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BRICS समिट पर चीन का सस्पेंस जिनपिंग के दौरे की पुष्टि नहीं

Ratna Netam
10 Sept 2026 3:44 PM IST
BRICS समिट पर चीन का सस्पेंस जिनपिंग के दौरे की पुष्टि नहीं
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नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने जा रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से ठीक पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भागीदारी को लेकर सस्पेंस बरकरार है। सम्मेलन में अब महज दो दिन बाकी हैं, लेकिन बीजिंग ने अभी तक औपचारिक रूप से यह घोषणा नहीं की है कि चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व शी जिनपिंग ही करेंगे। हालांकि भारत में उनके संभावित दौरे को लेकर तैयारियां चल रही हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनके नई दिल्ली पहुंचने की व्यापक उम्मीद जताई जा रही है।
Reuters की 10 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक शी जिनपिंग के इस सप्ताह नई दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है। अगर यह यात्रा होती है तो करीब सात साल बाद उनका पहला भारत दौरा होगा। इसके बावजूद चीन की ओर से यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच BRICS के इतर द्विपक्षीय बैठक होगी या नहीं, इस पर भी बीजिंग की तरफ से स्पष्ट घोषणा नहीं की गई है।
चीनी विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
शी जिनपिंग की भारत यात्रा को लेकर चीन के विदेश मंत्रालय से लगातार सवाल किए जा रहे हैं। जुलाई में भी जब चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग से पूछा गया था कि क्या राष्ट्रपति शी BRICS सम्मेलन में शामिल होंगे, तब उन्होंने कहा था कि इस बारे में साझा करने के लिए उनके पास कोई जानकारी नहीं है।
हालांकि चीन ने साथ ही यह जरूर कहा था कि वह BRICS सहयोग को बहुत महत्व देता है और भारत की अध्यक्षता में होने वाले शिखर सम्मेलन की सफलता का समर्थन करता है।
सम्मेलन के बिल्कुल करीब आने के बावजूद औपचारिक घोषणा नहीं होने के कारण अटकलें तेज हैं। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक चीनी विदेश मंत्रालय से जब पूछा गया कि प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कौन करेगा तो जवाब दिया गया कि कोई अपडेट होने पर जानकारी जारी की जाएगी।
भारत में शी के स्वागत की तैयारी
दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ बीजिंग औपचारिक पुष्टि नहीं कर रहा है तो दूसरी तरफ नई दिल्ली में शी जिनपिंग के संभावित दौरे को ध्यान में रखकर सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक चीनी और रूसी सुरक्षा टीमें अपने-अपने नेताओं की संभावित यात्रा से पहले दिल्ली के निर्धारित होटलों में पहुंच चुकी हैं। शी जिनपिंग की सुरक्षा की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को दिए जाने की तैयारी है। चीनी राष्ट्रपति के लिए चाणक्यपुरी इलाके में अलग होटल की व्यवस्था की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक शी जिनपिंग के 12 सितंबर को भारत पहुंचने की तैयारी की जा रही है, जबकि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के 11 सितंबर को आने की संभावना है।
BRICS सम्मेलन की सुरक्षा में करीब 30 हजार सुरक्षाकर्मियों को लगाए जाने की तैयारी है। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के काफिलों से लेकर उनके ठहरने वाले होटलों और सम्मेलन स्थल तक कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
सात साल बाद हो सकती है भारत यात्रा
शी जिनपिंग अगर BRICS सम्मेलन में शामिल होने नई दिल्ली आते हैं तो यह उनकी करीब सात वर्षों में पहली भारत यात्रा होगी।
भारत और चीन के संबंधों के लिहाज से यह यात्रा बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख में सीमा तनाव और गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्तों में भारी गिरावट आई थी।
हालांकि पिछले कुछ समय में रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिले हैं। दोनों देशों के बीच उच्च स्तर की बातचीत बढ़ी है और सीमा से जुड़े मुद्दों पर भी संवाद जारी है।
Reuters के मुताबिक राजनीतिक स्तर पर रिश्तों में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन आर्थिक और कारोबारी संबंधों में अभी भी कई तरह की बाधाएं मौजूद हैं।
मोदी-शी मुलाकात पर भी नजर
अगर शी जिनपिंग नई दिल्ली आते हैं तो सबसे ज्यादा नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संभावित द्विपक्षीय बैठक पर रहेगी।
दोनों नेताओं की मुलाकात इसलिए महत्वपूर्ण होगी क्योंकि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के अलावा व्यापार, निवेश, वीजा, तकनीक और औद्योगिक उपकरणों की आपूर्ति जैसे कई मुद्दे लंबित हैं।
Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देशों के कारोबारी संबंधों में अभी भी आपसी अविश्वास दिखाई देता है। भारत में कुछ चीनी निवेश प्रस्तावों को नियामकीय जांच का सामना करना पड़ा है, जबकि भारतीय कारोबारियों को चीन में वीजा और कुछ औद्योगिक उपकरणों की उपलब्धता से जुड़ी परेशानियों का सामना करने की रिपोर्टें सामने आई हैं।
