दिल्ली-एनसीआर

दिल्ली-NCR में प्रदूषण रोकने को दीर्घकालिक योजना जरूरी

Kiran
7 Nov 2026 10:35 AM IST
दिल्ली-NCR में प्रदूषण रोकने को दीर्घकालिक योजना जरूरी
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दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण में वाहनों के उत्सर्जन को प्रमुख योगदानकर्ता बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि बढ़ते वायु गुणवत्ता सूचकांक पर अंकुश लगाने के लिए तत्काल, मध्यम और दीर्घकालिक उपायों की जरूरत है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर स्वत: संज्ञान मामले पर सुनवाई की शुरुआत में वकीलों से पूछा, "हमें उम्मीद है कि आप सभी दिल्ली के मौसम का आनंद ले रहे होंगे।" यह कहते हुए कि प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी के आसपास मंडरा रहा है, वरिष्ठ वकील और एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने बेंच से कहा, "हम अपनी आवाज भी खो रहे हैं। यह एक दिन में 30 सिगरेट पीने जैसा है।" सीजेआई ने कहा, "हम बात करते रहते हैं, कभी-कभी बयान और सुझाव देते हैं, लेकिन मुद्दा यह है कि AQI पहले से ही 400 को छू रहा है।"
पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना भी शामिल थे, ने दिल्ली को पड़ोसी एनसीआर शहरों जैसे गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा से जोड़ने वाली सड़कों पर "बम्पर-टू-बम्पर" यातायात पर चिंता व्यक्त की। राष्ट्रीय राजधानी में शुक्रवार को धुंध की मोटी परत छा गई, जिससे हवा की गुणवत्ता "गंभीर" श्रेणी के करीब पहुंच गई, समग्र AQI 391 पर पहुंच गया। शहर भर के 59 निगरानी स्टेशनों में से, 30 ने सुबह 9 बजे "गंभीर" वायु गुणवत्ता दर्ज की, जबकि शेष "बहुत खराब" श्रेणी में थे। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, रोहिणी में सबसे खराब एक्यूआई 475 दर्ज किया गया, इसके बाद आईआईटी, दिल्ली में 472 दर्ज किया गया।
मनजिंदर सिरसा ने पराली जलाने को लेकर पंजाब पर निशाना साधा दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं को लेकर शुक्रवार को आप के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार पर निशाना साधा और राष्ट्रीय राजधानी की वायु गुणवत्ता खराब होने पर जवाबदेही की मांग की। एक्स पर एक पोस्ट में, सिरसा ने पंजाब भर में खेतों में आग लगने की घटनाओं को दिखाने वाली एक उपग्रह छवि साझा की और राज्य सरकार पर मुद्दे को संबोधित करने के बजाय राजनीतिक बहाने बनाने का आरोप लगाया। पीठ ने दिल्ली-एनसीआर में यातायात की भीड़ को दूर करने और प्रदूषण को रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर संबंधित अधिकारियों से विवरण मांगा।
अपराजिता सिंह ने कहा कि प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी करीब 14 फीसदी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय परिवहन, ऊर्जा खपत और अपशिष्ट जलाने से दिल्ली की बेसलाइन हवा पहले से ही भारी प्रदूषित थी, जो सर्दियों के दौरान "गंभीर" श्रेणी में पहुंच गई। शीर्ष अदालत ने किसानों को पराली जलाने के बारे में शिक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि एक बार जब वे इसके आर्थिक निहितार्थ को समझ लेंगे तो वे इस प्रथा को बंद कर देंगे।
उच्च AQI स्तर के दौरान सभी आयु वर्ग के छात्रों के लिए स्कूलों में शारीरिक कक्षाएं बंद करने की मांग वाली याचिका पर बेंच ने कहा कि वह विशेषज्ञ की राय के अनुसार काम करेगी। यह देखते हुए कि दिवाली एक ऐसा समय था जब गरीब लोगों को अपनी आजीविका कमाने का अवसर मिलता था, शीर्ष अदालत ने कहा, साथ ही, प्रदूषण संबंधी चिंताओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है।
पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन की कमी को चिह्नित करते हुए, इसने अधिकारियों से यातायात भीड़ को रोकने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण प्रस्तुत करने को कहा। शीर्ष अदालत ने अधिकारियों को तत्काल, मध्यम और दीर्घकालिक कार्य योजनाओं की रूपरेखा तैयार करने का निर्देश देते हुए मामले को 16 नवंबर को आगे की सुनवाई के लिए पोस्ट किया।
पीठ ने कहा कि दिवाली और अन्य त्योहारों के दौरान स्वच्छ हवा की पहल को "जन आंदोलन" में बदलना चाहिए क्योंकि प्रदूषण पर नियंत्रण केवल न्यायिक आदेशों और पुलिस तैनाती के माध्यम से "हासिल नहीं किया जा सकता"। शीर्ष अदालत ने कहा कि अत्यधिक न्यायिक हस्तक्षेप अक्सर उच्च गैर-अनुपालन का कारण बनता है। सीजेआई कांत ने कहा, "अदालत जितने अधिक आदेश पारित करेगी, उतने अधिक उल्लंघन हो सकते हैं। यही प्रवृत्ति है। स्थानीय पार्षदों को शामिल करें। उन्हें लोगों से यह सुनिश्चित करने के लिए अपील करने के लिए कहें कि उनके दिवाली समारोह प्रदूषण में योगदान न करें। यह एक लोगों का आंदोलन बनना चाहिए।" पीठ ने दिल्ली सरकार और अन्य संबंधित प्राधिकारियों से आग्रह किया कि वे दिवाली के दौरान प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे फोड़ने के खिलाफ लोगों को मनाने के लिए स्थानीय पार्षदों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।
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