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Delhi दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई है। इस बातचीत में विशेष रूप से छोटे और एडवांस्ड मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) जैसे आधुनिक परमाणु तकनीक क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया।
यह बातचीत प्रधानमंत्री की फ्रांस यात्रा के दौरान हुई, जहां दोनों नेताओं ने ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और तकनीकी सहयोग के भविष्य को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि आने वाले समय में परमाणु ऊर्जा वैश्विक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी और इसमें सहयोग को नई दिशा दी जानी चाहिए।
इस अवसर पर Narendra Modi और Emmanuel Macron ने छोटे और उन्नत परमाणु रिएक्टरों के विकास, निर्माण और तकनीकी साझेदारी पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। दोनों नेताओं ने माना कि SMR तकनीक भविष्य में ऊर्जा उत्पादन को अधिक सुरक्षित, सस्ता और पर्यावरण अनुकूल बनाने में मदद कर सकती है।
इसी दौरान विदेश सचिव Vikram Misri ने प्रधानमंत्री मोदी की नीस यात्रा के दौरान एक विशेष ब्रीफिंग में जानकारी दी कि भारत ने फ्रांसीसी परमाणु कंपनियों को अपने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सीधे भागीदारी के लिए आमंत्रित किया है। यह आमंत्रण भारत की नई नीति दिशा का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाना और उन्नत तकनीक को देश में लाना है।
ब्रीफिंग में यह भी बताया गया कि भारत ने इस सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए “SHANTI Act” के तहत एक नया ढांचा प्रस्तावित किया है। इस एक्ट के माध्यम से विदेशी कंपनियों को भारतीय परमाणु क्षेत्र में अधिक पारदर्शी और संरचित तरीके से भागीदारी का अवसर मिलेगा।
भारत और फ्रांस दोनों ने इस बात पर सहमति जताई कि ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग केवल बड़े रिएक्टरों तक सीमित न रहे, बल्कि छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों जैसी नई तकनीकों पर भी तेजी से काम किया जाए। इससे न केवल ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का यह कदम वैश्विक परमाणु बाजार में नए निवेश और तकनीकी सहयोग के दरवाजे खोल सकता है। फ्रांस पहले से ही परमाणु ऊर्जा तकनीक में अग्रणी देशों में शामिल है, और भारत के साथ उसकी साझेदारी से दोनों देशों को रणनीतिक और आर्थिक लाभ मिल सकता है।
बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और दीर्घकालिक स्थिर ऊर्जा आपूर्ति जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए देशों के बीच तकनीकी सहयोग और भरोसेमंद साझेदारी बेहद जरूरी है।
कुल मिलाकर, भारत-फ्रांस परमाणु सहयोग को लेकर हुई यह चर्चा आने वाले वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलावों की ओर संकेत करती है, जिसमें आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।





