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65% कंपनियों में हायरिंग घटी, AI से फ्रेशर्स के करियर पर संकट

Rajeshwari Nishad
9 Oct 2026 3:34 PM IST
65% कंपनियों में हायरिंग घटी, AI से फ्रेशर्स के करियर पर संकट
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freshers' careers: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच भारतीय आईटी सेक्टर में नौकरी तलाश रहे युवाओं के लिए चुनौतियां बढ़ रही हैं। खासकर पहली नौकरी की तलाश कर रहे फ्रेशर्स के सामने कंपनियों की बदलती जरूरतों के मुताबिक खुद को तैयार करने का दबाव है। इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस यानी ICRIER के अध्ययन में सर्वे में शामिल 65 प्रतिशत कंपनियों ने AI अपनाने के बाद हायरिंग में कमी की बात कही है। हालांकि, यह आंकड़ा पूरे देश की सभी कंपनियों का नहीं है और इसका मतलब नौकरियों में 65 प्रतिशत की कटौती भी नहीं है।
फरवरी 2026 में प्रकाशित ‘AI एंड जॉब्स: दिस टाइम इज नो डिफरेंट’ अध्ययन के लिए नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच भारत के 10 शहरों में 651 उत्तरदाताओं से जानकारी जुटाई गई। इसमें आईटी सेवाओं, आईटी उत्पादों, बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग सेवाओं और स्टार्टअप से जुड़े कारोबार शामिल थे। अध्ययन का उद्देश्य समझना था कि जनरेटिव AI से भर्ती, कर्मचारियों की भूमिका और काम की उत्पादकता में किस तरह बदलाव आ रहा है। इसलिए इन निष्कर्षों को अक्टूबर की ताजा मासिक हायरिंग रिपोर्ट के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
सर्वे में 24 प्रतिशत कंपनियों ने हायरिंग बढ़ने और 11 प्रतिशत ने कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं होने की बात कही। पिछले 24 महीनों में एंट्री लेवल रोजगार घटने की जानकारी 55 प्रतिशत कंपनियों ने दी, जबकि 35 प्रतिशत ने इस स्तर पर कर्मचारियों की संख्या बढ़ने की बात बताई। दूसरी ओर, मिड लेवल रोजगार में वृद्धि बताने वाली कंपनियों की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत रही। वरिष्ठ स्तर पर 82 प्रतिशत कंपनियों ने स्थिति स्थिर रहने की जानकारी दी। ये आंकड़े बताते हैं कि भर्ती और रोजगार का असर अनुभव के अलग-अलग स्तरों पर समान नहीं है।
फ्रेशर्स के लिए शुरुआती पदों की अहमियत सिर्फ वेतन तक सीमित नहीं होती। पहली नौकरी उन्हें वास्तविक प्रोजेक्ट पर काम करने, टीम के साथ समस्या सुलझाने और ग्राहकों की जरूरत समझने का अनुभव देती है। ऐसे पदों पर भर्ती धीमी होने से करियर की शुरुआत का रास्ता कठिन हो सकता है। हालांकि, किसी सर्वे में कंपनियों की भर्ती घटने का जवाब यह नहीं बताता कि प्रत्येक कंपनी ने कितने पद कम किए या कितने उम्मीदवारों को नौकरी नहीं मिली।
अध्ययन का एक अहम निष्कर्ष यह भी है कि AI अपनाने के बाद बड़े पैमाने पर रोजगार खत्म होने की आशंकाओं के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले। शोधकर्ताओं के मुताबिक, भर्ती की गति में नरमी के बावजूद क्षेत्र में कुल रोजगार बढ़ा है। तकनीकी और विश्लेषण से जुड़े कुछ ऐसे पेशों में मांग मजबूत मिली, जिनका AI से संपर्क अधिक है। इसका अर्थ है कि तकनीक कहीं काम के हिस्से अपने हाथ में ले रही है तो कहीं कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने में मदद कर रही है।
कंपनियों की जरूरतों में बदलाव कौशल की मांग में भी दिखाई देता है। अध्ययन से जुड़े निष्कर्षों के अनुसार, 63 प्रतिशत कंपनियों ने ऐसे उम्मीदवारों की मांग बढ़ने की बात कही, जिनके पास अपने कार्यक्षेत्र की समझ के साथ AI या डेटा से संबंधित कौशल हों। शोधकर्ताओं ने भर्ती में नरमी को महामारी के बाद आईटी उद्योग में आए व्यापक बदलावों से भी जोड़ा है। इसलिए हायरिंग की पूरी सुस्ती के लिए केवल AI को जिम्मेदार ठहराना उपलब्ध प्रमाणों से सही नहीं होगा।
नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए इसका व्यावहारिक अर्थ है कि पढ़ाई और वास्तविक काम के बीच की दूरी कम करना जरूरी हो रहा है। उदाहरण के तौर पर, किसी सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट को तैयार करना, उसमें आने वाली त्रुटियां समझना और अपने फैसलों की वजह बताना उम्मीदवार की क्षमता दिखाने के तरीके हो सकते हैं। AI की मदद से तैयार काम में भी उम्मीदवार को यह समझ होना जरूरी है कि परिणाम सही क्यों है और उसमें सुधार कहां चाहिए। केवल तैयार जवाब प्रस्तुत करना कार्य की समझ का पूरा प्रमाण नहीं बनता।
यह बदलाव वैश्विक स्तर पर भी चर्चा में है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और NASK के 2025 के अध्ययन के अनुसार, दुनिया में लगभग हर चार में से एक नौकरी जनरेटिव AI के प्रभाव के दायरे में आ सकती है। हालांकि, संस्थाओं ने स्पष्ट किया कि तकनीक से प्रभावित होना नौकरी समाप्त होने के बराबर नहीं है। अधिकांश पेशों में मानवीय योगदान की जरूरत बनी रहने के कारण काम का स्वरूप बदलना अधिक संभावित परिणाम है।
मसलन, किसी भूमिका के कुछ कार्य स्वचालित होने पर कर्मचारियों की जिम्मेदारी समीक्षा, निर्णय और जटिल समस्याओं की ओर बढ़ सकती है। यह बदलाव उम्मीदवारों के साथ कंपनियों की तैयारी का भी सवाल है। नए कर्मचारियों से बेहतर कौशल की अपेक्षा रखते हुए प्रशिक्षण और शुरुआती अनुभव के अवसर उपलब्ध कराना उनकी क्षमता विकसित करने में मदद कर सकता है। फ्रेशर्स के सामने चुनौती स्पष्ट है: नौकरी पाने के लिए अपनी उपयोगिता साबित करनी होगी। लेकिन उपलब्ध अध्ययन उनके पूरे करियर पर स्थायी संकट की घोषणा नहीं करता; वह भर्ती में सुस्ती और काम की बदलती जरूरतों की तस्वीर प्रस्तुत करता है।
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