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ईंधन कीमतों में उछाल से Transport और सप्लाई कॉस्ट भी बढ़ी

Kanchan Paikara
12 Jun 2026 6:48 PM IST
ईंधन कीमतों में उछाल से  Transport  और सप्लाई कॉस्ट भी बढ़ी
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खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ने के कारण मई में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.93 प्रतिशत हो गई

Business व्यापार : देश में महंगाई को लेकर एक बार फिर आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में भारत की खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) बढ़कर 3.93 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह आंकड़ा अप्रैल महीने में दर्ज 3.48 प्रतिशत की तुलना में अधिक है, जिससे साफ है कि कीमतों में फिर से तेजी देखने को मिली है।

आंकड़ों के मुताबिक, इस बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में आया उछाल है। खाद्य पदार्थों की कैटेगरी में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई दर मई में 4.78 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि अप्रैल में यह 4.2 प्रतिशत थी। इससे स्पष्ट है कि रोजमर्रा की जरूरत की चीजें महंगी होने लगी हैं, जिसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सब्जियों, दालों, अनाज और अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी ने इस महंगाई को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। गर्मी के मौसम में सप्लाई चेन पर दबाव और कुछ क्षेत्रों में उत्पादन में कमी के कारण कीमतें बढ़ी हैं।

इसके अलावा पेट्रोल-डीजल जैसे ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी महंगाई को प्रभावित करता है। ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बढ़ने से वस्तुओं की ढुलाई महंगी हो जाती है, जिसका असर बाजार में मिलने वाली हर चीज पर दिखाई देता है।

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि कुछ क्षेत्रों में स्थिरता देखने को मिली है, लेकिन खाद्य महंगाई अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उपभोक्ता कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आने वाले महीनों में मानसून सामान्य रहता है और कृषि उत्पादन बेहतर होता है, तो खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि वैश्विक बाजार में अनिश्चितता और ईंधन की कीमतें अभी भी चुनौती बनी हुई हैं।

कुल मिलाकर, मई महीने के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि महंगाई अभी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आई है और आम लोगों को आने वाले समय में भी सावधानी से अपने खर्चों का प्रबंधन करना होगा।

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