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दिल्ली-एनसीआर
दिल्ली में बाढ़ से बचाव के लिए 622 करोड़ की बड़ी योजना मंजूर
Ratna Netam
23 Oct 2026 7:17 PM IST

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बाढ़ और जलभराव की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। दिल्ली सरकार ने शहर की बाढ़ प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से लगभग 622 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में यमुना नदी के किनारे 4.7 किलोमीटर लंबी सुरक्षा दीवार का निर्माण और नालों में गाद जमा होने की समस्या को दूर करने के लिए तीन महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य मानसून के दौरान बाढ़ के खतरे को कम करना और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को बेहतर सुरक्षा प्रदान करना है।यह निर्णय शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को दिल्ली सचिवालय में आयोजित बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की 40वीं बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने की। इस दौरान दिल्ली की बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था और जल निकासी से जुड़ी परियोजनाओं पर विचार किया गया।
यमुना किनारे बनेगी 4.7 किलोमीटर लंबी दीवार
सरकार की स्वीकृत परियोजनाओं में यमुना नदी के किनारे सुरक्षा दीवार का निर्माण प्रमुख है। इसके लिए लगभग 99 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।यह दीवार मैगजीन रोड नाले से पुराने रेलवे पुल तक लगभग 4.7 किलोमीटर लंबे हिस्से में बनाई जाएगी। निर्माण में रीइन्फोर्स्ड सीमेंट कंक्रीट (RCC) का इस्तेमाल किया जाएगा।इसका उद्देश्य यमुना का जलस्तर बढ़ने पर पानी को आसपास के निचले इलाकों में प्रवेश करने से रोकना है। साथ ही नदी के किनारे स्थित सड़कों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को बाढ़ से होने वाले नुकसान से बचाने में भी मदद मिलेगी।दिल्ली सरकार के आधिकारिक निविदा पोर्टल पर इस सुरक्षा दीवार से संबंधित निर्माण कार्य की अनुमानित लागत लगभग 96.92 करोड़ रुपये दर्ज है।
निचले इलाकों को मिलेगी बाढ़ से सुरक्षा
दिल्ली में मानसून के दौरान यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से कई बार आसपास के इलाकों में बाढ़ जैसी परिस्थितियां बन जाती हैंविशेष रूप से नदी के नजदीक स्थित आवासीय क्षेत्रों और प्रमुख सड़कों पर पानी भरने की समस्या सामने आती रही है।वर्ष 2023 में यमुना का जलस्तर बढ़ने से राजधानी के कई हिस्सों में गंभीर बाढ़ आई थी। इसके बाद बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में स्थायी सुरक्षा उपायों की आवश्यकता महसूस की गई।प्रस्तावित सुरक्षा दीवार का उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों में नुकसान कम करना है। हालांकि, दीवार का वास्तविक प्रभाव निर्माण पूरा होने और उसकी तकनीकी क्षमता पर निर्भर करेगा।
नालों से गाद हटाने के लिए तीन परियोजनाएं
बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की बैठक में नालों में गाद जमा होने की समस्या को दूर करने के लिए तीन परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई।दिल्ली में नालों के भीतर मिट्टी, कचरा और गाद जमा होने से पानी का सामान्य प्रवाह प्रभावित होता है। भारी बारिश के दौरान पर्याप्त निकासी नहीं होने से सड़कों और आवासीय क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है।नई परियोजनाओं का उद्देश्य जल निकासी व्यवस्था की क्षमता बढ़ाना और नालों में पानी के प्रवाह को बेहतर बनाना है।कुल 622 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि में से लगभग 523 करोड़ रुपये अन्य तीन परियोजनाओं से संबंधित हैं। हालांकि, इन परियोजनाओं की अलग-अलग लागत और विस्तृत निर्माण कार्यों की आधिकारिक जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।
बाढ़ से प्रभावित इलाकों पर विशेष ध्यान
दिल्ली सरकार का ध्यान यमुना के आसपास स्थित संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा बढ़ाने पर है।मजनू का टीला, सिविल लाइंस, कश्मीरी गेट और यमुना बाजार जैसे इलाकों में पहले भी नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा सामने आया है।यमुना किनारे प्रस्तावित सुरक्षा दीवार से इन क्षेत्रों में बाढ़ के जोखिम को कम करने की उम्मीद है।इस परियोजना के तहत नदी किनारे मिट्टी के कटाव को रोकने और सड़क संपर्क बनाए रखने में भी मदद मिलने की संभावना है।
मार्च 2027 तक दीवार तैयार करने का लक्ष्य
दिल्ली सरकार ने इससे पहले राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को जानकारी दी थी कि मैगजीन नाले से पुराने रेलवे पुल तक प्रस्तावित बाढ़ सुरक्षा दीवार का निर्माण 31 मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।सरकार ने बताया था कि परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता का अध्ययन किया जा चुका है और निर्माण के लिए आवश्यक स्वीकृतियों की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।इस परियोजना के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन सहित संबंधित संस्थाओं से आवश्यक मंजूरी भी महत्वपूर्ण होगी।
मानसून से पहले तैयारी मजबूत करने पर जोर
दिल्ली सरकार की इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य भविष्य में बाढ़ और जलभराव से होने वाले नुकसान को कम करना है।सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के सामने अब स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समय पर पूरा करने की चुनौती होगी।विशेषज्ञों के अनुसार, बाढ़ प्रबंधन के लिए सुरक्षा दीवारों के साथ नालों की नियमित सफाई, जल निकासी व्यवस्था की निगरानी और समय पर चेतावनी जारी करना भी आवश्यक है।दिल्ली में लगभग 622 करोड़ रुपये की इन परियोजनाओं से बाढ़ नियंत्रण के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद राजधानी के संवेदनशील इलाकों में बाढ़ के जोखिम को कम करने में सहायता मिल सकती है।
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