ऐसे में मोदी और शी की संभावित मुलाकात दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
चीन ने BRICS पर भारत का किया समर्थन
शी जिनपिंग की यात्रा पर भले ही चीन ने आधिकारिक घोषणा नहीं की हो, लेकिन BRICS सम्मेलन को लेकर बीजिंग का रुख सकारात्मक है।
भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने हाल ही में BRICS सम्मेलन पर प्रकाशित एक लेख में कहा कि चीन भारत की BRICS अध्यक्षता का पूरा समर्थन करता है और सभी सदस्य तथा साझेदार देशों के साथ मिलकर संगठन के विकास को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।
उन्होंने भारत-चीन संबंधों का भी उल्लेख किया और कहा कि दोनों देशों के रिश्तों में इस साल सुधार की गति बनी हुई है।
चीनी राजदूत ने यह भी कहा कि भारत और चीन लगातार दो वर्षों में BRICS की अध्यक्षता संभाल रहे हैं। भारत 2026 में अध्यक्ष है, जबकि चीन अगले साल इसकी जिम्मेदारी संभालेगा। ऐसे में दोनों देशों के बीच समन्वय BRICS के लिए महत्वपूर्ण होगा।
BRICS में भारत के सामने कई बड़े मुद्दे
इस बार का BRICS सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया कई भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों से गुजर रही है।
पश्चिम एशिया में तनाव और तेल की कीमतों में उछाल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने नई मुश्किलें पैदा कर दी हैं। सम्मेलन के संयुक्त घोषणापत्र में पश्चिम एशिया के घटनाक्रम को लेकर सदस्य देशों के बीच सहमति बनाना भारत के लिए चुनौती हो सकता है।
इसके अलावा भारत BRICS देशों की केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं यानी CBDC को आपस में जोड़कर सीमा पार भुगतान आसान बनाने के प्रस्ताव को भी आगे बढ़ा रहा है।
Reuters के मुताबिक भारत का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय लेनदेन को आसान और तेज बनाना है। हालांकि BRICS के भीतर राजनीतिक और तकनीकी मतभेद इस योजना के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
11 देशों का हो चुका है BRICS
BRICS अब अपने पुराने पांच सदस्य देशों तक सीमित नहीं है। इसका विस्तार हो चुका है और वर्तमान समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।
भारत की अध्यक्षता में होने वाला 18वां BRICS सम्मेलन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विस्तारित संगठन के भीतर अलग-अलग राजनीतिक और आर्थिक हितों के बीच सहमति बनाने की चुनौती पहले से ज्यादा बड़ी है।
पुतिन की यात्रा पर भी दुनिया की नजर
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के BRICS सम्मेलन के लिए भारत आने की तैयारी भी जोर-शोर से चल रही है। दिल्ली में उनके लिए अलग होटल और विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।
पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी सम्मेलन के प्रमुख आकर्षणों में रहने वाली है।
इसी वजह से अब सबसे बड़ा सवाल चीन को लेकर है। अगर शी जिनपिंग आते हैं तो BRICS के मंच पर भारत, चीन और रूस के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी सम्मेलन का राजनीतिक महत्व कई गुना बढ़ा देगी।
चीन की चुप्पी के क्या हैं मायने?
बीजिंग की तरफ से शी जिनपिंग की यात्रा की पुष्टि नहीं किए जाने को सीधे भारत के लिए “झटका” मानना अभी जल्दबाजी होगी।
इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक शी के नई दिल्ली आने की संभावना अब भी बनी हुई है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां भी इसी संभावना को ध्यान में रखकर तैयारियां कर रही हैं। Reuters भी उनकी यात्रा को व्यापक रूप से अपेक्षित बता रहा है।
इसलिए फिलहाल सही स्थिति यही है कि **शी जिनपिंग के BRICS सम्मेलन में आने पर औपचारिक मुहर नहीं लगी है लेकिन उनके भारत आने की संभावना मजबूत बनी हुई है।**
आखिरी वक्त तक रहेगा सस्पेंस?
BRICS सम्मेलन शुरू होने में अब बेहद कम समय बचा है। ऐसे में चीन की तरफ से प्रतिनिधिमंडल को लेकर होने वाली आधिकारिक घोषणा पर पूरी दुनिया की नजर है।
अगर शी जिनपिंग नई दिल्ली पहुंचते हैं तो यह भारत-चीन संबंधों में चल रही नरमी को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण मौका होगा। खासकर प्रधानमंत्री मोदी के साथ संभावित मुलाकात सीमा विवाद से लेकर व्यापार और निवेश तक कई मुद्दों पर आगे का रास्ता खोल सकती है।
वहीं अगर आखिरी समय में शी जिनपिंग सम्मेलन से दूरी बनाते हैं और उनकी जगह कोई दूसरा वरिष्ठ चीनी नेता आता है तो इसके राजनीतिक और कूटनीतिक संकेतों का अलग से विश्लेषण किया जाएगा।
फिलहाल भारत में तैयारियां जारी हैं और चीन BRICS की भारतीय अध्यक्षता को समर्थन भी दे रहा है। लेकिन राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी पर बीजिंग की औपचारिक मुहर का इंतजार बाकी है। अगले कुछ घंटों में चीन की घोषणा इस सस्पेंस को खत्म कर सकती है।
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