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लिस्टिंग के बाद रॉकेट बना ये स्टॉक निवेशकों की नजर में आया शेयर

Ratna Netam
20 Aug 2026 3:29 PM IST
लिस्टिंग के बाद रॉकेट बना ये स्टॉक निवेशकों की नजर में आया शेयर
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नई दिल्ली। शेयर बाजार में कई बार छोटी कीमत वाले स्टॉक्स अचानक निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं। ऐसा ही एक मामला ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स कंपनी शिपरॉकेट (Shiprocket) के शेयरों को लेकर सामने आया है। 100 रुपये से कम के इश्यू प्राइस वाला यह शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद तेजी से ऊपर पहुंच गया और 150 रुपये के स्तर को भी पार कर गया। इस दौरान दिग्गज ग्लोबल निवेश कंपनी गोल्डमैन सैक्स की खरीदारी ने भी बाजार में चर्चा बढ़ा दी।
गोल्डमैन सैक्स ने शिपरॉकेट में बड़ा निवेश करते हुए 40 लाख से ज्यादा शेयर खरीदे हैं। एक्सचेंज के बल्क डील आंकड़ों के मुताबिक, गोल्डमैन सैक्स इंडिया इक्विटी पोर्टफोलियो ने 40.24 लाख शेयर करीब 131 रुपये प्रति शेयर के भाव पर खरीदे। इस सौदे की कुल कीमत लगभग 52.7 करोड़ रुपये बताई गई है।
लिस्टिंग के बाद शेयर में आई तेज उछाल
शिपरॉकेट के शेयरों ने बाजार में एंट्री के साथ ही निवेशकों को आकर्षित किया। कंपनी के शेयर इश्यू प्राइस 97 रुपये के मुकाबले तेजी के साथ कारोबार करते नजर आए। लिस्टिंग के पहले ही दिन शेयर में करीब 47 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई और कीमत 143 रुपये के आसपास पहुंच गई।
इसके बाद शेयर ने 150 रुपये के स्तर को पार किया, जिससे निवेशकों की नजर इस स्टॉक पर टिक गई। कम कीमत वाले इस शेयर में संस्थागत निवेशक की एंट्री को बाजार में सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा गया।
गोल्डमैन सैक्स की खरीदारी से बढ़ा भरोसा
गोल्डमैन सैक्स दुनिया की प्रमुख निवेश कंपनियों में शामिल है। किसी कंपनी में इस तरह के बड़े संस्थागत निवेश को बाजार में अक्सर भरोसे के संकेत के रूप में देखा जाता है।
शिपरॉकेट में गोल्डमैन सैक्स की हिस्सेदारी खरीदने की खबर के बाद निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि केवल किसी बड़े निवेशक की खरीदारी देखकर शेयर में निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। कंपनी का कारोबार, वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का अध्ययन करना भी जरूरी होता है।
क्या करती है शिपरॉकेट?
शिपरॉकेट एक ई-कॉमर्स एनाब्लमेंट और लॉजिस्टिक्स टेक्नोलॉजी कंपनी है। यह छोटे और बड़े ऑनलाइन कारोबारियों को अपने उत्पाद ग्राहकों तक पहुंचाने में मदद करती है।
कंपनी का प्लेटफॉर्म विक्रेताओं को शिपिंग, ऑर्डर मैनेजमेंट, डिलीवरी नेटवर्क और अन्य लॉजिस्टिक्स सुविधाएं उपलब्ध कराता है। ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन के बीच इस तरह की कंपनियों के लिए बाजार में बड़े अवसर देखे जा रहे हैं।
ई-कॉमर्स सेक्टर में बढ़ रहे मौके
भारत में ऑनलाइन खरीदारी का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। छोटे शहरों और कस्बों में भी ई-कॉमर्स का विस्तार हो रहा है। ऐसे में लॉजिस्टिक्स कंपनियों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
कंपनियां अब तेज डिलीवरी, बेहतर ट्रैकिंग और कम लागत वाले समाधान पर ध्यान दे रही हैं। शिपरॉकेट जैसी कंपनियां इसी बदलाव का फायदा उठाने की कोशिश कर रही हैं।
निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
किसी भी शेयर में तेजी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। लिस्टिंग के बाद शुरुआती तेजी कई बार बाजार की धारणा और मांग के कारण भी आती है।
निवेशकों को शेयर खरीदने से पहले कंपनी के मुनाफे, कर्ज, कारोबार की वृद्धि, प्रतिस्पर्धा और भविष्य की योजनाओं को समझना चाहिए। खासकर छोटे और नए लिस्ट हुए शेयरों में उतार-चढ़ाव ज्यादा देखने को मिल सकता है।
बाजार में संस्थागत निवेश का महत्व
जब किसी कंपनी में बड़े संस्थागत निवेशक निवेश करते हैं तो इससे बाजार में कंपनी को लेकर धारणा प्रभावित हो सकती है। म्यूचुअल फंड, विदेशी निवेशक और बड़े वित्तीय संस्थान आमतौर पर लंबी अवधि की संभावनाओं को देखकर निवेश करते हैं।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं होता कि शेयर हमेशा बढ़ता रहेगा। बाजार में जोखिम हमेशा बना रहता है और शेयर की कीमत कंपनी के प्रदर्शन के साथ बदलती रहती है।
आगे कैसी रह सकती है चाल?
शिपरॉकेट के शेयर की आगे की दिशा कंपनी के प्रदर्शन, तिमाही नतीजों और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगी। अगर कंपनी अपने कारोबार का विस्तार करती है और मुनाफे में सुधार दिखाती है तो निवेशकों का भरोसा मजबूत हो सकता है।
वहीं, बाजार में उतार-चढ़ाव या कंपनी से जुड़ी कोई नकारात्मक खबर शेयर पर दबाव भी डाल सकती है।
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