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खनिज तेल, धातु और खाद्य पदार्थ महंगे होने से बढ़ी थोक महंगाई

Ratna Netam
3 Aug 2026 6:24 PM IST
खनिज तेल, धातु और खाद्य पदार्थ महंगे होने से बढ़ी थोक महंगाई
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नई दिल्ली : देश में थोक महंगाई (WPI Inflation) में जून महीने के दौरान हुई बढ़ोतरी को लेकर सरकार ने संसद में स्थिति स्पष्ट की है। सरकार ने सोमवार को लोकसभा में बताया कि जून में थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई बढ़ने का प्रमुख कारण वैश्विक बाजार में ऊर्जा और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में आई तेजी रही। खनिज तेल, खाद्य पदार्थ, धातु, रसायन और पेट्रोलियम उत्पादों के दाम बढ़ने से थोक महंगाई पर दबाव बढ़ा।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल समेत कई कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण उत्पादन लागत बढ़ती है, जिसका प्रभाव कई क्षेत्रों में देखने को मिलता है। इसके अलावा धातु, रसायन और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि ने भी थोक महंगाई को प्रभावित किया।

मंत्री ने कहा कि सरकार महंगाई की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और आम जनता को राहत देने के लिए कई स्तरों पर कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सरकार की नीतियों का उद्देश्य जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों को नियंत्रण में रखना है। इसके लिए खाद्य वस्तुओं के प्रबंधन से लेकर व्यापार नीतियों तक कई फैसले समय-समय पर लिए जाते हैं।

पंकज चौधरी ने बताया कि सरकार ने आवश्यक खाद्य वस्तुओं का बफर स्टॉक मजबूत किया है ताकि बाजार में आपूर्ति की कमी न हो। जरूरत पड़ने पर खुले बाजार में अनाज की बिक्री भी की गई है, जिससे कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिली। इसके अलावा सरकार ने समय-समय पर आयात-निर्यात नीतियों में बदलाव किए हैं ताकि घरेलू बाजार में जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता बनी रहे।

उन्होंने कहा कि इन उपायों के चलते खुदरा महंगाई यानी सीपीआई (Consumer Price Index) को काफी हद तक नियंत्रण में रखने में सफलता मिली है। सरकार का कहना है कि थोक और खुदरा महंगाई को अलग-अलग कारक प्रभावित करते हैं। थोक महंगाई में उत्पादन और कच्चे माल की कीमतों का बड़ा योगदान होता है, जबकि खुदरा महंगाई आम उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले खर्च को दर्शाती है।

सरकार ने संसद को यह भी बताया कि वैश्विक परिस्थितियां भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद ऊर्जा बाजार में अस्थिरता, अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव और विभिन्न देशों में मांग-आपूर्ति के अंतर का असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा है। भारत भी वैश्विक अर्थव्यवस्था का हिस्सा होने के कारण इन बदलावों से प्रभावित होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बदलाव का असर परिवहन लागत पर पड़ता है, जिससे कई उत्पादों की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं। इसी तरह धातुओं और रसायनों की कीमतों में बढ़ोतरी से उद्योगों की लागत बढ़ती है। हालांकि सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से महंगाई के प्रभाव को सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है।

वित्त राज्य मंत्री ने कहा कि सरकार का पूरा ध्यान आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और आम लोगों को राहत देने पर है। आवश्यक वस्तुओं की कीमतों की निगरानी, पर्याप्त भंडारण और बाजार में आपूर्ति बनाए रखने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।

सरकार के मुताबिक आने वाले समय में भी वैश्विक बाजार की स्थिति और घरेलू कीमतों पर नजर रखी जाएगी। जरूरत पड़ने पर महंगाई को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे। केंद्र सरकार का दावा है कि नीतिगत फैसलों और प्रभावी प्रबंधन के जरिए महंगाई के दबाव को कम करने में लगातार काम किया जा रहा है।

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