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RBI ने मार्केट रिस्क कैपिटल नियमों का अंतिम ढांचा जारी किया

Ratna Netam
21 Sept 2026 8:08 PM IST
RBI ने मार्केट रिस्क कैपिटल नियमों का अंतिम ढांचा जारी किया
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मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कमर्शियल बैंकों के लिए मार्केट रिस्क से जुड़ी न्यूनतम पूंजी जरूरतों को लेकर नए अंतिम निर्देश जारी कर दिए हैं। इन नए नियमों के तहत बैंकों को बदले हुए प्रावधानों को लागू करने के लिए **1 अप्रैल 2027** तक का समय दिया गया है।RBI का कहना है कि नए निर्देशों का उद्देश्य भारतीय बैंकिंग नियमों को संशोधित **बेसल III मानकों (Basel III Standards)** के अनुरूप बनाना है। साथ ही, नियमों को लागू करने में बैंकों को पर्याप्त लचीलापन और तैयारी का समय भी उपलब्ध कराया गया है।
RBI ने जारी किए नए निर्देश
भारतीय रिजर्व बैंक ने सोमवार को **‘रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (कमर्शियल बैंक - मार्केट रिस्क के लिए न्यूनतम पूंजी आवश्यकताएं) निर्देश, 2026’** जारी किए।ये अंतिम निर्देश फरवरी 2023 में जारी किए गए ड्राफ्ट गाइडलाइंस पर मिले सुझावों और फीडबैक की समीक्षा के बाद तैयार किए गए हैं।केंद्रीय बैंक ने कहा कि अंतिम नियमों में मिले सुझावों को ध्यान में रखते हुए ऐसा ढांचा तैयार किया गया है, जिससे बैंकिंग व्यवस्था मजबूत हो और नियमों को लागू करने में आसानी हो।
बेसल III मानकों के अनुरूप बनाया गया ढांचा
मार्केट रिस्क वह जोखिम होता है, जो बाजार में कीमतों, ब्याज दरों, मुद्रा विनिमय दरों या अन्य वित्तीय कारकों में बदलाव के कारण बैंकों को प्रभावित कर सकता है।RBI ने कहा कि नए नियमों का उद्देश्य मार्केट रिस्क से जुड़ी पूंजी आवश्यकताओं को संशोधित बेसल III फ्रेमवर्क के अनुरूप बनाना है।बेसल III अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग मानकों का एक समूह है, जिसका उद्देश्य बैंकों की वित्तीय मजबूती बढ़ाना और जोखिम प्रबंधन को बेहतर बनाना है।
बैंकों को मिलेगा तैयारी का समय
RBI ने नए नियमों को लागू करने के लिए 1 अप्रैल 2027 की तारीख तय की है। इससे बैंकों को अपनी आंतरिक व्यवस्था, तकनीकी प्रणाली और जोखिम प्रबंधन ढांचे में आवश्यक बदलाव करने का पर्याप्त समय मिलेगा।केंद्रीय बैंक ने कहा कि सुचारू बदलाव सुनिश्चित करने के लिए **1 अप्रैल 2024 से इंटरमीडिएट ट्रांजिशन स्केलर** लागू किए जा चुके हैं।इससे बैंकों को नए नियमों की ओर धीरे-धीरे बढ़ने में सहायता मिलेगी।
ट्रेडिंग बुक से जुड़े नियमों में बदलाव
RBI के अंतिम निर्देशों में एक महत्वपूर्ण बदलाव ट्रेडिंग बुक की परिभाषा से जुड़ा है।केंद्रीय बैंक ने अंतिम नियमों से ट्रेडिंग बुक को अलग से परिभाषित करने वाले प्रावधानों को हटा दिया है। RBI के अनुसार, निवेश से जुड़े मौजूदा निर्देशों में पहले से ही **‘हेल्ड फॉर ट्रेडिंग’ (HFT)** अकाउंटिंग सब-क्लासिफिकेशन के तहत ट्रेडिंग बुक की स्पष्ट पहचान मौजूद है।इसलिए नए निर्देशों में अलग से ट्रेडिंग बुक की परिभाषा शामिल करने की जरूरत नहीं समझी गई।
निवेश नियमों का लिया जाएगा संदर्भ
नए फ्रेमवर्क में ट्रेडिंग बुक से संबंधित मामलों के लिए संबंधित निवेश निर्देशों का संदर्भ दिया गया है।RBI का मानना है कि इससे नियमों में स्पष्टता आएगी और बैंकों को निवेश से जुड़े जोखिमों के प्रबंधन में सुविधा होगी।
बैंकों के जोखिम प्रबंधन पर असर
नए मार्केट रिस्क नियमों के लागू होने के बाद बैंकों को अपनी पूंजी संरचना और जोखिम आकलन प्रणाली को नए मानकों के अनुसार तैयार करना होगा।इससे बैंकों को बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव से जुड़े जोखिमों का बेहतर तरीके से प्रबंधन करने में मदद मिल सकती है।
बैंकिंग सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण कदम
भारतीय बैंकिंग प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए RBI समय-समय पर नियमों में बदलाव करता रहा है।मार्केट रिस्क से जुड़ा नया ढांचा भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका उद्देश्य बैंकों की वित्तीय स्थिरता बढ़ाना और जोखिमों से निपटने की क्षमता को मजबूत करना है।
विशेषज्ञों की नजर लागू होने की प्रक्रिया पर
अब बैंकिंग क्षेत्र की नजर इन नियमों को लागू करने की तैयारी पर रहेगी। बैंकों को अपनी आंतरिक नीतियों, तकनीकी प्रणालियों और पूंजी गणना प्रक्रियाओं में बदलाव करने होंगे।RBI ने स्पष्ट किया है कि नए निर्देशों को लागू करने में बैंकों को पर्याप्त समय और आवश्यक लचीलापन दिया गया है।
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