगरी में मजबूत रिटर्न दिया और इसका CAGR करीब 24 प्रतिशत से ज्यादा रहा।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में रिटर्न बाजार की स्थिति और कंपनियों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।
क्या हर SIP से मिलेगा इतना रिटर्न?
यह सबसे बड़ा सवाल है। म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोगों को यह समझना जरूरी है कि हर फंड का प्रदर्शन अलग होता है।
किसी एक फंड का पुराना प्रदर्शन देखकर यह मान लेना सही नहीं है कि भविष्य में भी वही रिटर्न मिलेगा। निवेश से पहले फंड की कैटेगरी, जोखिम, खर्च और लंबी अवधि के प्रदर्शन को देखना जरूरी होता है।
लंबी अवधि में धैर्य जरूरी
म्यूचुअल फंड विशेषज्ञ अक्सर सलाह देते हैं कि इक्विटी फंड में निवेश करते समय लंबी अवधि का नजरिया रखना चाहिए।
बाजार में गिरावट आने पर घबराकर निवेश बंद करने के बजाय अपनी वित्तीय योजना के अनुसार निवेश जारी रखना ज्यादा बेहतर रणनीति हो सकती है। कई विश्लेषणों में भी सामने आया है कि लंबे समय तक SIP जारी रखने से नुकसान की संभावना कम हो सकती है।
निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले इन बातों का ध्यान रखना चाहिए—
* अपने लक्ष्य के अनुसार फंड चुनें
* जोखिम क्षमता को समझें
* केवल पुराने रिटर्न देखकर निवेश न करें
* लंबे समय तक निवेश बनाए रखने की कोशिश करें
* समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करें
करोड़ों का फंड बनाने का फॉर्मूला
बड़े फंड बनाने के लिए केवल ज्यादा पैसा लगाना जरूरी नहीं होता। नियमित निवेश, समय और कंपाउंडिंग तीनों मिलकर बड़ा अंतर पैदा कर सकते हैं।
यही वजह है कि आज बड़ी संख्या में लोग SIP को लंबी अवधि की संपत्ति बनाने के विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
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