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सोने के मेडल से 11.5 करोड़ रुपये तक, जानिए नोबेल शांति पुरस्कार की कहानी
Rajeshwari Nishad
9 Oct 2026 4:04 PM IST

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Nobel Peace Prize : नोबेल शांति पुरस्कार दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में शामिल है। शांति, मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए उल्लेखनीय काम करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को मिलने वाले इस सम्मान के साथ स्वर्ण पदक, प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार राशि दी जाती है। वर्ष 2026 के लिए एक पूर्ण नोबेल पुरस्कार की राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर तय की गई है। भारतीय मुद्रा में इसका मूल्य लगभग 11.5 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। हालांकि, रुपये में मिलने वाला समतुल्य मूल्य विनिमय दर के साथ बदलता है।
नोबेल फाउंडेशन ने 18 सितंबर 2026 को पुरस्कार राशि बढ़ाने की घोषणा की थी। पिछले वर्ष प्रत्येक पुरस्कार श्रेणी के लिए 1.1 करोड़ स्वीडिश क्रोनर निर्धारित थे। इस बार इसमें दस लाख स्वीडिश क्रोनर की बढ़ोतरी की गई है। यह राशि प्रत्येक विजेता को अलग-अलग मिलने वाली रकम नहीं, बल्कि संबंधित श्रेणी के पूर्ण पुरस्कार की राशि है। जब पुरस्कार साझा होता है, तो धनराशि भी निर्धारित हिस्सों के अनुसार विजेताओं में बांटी जाती है।
इस सम्मान का इतिहास स्वीडन के आविष्कारक और उद्योगपति अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत से शुरू होता है। उन्होंने 27 नवंबर 1895 को पेरिस में अपनी अंतिम वसीयत पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें अपनी शेष संपत्ति से एक कोष बनाने और उसके निवेश से प्राप्त आय को मानवता के लिए सबसे अधिक लाभकारी काम करने वालों के बीच पुरस्कार के रूप में वितरित करने की व्यवस्था दी थी। उनकी मूल वसीयत में भौतिकी, रसायन विज्ञान, चिकित्सा, साहित्य और शांति की पांच श्रेणियां थीं।
अल्फ्रेड नोबेल का निधन दिसंबर 1896 में हुआ। उनकी वसीयत को लागू करने का रास्ता आसान नहीं था। कुछ रिश्तेदारों ने इसे अमान्य घोषित कराने की कोशिश की और पुरस्कारों की व्यवस्था को लेकर विरोध भी हुआ। लंबे कानूनी प्रयासों तथा बातचीत के बाद 29 जून 1900 को नवगठित नोबेल फाउंडेशन के नियमों को मंजूरी मिली। इसके बाद 10 दिसंबर 1901 को पहली बार नोबेल पुरस्कार प्रदान किए गए। इस तरह 2026 में पुरस्कारों की शुरुआत के 125 वर्ष पूरे हो रहे हैं।
पहला नोबेल शांति पुरस्कार 1901 में हेनरी ड्यूनां और फ्रेडरिक पासी को संयुक्त रूप से मिला था। ड्यूनां रेड क्रॉस की स्थापना से जुड़े थे, जबकि पासी ने शांति आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। शुरुआत से ही इस पुरस्कार में राष्ट्रों के बीच भाईचारे, सैन्य तनाव कम करने और शांति प्रयासों को प्रोत्साहित करने की भावना शामिल रही है। समय के साथ सम्मान पाने वालों में व्यक्तियों के साथ मानवीय सहायता तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए काम करने वाली संस्थाएं भी शामिल हुईं।
नोबेल शांति पुरस्कार की एक विशेषता उसका नॉर्वे से संबंध है। अन्य मूल नोबेल पुरस्कारों की चयन व्यवस्था स्वीडन में है, जबकि शांति पुरस्कार का चयन पांच सदस्यीय नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी करती है। इसके सदस्यों को नॉर्वे की संसद चुनती है। अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी वसीयत में यही व्यवस्था निर्धारित की थी। नॉर्वे की संसद ने अप्रैल 1897 में जिम्मेदारी स्वीकार की और उसी वर्ष अगस्त में समिति का गठन हुआ।
अल्फ्रेड नोबेल ने शांति पुरस्कार की जिम्मेदारी नॉर्वे को क्यों दी, इसकी निश्चित वजह उपलब्ध दस्तावेजों में नहीं मिलती। उस समय स्वीडन और नॉर्वे एक संघ में थे, लेकिन इसे अकेला प्रमाणित कारण नहीं माना जा सकता। आधिकारिक इतिहास भी स्पष्ट करता है कि नोबेल ने अपने फैसले का स्पष्टीकरण नहीं छोड़ा था। पुरस्कार प्रदान करने का समारोह नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में 10 दिसंबर को होता है, जो उनकी पुण्यतिथि है।
विजेता को मिलने वाला स्वर्ण पदक भी अपने डिजाइन और इतिहास के कारण खास है। इसे नॉर्वे के मूर्तिकार गुस्ताव विगेलैंड ने स्वीडिश उत्कीर्णक एरिक लिंडबर्ग की सहायता से तैयार किया था। पदक का डिजाइन 1902 के पुरस्कार तक तैयार हो गया था। प्रारंभिक पदक 23 कैरेट सोने का था और उसका वजन 192 ग्राम था। वर्ष 1980 से इसे 18 कैरेट सोने और 196 ग्राम वजन में बदला गया। इसका व्यास 6.6 सेंटीमीटर है।
पदक के सामने अल्फ्रेड नोबेल की आकृति, उनका नाम और जन्म तथा मृत्यु के वर्ष अंकित होते हैं। पीछे तीन व्यक्तियों का आलिंगन अंतरराष्ट्रीय भाईचारे का प्रतीक है। लैटिन भाषा में लिखे शब्द शांति और लोगों के बीच भाईचारे का संदेश देते हैं। पदक के किनारे पुरस्कार का नाम, वर्ष और विजेता का नाम उकेरा जाता है। इसके साथ मिलने वाला प्रशस्ति पत्र सम्मान का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा है।
चयन के लिए योग्य प्रस्तावकों से नामांकन स्वीकार किए जाते हैं और सामान्य समयसीमा 31 जनवरी होती है। स्वयं आवेदन करके पुरस्कार प्राप्त नहीं किया जा सकता। समिति नामांकनों की समीक्षा और विशेषज्ञों के आकलन के बाद निर्णय लेती है। नामांकन तथा प्रस्तावकों के नाम 50 वर्ष तक गोपनीय रहते हैं। सिर्फ नामांकित होना समिति का समर्थन या सम्मान नहीं माना जाता। वर्ष 2026 का शांति पुरस्कार नावी पिल्लई को शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए घोषित किया गया है।
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