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जेल अफसर-वकील समेत 5 पर शिकंजा, कोर्ट ने की सख्त टिप्पणी

Saba Naaz
18 July 2026 8:02 PM IST
जेल अफसर-वकील समेत 5 पर शिकंजा, कोर्ट ने की सख्त टिप्पणी
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दिल्ली: रोहिणी जेल में कथित तौर पर चल रहे रंगदारी और रिश्वतखोरी के संगठित रैकेट मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश की अदालत ने रोहिणी जेल के तीन अधिकारियों, एक अधिवक्ता और एक अन्य व्यक्ति को 31 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। अदालत ने कहा कि मामले की गंभीरता और आरोपियों के प्रभावशाली पद को देखते हुए उन्हें जमानत या रिहाई मिलने पर जांच प्रभावित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

विशेष न्यायाधीश विद्या प्रकाश की अदालत ने जिन आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा है, उनमें रोहिणी जेल के सहायक अधीक्षक सुनील कुमार, हेड वार्डर योगेश, वार्डर जगबीर, बागपत निवासी अधिवक्ता हरेंद्र बंसल और दिल्ली निवासी विप्लव खारी शामिल हैं। इन सभी पर जेल के अंदर बंद कैदियों से सुविधाएं उपलब्ध कराने, सुरक्षा देने और अन्य लाभों के नाम पर अवैध धन वसूली करने का आरोप है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों से यह संकेत मिलता है कि यह मामला केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसमें जेल के अन्य अधिकारी और बाहरी लोग भी शामिल हो सकते हैं। कोर्ट ने आशंका जताई कि यदि आरोपियों को रिहा किया जाता है तो वे गवाहों को प्रभावित करने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने या जांच की दिशा बदलने की कोशिश कर सकते हैं।

अदालत ने यह भी कहा कि पूरे मामले की गहराई से जांच जरूरी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि रिश्वत और रंगदारी के इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और अवैध रूप से वसूले गए पैसे का इस्तेमाल कहां किया गया। जांच एजेंसियों को यह पता लगाने की जरूरत है कि जेल के भीतर इस तरह की गतिविधियां कितने समय से चल रही थीं और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही है।

मामले की शुरुआत 9 फरवरी 2026 को मिली एक शिकायत से हुई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि रोहिणी जेल में बंद उसके पिता और भाई की सुरक्षा और बेहतर सुविधाओं के नाम पर उससे पैसे की मांग की जा रही है। शिकायत मिलने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने मामले की जांच शुरू की और जाल बिछाकर कार्रवाई की।

एसीबी की कार्रवाई के दौरान एक लाख रुपये की रिश्वत बरामद की गई थी। इसके बाद जांच आगे बढ़ी और जेल अधिकारियों समेत अन्य लोगों की भूमिका सामने आई। एजेंसी का दावा है कि जेल में बंद कैदियों और उनके परिजनों से अवैध रूप से पैसे वसूलने का नेटवर्क चलाया जा रहा था।

जांच एजेंसी अब इस पूरे मामले में पैसे के लेन-देन, आरोपियों के संपर्क और अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है। कोर्ट के आदेश के बाद अब सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में रहेंगे। वहीं, जांच का दायरा बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।

इस मामले ने दिल्ली की जेल व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जेल जैसे संवेदनशील स्थान पर तैनात अधिकारियों पर इस तरह के गंभीर आरोप लगना सुरक्षा व्यवस्था के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। अदालत की टिप्पणी से साफ है कि जांच एजेंसियां अब केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश करेंगी।

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