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जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन को लेकर हाई कोर्ट में आज अहम सुनवाई

nidhi
13 Oct 2026 6:41 AM IST
जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन को लेकर हाई कोर्ट में आज अहम सुनवाई
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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बंद करने की मांग
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर को अधिसूचित प्रोटेस्ट साइट की सूची से हटाने का मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को सुनवाई निर्धारित है। सोमवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ के सामने मामला उठाया गया था। अदालत ने तत्काल सुनवाई करने के बजाय इसे मंगलवार के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत में कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने से नागरिकों के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के लिए कोई उचित वैकल्पिक स्थान उपलब्ध नहीं कराया गया है। इस कारण लोग अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज नहीं करा पा रहे हैं।
अधिवक्ता ने सोमवार को ही मामले की सुनवाई करने का अनुरोध किया था। हालांकि, अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी संबंधित विषय पर विचार कर रहा है। ऐसे में हाई कोर्ट को यह देखना होगा कि वह मामले में किस सीमा तक हस्तक्षेप कर सकता है। इसके बाद मंगलवार, 13 अक्टूबर को सुनवाई निर्धारित की गई। दिल्ली पुलिस ने हाल ही में जंतर-मंतर को अधिसूचित विरोध प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया है। पुलिस की ओर से जारी आदेश में सार्वजनिक प्रदर्शनों के लिए तीन अन्य स्थान निर्धारित किए गए हैं। यह बदलाव अप्रैल 2022 के पुराने स्थायी आदेश में आंशिक संशोधन के रूप में किया गया है।
जंतर-मंतर लंबे समय से विभिन्न सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों, कर्मचारी संगठनों और नागरिक समूहों के विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है। संसद भवन और केंद्रीय सरकारी कार्यालयों के अपेक्षाकृत नजदीक होने के कारण यहां आयोजित धरने और प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित करते रहे हैं। प्रदर्शन स्थल के रूप में इसकी स्थिति में बदलाव के बाद शांतिपूर्ण सभा करने के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी को लेकर कानूनी सवाल उठे हैं। याचिका में इसी विषय को अदालत के सामने रखा गया है।
इस मामले के साथ दिल्ली हाई कोर्ट में एक अन्य याचिका पर भी सुनवाई होनी है। यह याचिका 10 अक्टूबर को कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर के आसपास प्रदर्शनकारियों पर हुए कथित हमलों से संबंधित है। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने अदालत से कथित हमलों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नागरिक कपड़ों में मौजूद कुछ लोगों ने प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे व्यक्तियों के साथ मारपीट की।
जाखड़ ने याचिका में संबंधित घटनाओं के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की भी मांग की है। इनमें कनॉट प्लेस, संसद मार्ग, जंतर-मंतर रोड और आसपास के मेट्रो स्टेशनों के कैमरों की रिकॉर्डिंग शामिल है। याचिका में कहा गया है कि फुटेज से घटनाओं की परिस्थितियों और कथित हमलावरों की पहचान करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इन आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इस बीच भारतीय युवा कांग्रेस की ओर से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति से संबंधित मामला भी अदालत में उठाया गया है। संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करना चाहता है। दिल्ली पुलिस से इस मामले में जवाब मांगा गया है। जंतर-मंतर को लेकर जारी विवाद के बीच यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार और राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता के बीच किस प्रकार संतुलन स्थापित किया जाए।
संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने का अधिकार प्रदान करता है। हालांकि, इन अधिकारों पर कानून के अनुसार उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। मंगलवार की सुनवाई में अदालत के सामने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने की वैधता, वैकल्पिक स्थानों की उपलब्धता और संबंधित याचिकाओं के मुद्दे रहेंगे। फिलहाल अदालत का अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।
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