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- 2 किलो हेरोइन के साथ...

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और वडोदरा सिटी क्राइम ब्रांच ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए कथित रूप से गैंगस्टर रोहित गोदारा गिरोह से जुड़े एक बड़े नार्को-एक्सटॉर्शन मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। पुलिस के मुताबिक इस नेटवर्क का संचालन रोहित गोदारा के प्रमुख सहयोगी बताए जा रहे महेंद्र डेलाना के जरिए किया जा रहा था। संयुक्त टीम ने राजस्थान के चुरू निवासी कुलदीप स्वामी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से करीब दो किलोग्राम हेरोइन बरामद करने का दावा किया है।
पुलिस का कहना है कि बरामद हेरोइन पाकिस्तान में बनी होने का संदेह है। इसकी उत्पत्ति और तस्करी के पूरे रास्ते की जांच की जा रही है। गिरफ्तार आरोपी कुलदीप स्वामी वडोदरा सिटी क्राइम ब्रांच में दर्ज करीब 10 करोड़ रुपये की रंगदारी से जुड़े एक मामले में भी वांछित बताया गया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार रंगदारी की कथित रकम की पहली किस्त दिल्ली में ली जानी थी। इसी मामले की जांच के दौरान ऐसे नेटवर्क के संकेत मिले जो कथित तौर पर रंगदारी की रकम जुटाने और मादक पदार्थों की तस्करी के लिए अलग-अलग स्तरों पर काम कर रहा था।
खुफिया सूचना पर शुरू हुआ संयुक्त ऑपरेशन
स्पेशल सेल के अधिकारी नारा चैतन्य के मुताबिक वडोदरा सिटी क्राइम ब्रांच से मिली पुख्ता सूचना के बाद दिल्ली में संयुक्त ऑपरेशन की योजना तैयार की गई।
कार्रवाई एसीपी राहुल कुमार सिंह की देखरेख में की गई। टीम में इंस्पेक्टर राहुल कुमार, विनीत कुमार और अजीत सिंह के नेतृत्व में पुलिसकर्मी शामिल रहे।
पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान कुलदीप स्वामी की गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाई गई और उसके संभावित ठिकानों पर निगरानी रखी गई। इसके बाद उसे पकड़ने के लिए संयुक्त टीम ने कार्रवाई की।
दो किलो हेरोइन बरामद करने का दावा
संयुक्त टीम ने आरोपी को गिरफ्तार करने के साथ करीब दो किलोग्राम हेरोइन बरामद करने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच में मादक पदार्थ के पाकिस्तान से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।
हालांकि बरामद पदार्थ की अंतिम प्रकृति, शुद्धता और स्रोत की पुष्टि फोरेंसिक जांच तथा आगे की विवेचना के आधार पर होगी। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह खेप भारत में किस रास्ते से पहुंची और इसे आगे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।
इसके साथ ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
10 करोड़ की रंगदारी मामले में था वांछित
पुलिस के अनुसार कुलदीप स्वामी गुजरात के वडोदरा में दर्ज करीब 10 करोड़ रुपये की कथित रंगदारी के मामले में वांछित था। इस मामले की जांच वडोदरा सिटी क्राइम ब्रांच कर रही है।
जांच एजेंसी का दावा है कि रंगदारी की रकम की पहली किस्त दिल्ली में प्राप्त करने की योजना बनाई गई थी। इसी सूचना ने दिल्ली और गुजरात की पुलिस एजेंसियों को संयुक्त कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ाया।
फिलहाल रंगदारी की मांग किससे की गई थी और रकम के लेन-देन की पूरी योजना क्या थी, इसकी विस्तृत जांच जारी है।
कई स्तरों पर काम करता था कथित नेटवर्क
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि कथित सिंडिकेट कई स्तरों पर काम करता था। नेटवर्क में अलग-अलग लोगों को अलग जिम्मेदारियां दिए जाने का संदेह है।
कुछ लोगों का इस्तेमाल कथित तौर पर रंगदारी की रकम इकट्ठा करने के लिए किया जाता था, जबकि दूसरे सदस्य मादक पदार्थों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के काम से जुड़े हो सकते हैं।
