
Business बिजनेस : सोने के दामों में इन दिनों लगातार गिरावट देखने को मिल रही है, जिससे निवेशकों और खरीदारों के बीच चिंता और चर्चा दोनों बढ़ गई है। पिछले दो वर्षों में सोने ने निवेशकों को बेहतरीन रिटर्न दिया था, लेकिन अब बाजार में रुझान बदलता नजर आ रहा है।
जानकारी के अनुसार, जनवरी 2026 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 5,595 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी। वहीं भारत में यह कीमत लगभग 1 लाख 79 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्चतम स्तर पर दर्ज की गई थी। यह वह दौर था जब गोल्ड को सबसे मजबूत सुरक्षित निवेश विकल्प माना जा रहा था।
लेकिन पिछले कुछ महीनों से सोने की कीमतों में लगातार गिरावट का ट्रेंड देखा जा रहा है। इस गिरावट ने बाजार में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सोने में तेजी का दौर अब खत्म हो रहा है या यह केवल एक अस्थायी सुधार है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं। ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) के चेयरमैन राजेश रोकड़े के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने हाल ही में ब्याज दरों को 3.5 से 3.75 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखा है। साथ ही फेड अधिकारियों ने इस वर्ष दरों में कटौती के संकेत भी वापस ले लिए हैं और जरूरत पड़ने पर दरें बढ़ाने की संभावना जताई है।
इस फैसले के चलते डॉलर मजबूत हुआ है, जिससे सोने पर दबाव बढ़ा है और बाजार में मुनाफावसूली भी तेज हुई है। इसके अलावा भारत सरकार द्वारा हाल ही में सोने पर आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) बढ़ाकर 15 प्रतिशत किए जाने का भी असर कीमतों पर देखने को मिल रहा है।
इसी बीच बाजार में यह भी चर्चा है कि सोने की कीमतों में और गिरावट आ सकती है। ऑल बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश सिंघल के अनुसार, सोने का भाव जल्द ही 1.20 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ सकता है। उनका कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां सोने में तेजी का समर्थन नहीं कर रही हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि ऐतिहासिक रूप से हर 5 से 7 साल के अंतराल में सोने में एक बड़ा करेक्शन देखने को मिलता है, और इस बार यह गिरावट 40 प्रतिशत तक भी जा सकती है। इसके चलते ज्वैलरी बाजार में ग्राहकों की खरीदारी फिलहाल कमजोर बनी हुई है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोने के दाम और नीचे आते हैं तो बाजार में दोबारा खरीदारी बढ़ सकती है। ऐसे में निवेशकों के लिए यह समय सावधानी और रणनीति के साथ फैसले लेने का है।
कुल मिलाकर, सोने की कीमतों में जारी गिरावट ने निवेशकों के सामने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह खरीदारी का सही मौका है या अभी और इंतजार करना बेहतर होगा।





