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जामिया यूनिवर्सिटी में तोड़फोड़ से बढ़ा बवाल, दिल्ली पुलिस की जांच तेज

Ratna Netam
29 Oct 2026 6:51 PM IST
जामिया यूनिवर्सिटी में तोड़फोड़ से बढ़ा बवाल, दिल्ली पुलिस की जांच तेज
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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली की प्रतिष्ठित जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ की बहाली को लेकर जारी आंदोलन के बीच तोड़फोड़ और हंगामे का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। विश्वविद्यालय परिसर में कथित रूप से जबरन प्रवेश करने, संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और सुरक्षा व्यवस्था बाधित करने के आरोपों को लेकर दिल्ली पुलिस ने जांच तेज कर दी है। विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत पर पहले ही एक प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। वहीं, अन्य शिकायतों के आधार पर दूसरी एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा तेज है। हालांकि, 29 अक्टूबर तक उपलब्ध रिपोर्टों में दूसरी एफआईआर दर्ज होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 12 अक्टूबर से छात्रसंघ की बहाली और चुनाव कराने की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है। प्रदर्शनकारी छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रसंघ चुनाव की तारीख घोषित करने और लोकतांत्रिक छात्र प्रतिनिधित्व की व्यवस्था बहाल करने की मांग कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान कई छात्र भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत के कई दौर होने के बावजूद विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
इस बीच 27 अक्टूबर की रात विश्वविद्यालय परिसर में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। जामिया प्रशासन ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों और कुछ बाहरी लोगों के समूह ने विश्वविद्यालय के प्रवेश द्वारों तथा चारदीवारी को नुकसान पहुंचाया। प्रशासन के अनुसार, गेट नंबर 4सी को गिरा दिया गया, जबकि सीसीटीवी कैमरों, उनके कनेक्शन और कंट्रोल रूम को भी क्षतिग्रस्त किया गया।विश्वविद्यालय प्रशासन ने 28 अक्टूबर को जारी बयान में कहा कि परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। प्रशासन के मुताबिक, कुछ नकाबपोश लोग कथित रूप से लोहे की छड़ों, हथौड़ों और अन्य उपकरणों के साथ परिसर में पहुंचे थे। इन लोगों पर विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। हालांकि, घटनाओं में शामिल लोगों की पहचान और उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी पुलिस की जांच से स्पष्ट होगी।
पुलिस की शुरुआती कार्रवाई में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार की ओर से मिली शिकायत महत्वपूर्ण रही है। 25 अक्टूबर को दर्ज पहली एफआईआर में परिसर में अनधिकृत प्रवेश, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और कर्मचारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार जैसे आरोप शामिल किए गए। इस मामले में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और इमरान प्रतापगढ़ी सहित कुछ राजनीतिक नेताओं के नाम भी सामने आए हैं।शिकायत में आरोप लगाया गया कि आंदोलन के दौरान कुछ बाहरी लोग बिना अनुमति परिसर में पहुंचे। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इससे तनाव बढ़ा और सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। हालांकि, एफआईआर में किसी व्यक्ति का नाम शामिल होना अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। आरोपों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही जिम्मेदारी तय होगी।
दिल्ली पुलिस को विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अलग-अलग घटनाओं को लेकर कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं। 26 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस को कुल चार शिकायतें मिली थीं, जिनमें से एक पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी थी। अन्य शिकायतों की जांच की जा रही थी। पुलिस सूत्रों के हवाले से यह भी बताया गया कि घटनाओं में शामिल होने के संदेह में लगभग 150 लोगों की पहचान की गई है।इन लोगों की पहचान के लिए पुलिस सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो, तस्वीरों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का सहारा ले रही है। पुलिस का उद्देश्य यह पता लगाना है कि परिसर में हुई अलग-अलग घटनाओं के दौरान कौन-कौन लोग मौजूद थे और कथित तोड़फोड़ में उनकी क्या भूमिका रही।
वहीं, 28 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त डीसीपी उत्कर्ष ने बताया था कि 27 अक्टूबर की रात हुई घटना विश्वविद्यालय परिसर के भीतर की है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन से शिकायत मिलने पर पुलिस आवश्यक कार्रवाई करेगी। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से सार्वजनिक किए गए वीडियो और अन्य सामग्री की जांच का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो गया है।जामिया प्रशासन ने यहभी आरोप लगाया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने महिला शिक्षकों, वार्डन और अन्य अधिकारियों के साथ अनुचित व्यवहार किया। प्रशासन के अनुसार, परिसर में लगातार तनावपूर्ण माहौल बनने से छात्रों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है।
दूसरी ओर, आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि उनका प्रदर्शन छात्रसंघ चुनाव की बहाली जैसी लोकतांत्रिक मांगों को लेकर है। प्रदर्शन से जुड़े कुछ छात्र प्रतिनिधियों ने हिंसा और तोड़फोड़ का समर्थन करने से इनकार किया है। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर के प्रवेश द्वार बंद करके तथा अन्य प्रतिबंध लगाकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन को प्रभावित किया है।छात्रों ने यह भी शिकायत की है कि आंदोलन के दौरान पानी, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच बाधित हुई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे विश्वविद्यालय प्रशासन से लिखित आश्वासन और छात्रसंघ चुनाव की स्पष्ट समयसीमा चाहते हैं।
लगातार बढ़ते तनाव को देखते हुए विश्वविद्यालय परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। मौलाना मोहम्मद अली जौहर मार्ग तथा विश्वविद्यालय के प्रमुख प्रवेश द्वारों के आसपास पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया है। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षाकर्मी लगातार निगरानी कर रहे हैं।इस विवाद का असर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों पर भी पड़ा है। प्रशासन ने ऑनलाइन कक्षाओं की अवधि 24 नवंबर तक बढ़ाने का फैसला किया है। इसके अलावा सेमेस्टर की परीक्षाएं भी ऑनलाइन माध्यम से कराने की योजना घोषित की गई है। विश्वविद्यालय के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला किया गया है।
विश्वविद्यालय में बढ़ते तनाव के कारण 29 अक्टूबर को निर्धारित 106वें स्थापना दिवस से जुड़े कार्यक्रम भी प्रभावित हुए हैं। प्रशासन ने तालीमी मेले सहित कुछ प्रमुख आयोजनों को रद्द करने का निर्णय लिया है।फिलहाल जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ की बहाली, परिसर की सुरक्षा और कथित तोड़फोड़ की घटनाएं तीन प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। अब पुलिस की जांच में जुटाए गए साक्ष्यों और विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायतों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी। साथ ही प्रशासन और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत से विवाद का समाधान निकलता है या नहीं, इस पर भी सभी की नजरें बनी हुई हैं।
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