पुलिस यह भी जांच रही है कि रंगदारी और ड्रग्स से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल किस तरह किया जाता था और क्या इसके जरिए गिरोह की दूसरी गतिविधियों को वित्तीय मदद पहुंचाई जाती थी।
इन सभी पहलुओं की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
महेंद्र डेलाना की भूमिका की जांच
पुलिस का दावा है कि इस कथित मॉड्यूल को महेंद्र डेलाना संचालित कर रहा था, जिसे गैंगस्टर रोहित गोदारा का प्रमुख सहयोगी बताया गया है।
जांच एजेंसियां अब महेंद्र डेलाना और गिरफ्तार आरोपी के बीच कथित संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं। मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल चैट, बैंकिंग लेन-देन और अन्य तकनीकी साक्ष्य जांच के दायरे में आ सकते हैं।
इसके अलावा यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि नेटवर्क में कितने लोग सक्रिय थे और इसके तार किन राज्यों तक फैले हुए थे।
ड्रग्स और रंगदारी के कथित कनेक्शन पर फोकस
इस मामले में जांच एजेंसियों के सामने महत्वपूर्ण सवाल कथित ड्रग तस्करी और रंगदारी नेटवर्क के बीच संबंध को स्थापित करना है।
पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या दोनों गतिविधियां एक ही नेटवर्क के जरिए संचालित की जा रही थीं या इनके लिए अलग-अलग लोगों को जिम्मेदारी दी गई थी।
रंगदारी से प्राप्त रकम और मादक पदार्थों की तस्करी से होने वाली कथित कमाई कहां भेजी जाती थी, इसका पता लगाने के लिए वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा सकती है।
पाकिस्तान कनेक्शन की भी होगी जांच
पुलिस ने बरामद हेरोइन को पाकिस्तान में निर्मित बताया है। ऐसे में जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा इसकी सप्लाई चेन का पता लगाना होगा।
यह जांच की जाएगी कि मादक पदार्थ सीमा पार से किस माध्यम से भारत में पहुंचा, इसे किस व्यक्ति ने प्राप्त किया और दिल्ली तक पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका रही।
इसके लिए अन्य राज्यों की एजेंसियों और आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय एजेंसियों से भी जानकारी साझा की जा सकती है।
हालांकि केवल बरामदगी के शुरुआती संकेतों के आधार पर पूरी तस्करी श्रृंखला के बारे में निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
डिजिटल और वित्तीय नेटवर्क खंगाल रही पुलिस
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों का फोकस उसके संपर्कों पर है। मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिलने वाले डेटा के जरिए नेटवर्क के बाकी सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश की जा सकती है।
पुलिस यह भी पता लगाएगी कि रंगदारी की कथित रकम प्राप्त करने के लिए किन खातों, लोगों या माध्यमों का इस्तेमाल किया जाना था।
इसी तरह ड्रग्स की खरीद, परिवहन और वितरण में शामिल लोगों की पहचान भी जांच का अहम हिस्सा होगी।
अन्य आरोपियों की तलाश जारी
संयुक्त ऑपरेशन में कुलदीप स्वामी की गिरफ्तारी को जांच की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। पुलिस अब उससे पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
मामले में नारकोटिक्स और रंगदारी से संबंधित लागू कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। बरामद मादक पदार्थ को जांच के लिए भेजे जाने की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।
फिलहाल पुलिस के दावों और आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया में पुष्टि होना बाकी है। गिरफ्तार व्यक्ति को कानून के तहत तब तक दोषी नहीं माना जा सकता, जब तक अदालत आरोप सिद्ध न कर दे।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और वडोदरा सिटी क्राइम ब्रांच अब कथित नार्को-एक्सटॉर्शन नेटवर्क की पूरी श्रृंखला, ड्रग्स के स्रोत, रंगदारी की रकम के संभावित लेन-देन और अन्य सहयोगियों की भूमिका की जांच आगे बढ़ा रही हैं।





