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चंडीगढ़। पंजाब में लोक सेवा आयोग (PPSC) की पीसीएस मुख्य परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आम आदमी पार्टी (AAP) की भगवंत मान सरकार पर भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को आरोप लगाया कि पंजाब में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य में कथित पेपर लीक और चयन संबंधी गड़बड़ियों का नेटवर्क सक्रिय है। भाजपा ने पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।दरअसल, पंजाब लोक सेवा आयोग ने चार नवंबर को पंजाब राज्य सिविल सेवा संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा-2025 की मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित किया था। इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से कुल 331 पद भरे जाने हैं। आयोग ने मुख्य परीक्षा के आधार पर 751 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार चरण के लिए चयनित किया है।परिणाम घोषित होने के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कई परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवारों के सफल होने का तरीका असामान्य दिखाई दे रहा है। उम्मीदवारों ने इस मामले में स्वतंत्र जांच की मांग की है।भाजपा का आरोप है कि परीक्षा परिणामों में कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनकी गहन जांच आवश्यक है। पार्टी नेताओं के अनुसार, कुछ परीक्षा केंद्रों के एक ही कमरे से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के चयनित होने की जानकारी मिली है। इसके अलावा लगातार क्रमांक वाले रोल नंबरों के अभ्यर्थियों के सफल होने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
भाजपा नेता सुनील जाखड़ ने कहा कि पंजाब जैसी प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में इस प्रकार के आरोप सामने आना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने दावा किया कि कुछ परीक्षा कक्षों से 10 से 11 अभ्यर्थियों के सफल होने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने इसे संदिग्ध बताते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की।जाखड़ ने कहा कि सरकारी सेवाओं में भर्ती के लिए वर्षों तक मेहनत करने वाले युवाओं का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। यदि भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सीबीआई जांच से ही आरोपों की सच्चाई सामने आ सकती है।भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े कथित घोटालों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। भंडारी ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर राजनीतिक निशाना साधते हुए राज्य सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग की।भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी भ्रष्टाचार समाप्त करने और पारदर्शी प्रशासन देने के वादे के साथ सत्ता में आई थी, लेकिन अब उसी की सरकार के कार्यकाल में सरकारी भर्तियों की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।हालांकि, भाजपा की ओर से लगाए गए पेपर लीक माफिया और भ्रष्टाचार के आरोप अभी जांच से प्रमाणित नहीं हुए हैं। परीक्षा परिणामों में दिखाई देने वाले चयन के पैटर्न से अपने आप पेपर लीक या संगठित धोखाधड़ी साबित नहीं होती। इसके लिए परीक्षा रिकॉर्ड, उत्तर पुस्तिकाओं, मूल्यांकन प्रक्रिया और अन्य संबंधित साक्ष्यों की जांच आवश्यक होगी।
इस विवाद में कुछ अभ्यर्थियों ने दावा किया है कि सफल उम्मीदवारों की सूची में लगातार रोल नंबर वाले कई उम्मीदवार शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 86 उम्मीदवारों के चयन को लेकर इस प्रकार के सवाल उठाए गए हैं। इसके अतिरिक्त कुछ ऐसे रोल नंबरों को लेकर भी आरोप सामने आए हैं, जिनके उम्मीदवारों के परीक्षा में अनुपस्थित रहने का दावा किया जा रहा है।हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और आयोग की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण आवश्यक है। केवल उम्मीदवारों द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर चयन प्रक्रिया को दोषपूर्ण घोषित नहीं किया जा सकता।भाजपा नेताओं ने यह भी कहा कि पंजाब सरकार को सभी संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए, ताकि परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों का भरोसा कायम रह सके। पार्टी की मांग है कि चयन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएइस बीच केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने भी पंजाब सरकार की भर्ती संबंधी नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भगवंत मान सरकार लगातार बिना सिफारिश और बिना रिश्वत नौकरियां देने का दावा करती रही है, लेकिन पीसीएस मुख्य परीक्षा के परिणामों को लेकर सामने आए आरोप गंभीर सवाल खड़े करते हैं।पंजाब में भर्ती परीक्षाओं को लेकर पहले भी राजनीतिक विवाद सामने आ चुके हैं। विभिन्न विपक्षी दलों ने सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की है।
वहीं, मुख्यमंत्री भगवंत मान पूर्व में इन आरोपों को खारिज कर चुके हैं। जुलाई 2026 में उन्होंने दावा किया था कि आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल में प्रतियोगी परीक्षाओं का कोई पेपर लीक नहीं हुआ। उन्होंने विपक्ष पर पंजाब की छवि खराब करने का आरोप भी लगाया था।पीसीएस मुख्य परीक्षा के ताजा परिणामों पर पांच नवंबर तक उपलब्ध रिपोर्टों में पंजाब लोक सेवा आयोग और राज्य सरकार की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। ऐसे में आयोग का स्पष्टीकरण इस पूरे विवाद में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।शिक्षा और भर्ती मामलों से जुड़े जानकारों के अनुसार, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद आवश्यक है। किसी परीक्षा के परिणाम पर गंभीर सवाल उठने की स्थिति में निष्पक्ष जांच से अभ्यर्थियों का भरोसा बनाए रखने में मदद मिल सकती है।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पंजाब सरकार और लोक सेवा आयोग इन आरोपों की जांच कराने का निर्णय लेते हैं। भाजपा सीबीआई जांच की मांग पर अड़ी हुई है, जबकि अभ्यर्थियों का एक वर्ग भी परिणामों की समीक्षा चाहता है।फिलहाल पंजाब पीसीएस मुख्य परीक्षा का विवाद राजनीतिक मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में आयोग के स्पष्टीकरण और संभावित जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भर्ती प्रक्रिया में वास्तव में कोई अनियमितता हुई थी या आरोप निराधार हैं।
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