व्यापार
क्या महंगा होगा UPI से भुगतान? सरकार के नए प्रस्ताव को समझिए
Ratna Netam
5 Aug 2026 9:36 PM IST

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नई दिल्ली : देश में डिजिटल भुगतान का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को लेकर एक बार फिर नई चर्चा शुरू हो गई है। पेटीएम (Paytm), गूगल पे (Google Pay), फोनपे (PhonePe), भीम (BHIM) और अन्य UPI ऐप का रोजाना इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या अब ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर शुल्क देना पड़ेगा। इस चर्चा की वजह सरकार द्वारा पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट (Payment and Settlement Systems Act) में प्रस्तावित संशोधन है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल UPI ट्रांजैक्शन पर कोई नया चार्ज लागू नहीं किया गया है। अभी केवल कानूनी ढांचा तैयार किया जा रहा है और भविष्य में यदि जरूरत पड़ी तो उसी के आधार पर नियम बनाए जा सकेंगे। इसलिए वर्तमान समय में सभी UPI भुगतान पहले की तरह पूरी तरह निशुल्क हैं।
सरकार के प्रस्तावित संशोधन के बाद मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। MDR वह शुल्क होता है जो किसी डिजिटल भुगतान को स्वीकार करने वाला व्यापारी बैंक और पेमेंट सेवा प्रदाता को देता है। वर्तमान में क्रेडिट कार्ड और कुछ अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों पर यह शुल्क लागू होता है, लेकिन जनवरी 2020 से सरकार ने UPI लेनदेन पर MDR पूरी तरह समाप्त कर दिया था ताकि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिल सके और लोग नकदी के बजाय ऑनलाइन भुगतान को अपनाएं।
पिछले कुछ वर्षों में UPI ने रिकॉर्ड सफलता हासिल की है। यह दुनिया के सबसे बड़े रियल टाइम पेमेंट सिस्टम में शामिल हो चुका है। जुलाई 2026 में UPI के माध्यम से लगभग 23.7 अरब लेनदेन हुए, जिनकी कुल राशि करीब 29.9 लाख करोड़ रुपये रही। इतनी बड़ी व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए बैंकों, फिनटेक कंपनियों और पेमेंट सेवा प्रदाताओं को साइबर सुरक्षा, सर्वर क्षमता, नेटवर्क विस्तार और नई तकनीकों पर लगातार भारी निवेश करना पड़ता है। लेकिन UPI पर MDR समाप्त होने के कारण उन्हें इस सेवा से प्रत्यक्ष आय नहीं मिलती। यही कारण है कि लंबे समय से उद्योग जगत चुनिंदा लेनदेन पर MDR लागू करने की मांग करता रहा है।
हालांकि यह स्पष्ट कर देना जरूरी है कि सरकार ने अभी ₹2,000 से अधिक के सभी UPI भुगतान पर शुल्क लगाने का कोई निर्णय नहीं लिया है। मीडिया रिपोर्टों में केवल संभावना जताई गई है कि भविष्य में यदि MDR लागू किया जाता है तो यह केवल बड़ी राशि वाले कुछ व्यापारी भुगतान पर लागू हो सकता है। व्यक्ति से व्यक्ति (Person-to-Person) यानी किसी मित्र, रिश्तेदार या परिवार के सदस्य को भेजे जाने वाले सामान्य UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होने की संभावना बेहद कम बताई जा रही है।
रिपोर्टों के अनुसार संभावित MDR दर 0.25 प्रतिशत से 0.50 प्रतिशत के बीच हो सकती है, जबकि कुछ वित्तीय संस्थानों ने 30 से 40 बेसिस पॉइंट तक का अनुमान लगाया है। लेकिन सरकार ने अभी किसी भी दर को मंजूरी नहीं दी है। अंतिम निर्णय भविष्य में विस्तृत विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा।
यदि भविष्य में MDR लागू होता भी है तो तकनीकी रूप से इसका भुगतान ग्राहक नहीं बल्कि व्यापारी करेगा। यानी दुकानदार या सेवा प्रदाता बैंक और पेमेंट कंपनियों को यह शुल्क देगा। हालांकि इसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों पर पड़ सकता है क्योंकि कुछ व्यापारी अतिरिक्त लागत की भरपाई के लिए वस्तुओं या सेवाओं की कीमत बढ़ा सकते हैं। वहीं कई व्यापारी इस खर्च को स्वयं वहन भी कर सकते हैं।
सरकार का संभावित मॉडल छोटे भुगतान को प्रभावित नहीं करने पर आधारित माना जा रहा है। यदि ₹2,000 की सीमा तय होती है तो दूध, सब्जी, किराना, मेडिकल स्टोर, ऑटो, टैक्सी और रोजमर्रा की छोटी खरीदारी जैसे अधिकांश UPI भुगतान पहले की तरह मुफ्त बने रह सकते हैं। रिपोर्टों के अनुसार ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन संख्या में केवल लगभग 4 प्रतिशत हैं, लेकिन कुल मूल्य का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं का होता है। ऐसे में सरकार का उद्देश्य छोटे उपभोक्ताओं पर बोझ डाले बिना बड़े मूल्य वाले व्यापारी भुगतान के लिए राजस्व व्यवस्था विकसित करना हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि MDR लागू होता है तो Paytm, PhonePe, Google Pay, BHIM, Pine Labs, बैंक और अन्य भुगतान सेवा प्रदाताओं को नया राजस्व स्रोत मिलेगा। अनुमान है कि इससे पूरे डिजिटल भुगतान उद्योग को हर वर्ष 5,000 करोड़ से 10,000 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त आय हो सकती है। इस राशि का उपयोग साइबर सुरक्षा मजबूत करने, नई तकनीकों के विकास और भुगतान नेटवर्क को और अधिक सुरक्षित एवं तेज बनाने में किया जा सकता है।
फिलहाल आम UPI उपयोगकर्ताओं को किसी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। सरकार ने अभी कोई नया शुल्क लागू नहीं किया है। संसद में प्रस्तावित संशोधन केवल भविष्य में आवश्यक होने पर नियम बनाने की कानूनी व्यवस्था तैयार करता है। अंतिम निर्णय, शुल्क की दर, किन लेनदेन पर यह लागू होगा और कब से प्रभावी होगा, इन सभी बातों की घोषणा सरकार बाद में करेगी। तब तक देशभर के करोड़ों लोग Paytm, Google Pay, PhonePe, BHIM और अन्य UPI ऐप्स के जरिए पहले की तरह बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के डिजिटल भुगतान कर सकते हैं।
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